मेरी फितरत भी कुछ पत्तों सी है, जब भी टूटता हूं, मैं उड़ने लगता हूं..
पुस्तक 'मैं गली हूं...' का हुआ विमोचन बलिया। जिले के रहने वाले वरिष्ठ पत्रकार विवेक कुमार पांडेय की कविता की किताब 'मैं गली हूं...' का लोकार्पण शनिवार को किया गया। जनपद के एनसीसी चौराहा स्थित एक होटल में किताब का विमोचन हुआ। इस अवसर पर एक पत्रकार द्वारा लिखी गई कविताओं को सराहा गया। "मेरी फितरत भी कुछ पत्तों सी है, जब भी टूटता हूं, मैं उड़ने लगता हूं..." का जिक्र कई वरिष्ठों ने किया। इसके साथ ही विवेक को उनकी आगामी कृतियों के लिए शुभकामनाएं भी दी गई। इस अवसर पर जनपद के वरिष्ठ साहित्याकर डॉ. जनार्दन राय ने कहा कि कविता मनुष्यता की भाषा है। यह हमारी संवेदनाओं को जगाती है। इसी संवेदना की कसौटी पर विवेक की कविताएं प्रभावित करती हैं। इनकी कविताओं में अखबारी जीवन के लंबे अनुभव को भी देखा जा सकता है। पत्रकार अशोक ने कहा कि विवेक शुरू से ही पत्रकारिता जगत में एक संवेदनशील पत्रकार रहे हैं। इनकी संवेदना इनकी कविताओं में भी नजर आ रही है। इस अवसर पर जिले के वरिष्ठ साहित्याकर डॉ. जनार्दन राय, वरिष्ठ पत्रकार अशोक सिंह, वरिष्ठ पत्रकार मनोरंजन सिंह, साहित्यकार श...