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क्या पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित होगा देश का 100 वां 'रामसर साईट' सुरहा ताल?: डाॅ० गणेश पाठक

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सुरहा ताल को उत्तर -प्रदेश का 13वां 'रामसर साईट' किया गया है घोषित  भारत का 100 वां 'रामसर साईट' घोषित होने पर सुरहा ताल परिक्षेत्र एवं पक्षी विहार अभ्यारण्य का पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित होने की तरफ लगी है सबकी उम्मीदें। क्या पूरी हो पायेगी यह उम्मीद? पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी को संतुलित रखने वाला एवं जैविक विविधता से परिपूर्ण सुरहा ताल का उपग्रह से लिया गया खूबसूरत छायाचित्र तथा उसके चतुर्दिक स्थित क्षेत्र का खूबसूरत परिदृश्य। साथ में नीचे बलिया नगर की स्थिति भी स्पष्ट  रूप से परिलक्षित हो रही है। 34 वर्ग किमी० से अधिक क्षेत्र में फैले सुरहा ताल अपने देश के प्रमुख आर्द्र भूमियों में से एक है, जिसमें पादप जगत एवं जीव जंतु जगत से परिपूर्ण जैव विविधता पाई जाती है। यही नहीं इस प्राकृतिक ताल में जाड़े के दिनों में विदेशी पक्षियों की भरमार रहती, जिसमें खासतौर से रंग - बिरंगी  साइबेरियन पक्षियां अधिक आती हैं, जिनसे सुरहा ताल गुलजार हो जाता है और पर्यटक अनायास ही सुरहा ताल की तरफ खिंचे चले आते हैं। लेकिन अभी तक यहां पर्यटन से संबंधित कोई भी सुव...

अब नहीं आ रहें सुरहा ताल में प्रवासी पक्षी

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बढ़ता जा रहा है सुरहा ताल में जैव विविधता पर संकट      वर्तमान समय में सुरहा ताल अपने अस्तित्व से जूझ रहा है। कारण कि सुरहा ताल में पोषित जैव विविधता पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। सुरहा ताल में रहने वाले जीव -जंतुओं एवं प्रवासी पक्षियों के प्राकृतिक आवास समाप्त होते जा रहे हैं। सुरहा ताल परिक्षेत्र में पारिस्थितिकी असंतुलन बढ़ता जा रहा है। जीव -जंतुओं की प्रजातियां धीरे -धीरे समाप्त होती जा रही है, जो स्पष्टत: दिखाई दे रहा है।                  डॉ. गणेश पाठक (पर्यावरणविद) सुरहा ताल की जैव विविधता पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। इसका मुख्य कारण सुरहा ताल परिक्षेत्र में मानव की बढ़ती गतिविधियां -जैसे -सुरहा ताल का क्षेत्रफल कम होना, पक्षियों सहित अन्य जीव- जंतुओं का अवैध शिकार होना, वर्षा में कमी के कारण सुरहा ताल में जल की कमी होना, जलवायु परिवर्तन के कारण अभी अति वृष्टि से जल प्लावन की स्थिति उत्पन्न होना, तो कभी अनावृष्टि अर्थात् कम बर्षा के कारण सूखा की स्थिति उत्पन्न होना, जलवायु परिवर्तन के कारण भी...