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Showing posts from November, 2026

भारतीय संस्कृति एवं पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से अति महत्वपूर्ण है मिट्टी का दीपक जलाना -डाॅ० गणेश पाठक पर्यावरणविद्

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न केवल दीपावली में, बल्कि प्रत्येक दिन घर में मिट्टी का  दीपक(दीया) तथा उसमें घी या सरसो का तेल या तील का तेल डालकर कपास की रूई की बाती बनाकर दीपक में रखकर दीपक जलाना न केवल हमारे पूजा एवं श्रद्धा का प्रतीक है, बल्कि हमारी सनातन संस्कृति की अति प्राचीन सांस्कृतिक परम्परा रही है और किसी खास खुशी या पर्व त्यौहार के अवसर पर दीपक जलाना हमारी भारतीयता की अटूट पहचान है।   सनातन संस्कृति में या यों कहें कि हमारे भारतीय परम्परा में दीप को प्रज्वलित करना अति शुभ, सकरात्मक एवं प्रकाश उत्पन्न कर ज्ञान की अभिवृद्धि करने वाला तथा नकारात्मता को समाप्त कर सकारात्मकता का समावेश करते हुए ऊर्जा प्रदान करने वाला माना गया है।    खासतौर से दीपावली के दिन सामूहिक रूप से सभी लोगों द्वारा सर्वत्र दीप प्रज्वलित करना अंधकार पर प्रकाश के विजय का प्रतीक माना गया है। बुराई पर अच्छाई का प्रतीक माना गया है। बुरी शक्तियों का नाश कर सकारात्मक सोच उत्पन्न करने वाला माना गया है। यही नहीं जो नकारात्क शक्तियों  हैं एवं अज्ञानता को समाप्त कर जीवन एवं पूरे वातावरण में सकारात्मकता के ...

अमावस्या का अंधकार, वैकुंठ का रहस्य और विज्ञान का सच :ईशान पाठक

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वैकुंठ का रहस्य और शत्रुता में छिपी परम भक्ति- जब हम दीवाली की रात को इस घने अंधेरे (अमावस्या) के बीच अपने घरों की चौखट पर छोटे-छोटे दीये जलाते हैं, तो दिमाग में बस एक ही बात आती है कि हम एक दुश्मन की हार और भगवान राम के अयोध्या लौटने की खुशी मना रहे हैं। पर क्या रावण सच में सिर्फ एक  दुश्मन था? अगर हम अपनी सनातन परंपरा को थोड़ा गहराई से देखें, तो पता चलेगा कि इस पूरी कहानी की स्क्रिप्ट तो बहुत पहले ही वैकुंठ धाम में लिखी जा चुकी थी।   जिसे हम लंका का राजा रावण कहते हैं, वह असल में भगवान विष्णु के सबसे खास और वफादार द्वारपाल 'जय' थे, और उनके भाई कुंभकर्ण दूसरे द्वारपाल 'विजय' के अवतार थे। किस्सा कुछ ऐसा है कि एक बार ब्रह्मा जी के चार मानस पुत्र—सनत्कुमार ऋषियों का वैकुंठ आना हुआ। ये ऋषि बहुत ज्ञानी थे और उनकी उम्र करोड़ों साल थी, लेकिन अपनी शक्तियों की वजह से वे हमेशा पाँच साल के छोटे बच्चों जैसे ही दिखते थे। जय और विजय उन्हें पहचान नहीं पाए और बच्चा समझकर अंदर जाने से रोक दिया। ऋषियों को यह बात बुरी लगी, उन्होंने कहा कि नारायण के दरबार में तो सब बराबर हैं...

जनता के वास्तविक मुद्दों पर चर्चा करने से बच रही है भाजपा सरकार: सुशील पाण्डेय कान्हजी

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कहा: लोकतंत्र बचाने के लिए भाजपा को करनी पड़ रही हैं रैलियां, यह सरकार की विफलता का प्रमाण बलिया। बहुत आश्चर्य की बात है कि देश की सत्ता में बैठी भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष, केंद्रीय मंत्रियों यहां तक कि गृह मंत्री जिसके जिम्मे आंतरिक सुरक्षा की सम्पूर्ण जिम्मेदारी है साथ में अन्य नेताओं को  जगह-जगह लोकतंत्र बचाने के लिए बड़ी-बड़ी रैलियां करनी पड़ रही हैं। आखिर लोकतंत्र की रक्षा की जिम्मेदारी तो देश की जनता ने उन्हें ही सौंपी है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या भाजपा सरकार के रहते लोकतंत्र सुरक्षित नहीं है?  क्या वर्तमान सत्ता इतनी कमजोर और बेबस हो चुकी है कि लोकतंत्र बचाने के नाम पर उसे सरकारी तंत्र के सहारे जुटाई गई भीड़ की जरूरत पड़ रही है? यदि ऐसी स्थिति है तो सरकार को अपनी विफलता स्वीकार करते हुए सत्ता से हट जाना चाहिए।  लेकिन भाजपा ऐसा नहीं कर सकती, क्योंकि लोकतंत्र को वास्तविक खतरा किसी और से नहीं, बल्कि भाजपा की सोच, उसकी विचारधारा और उसकी बुलडोजर नीति से है। उक्त बातें समाजवादी पार्टी बलिया के जिला उपाध्यक्ष/प्रवक्ता सुशील पाण्डेय कान्...

गड़वार स्थित वृद्धाश्रम में सेवा कार्यक्रम का हुआ आयोजन

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स्व. प्रभावती देवी की चौथी पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि एवं सेवा कार्यक्रम गड़वार (बलिया)। नगर पंचायत रेवती निवासी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्वर्गीय रामपूजन तिवारी की धर्मपत्नी स्वर्गीय प्रभावती देवी की चौथी पुण्यतिथि पर गड़वार स्थित वृद्धाश्रम में श्रद्धांजलि एवं सेवा कार्यक्रम आयोजित किया गया।  उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेश सरकार के मुख्यमंत्री माननीय आदित्य योगी जी द्वारा 19 अगस्त बलिया बलिदान दिवस के अवसर पर प्रभावती देवी को सम्मानित भी किया गया था।  इस अवसर पर उनके चित्र पर माल्यार्पण कर भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। साथ ही वृद्धाश्रम में निवास कर रहे बुजुर्गों के बीच कंबल एवं फल वितरित किए गए। इस अवसर पर कामेश्वर चैरिटेबल ट्रस्ट के सचिव संतोष तिवारी ने कहा कि प्रभावती देवी सदैव समाज के लोगों के सहयोग और जरूरतमंदों की मदद के लिए तत्पर रहती थीं। उनका जीवन सेवा, संवेदना और सामाजिक सरोकारों का प्रेरणास्रोत रहा है। हम लोगों ने उनके इसी सेवा भाव से प्रेरित होकर कामेश्वर चैरिटेबल ट्रस्ट के माध्यम से जरूरतमंदों, असहायों एवं बुजुर्गों की सेवा का संकल...