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30 जून, अंतरराष्ट्रीय क्षुद्र ग्रह दिवस पर विशेष-

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क्या पृथ्व्येतर प्राकृतिक आपदा बन सकते हैं 'क्षुद्र ग्रह'?  साइबेरिया (रूस) में 30 जून, 1908 को हुई विनाशकारी टुंगुस्का घटना की याद में संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा दिसम्बर, 2016 में एक प्रस्ताव पारित कर यह निर्णय लिया गया कि इस विनाशकारी 'टुंगुस्का घटना' की याद में 30 जून, 2016 से प्रति वर्ष पूरे विश्व में 'अंतरराष्ट्रीय क्षुद्र दिवस' मनाया जायेगा। इसका मुख्य उद्देश्य पृथ्वी के निकट आने वाले क्षुद्र ग्रहीय पिंडों पर नजर रखना, उनका अध्ययन करना एवं इनसे बचाव हेतु वैश्विक वैज्ञानिक सहयोग को बढ़ावा देना है तथा जन- जागरूकता फैलाना है।   उल्लेखनीय है कि 30 जून, 1908  को एक विशालकाय क्षुद्र ग्रह का अंतरिक्ष में ही विस्फोट हो गया था, जिसके प्रभाव से साइबेरिया क्षेत्र के हजारों वर्ग किमी क्षेत्र के जंगल जलकर नष्ट हो  गये थे। क्या होते हैं क्षुद्र ग्रह-  क्षुद्र ग्रहों की दुनिया अत्यन्त ही विचित्र एवं रहस्यमय है। इन्हें 'अवान्तर' ग्रह भी कहा जाता है। कारण कि ये क्षुद्र ग्रह सौर मण्डल के मध्य (विशेष तोर से मंगल एवं वृहस्पति ग्रह के मध्य) विचरण करते...

भारत और अमेरिका मे लोकतंत्र मे वोटरों की स्थिति और चुनाव

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आजकल समय-समय पर विभिन्न राजनीतिक दल ईवीएम और बीवीपैट के संदर्भ में जनता को गुमराह करते रहते हैं तथा अपनी हार का ठीकरा भी ईवीएम पर फोड़ देते हैं।जबकि वास्तविकता यह है कि भारत जैसी भाषा भाषाई विभिन्नता शिक्षा मे असमानता, विस्तृत बूथ, 96 करोड़ वोटरो से स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव कराना एक दुष्कर कार्य है। इसके पश्चात भी भारत का निर्वाचन आयोग कुशलता पूर्वक अपने दायित्वों का निर्वहन करता आ रहा है।  आज पश्चिम जहां लोकतंत्र की दुहाई दी जाती है वहां के चुनावी व्यस्था मे  बड़ी गड़बड़ी नजर आती है। उदाहरण के लिए अमेरिका जैसे देश में भी कई राज्यों में वोटर को वोटर आईडी के लिए 39 डॉलर खर्च करना पड़ता है। किन्ही राज्यों में उनके नागरिकों के वोटर आईडी न देने के लिए  विभिन्न शर्ते लगा रखें है। मुख्य रुप से वहां काले गोरो मे आज भी बड़ा भेद है और वहां के गोरे लोगों ने काले नागरिकों को प्रताड़ित करने के विभिन्न तरीके कानून बना रखे है। अमेरिका में चुनाव एक महीने तक होता रहता है तथा वहां चुनाव में मतदान के लिए वोटर आईडी कंपलसरी नहीं है। चुनाव के दिन वोटर को अपने घर से 100-100 किलोम...

नव संवत्सर पर विशेष-

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विभिन्नताओं से भरपूर है भारत में नव वर्ष मनाने की परम्परा: डाॅ० गणेश पाठक     भारत विविधताओं एवं विचित्रताओं का देश है, जहां विभिन्न जाति, वर्ग, धर्म, सम्प्रदाय के लोग देश के विभिन्न राज्यों में निवास करते हैं। अपने देश में भाषा, बोली, आचार, विचार, व्यवहार, रीति -रिवाज, प्रथाओं एवं उत्सवों में क्षेत्रीय आधार पर भिन्नता देखने को मिलती है। जलवायुविक भिन्नता के कारण कृषि फसलों, उनके उत्पादन के तरीकों, बोने की विधियों, निराई, गुणाई में भी भिन्नता मिलती है। रहन -सहन एवं पहनावा में भी भिन्नता देखने है को मिलती है।      भारत में कई प्रकार के कैलेण्डर समय - समय पर लागू होते रहें हैं, जिनका प्रचलन आज भी कायम है। इन विभिन्नताओं, विविधताओं  एवं विचित्रताओं के चलते ही भारत के विभिन्न राज्यों में नववर्ष मनाने के तरीके भी भिन्न- भिन्न मिलते हैं, जो भिन्न- भिन्न समयों में मनाए जाते हैं, जिनका विवरण निम्नवत है- कश्मीर का नववर्ष पर्व 'ना-वरेह' -   कश्मीर में नये वर्ष का प्रारम्भ चैत्र मास के प्रथम दिन से होता है, जिसे 'ना- वरेह' कहा जाता है। ' ना - व...