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25 जुलाई को आचार्य परशुराम चतुर्वेदी की 132वीं जयंती पर विशेष-

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आध्यात्मिक, मानवतावादी एवं कालजयी साहित्यकार रहे आचार्य परशुराम चतुर्वेदी                                 प्रस्तुति: डाॅ० गणेश कुमार पाठक     बलिया की माटी के लाल एवं महामना पंडित मदन मोहन मालवीय की बगिया के सपूत आचार्य परशुराम चतुर्वेदी एक ऐसे लोक, आध्यात्मिक एवं मानवतावादी साहित्यकार रहे, जिनकी रचनाएं कालजयी हैं। आचार्य चतुर्वेदी जी द्वारा दक्षिणामूर्ति के मौन, गुरू नानक के प्यार एवं संत तुलसी के समन्वय को अकादमिक शास्त्र का स्वरूप प्रदान किया गया। किंतु आचार्य जी के ऊपर सबसे गहरा प्रभाव कबीर एवं गुरू नानक का ही है, जिसकी स्पष्ट झलक इनकी रचनाओं से मिल जाता है। आचार्य परशुराम चतुर्वेदी जी के ऐतिहासिक कार्य-    अपनी रचनाओं के माध्यम से आचार्य परशुराम चतुर्वेदी जी  द्वारा तीन ऐतिहासिक कार्य किए गए - 1.संग्रह - आचार्य चतुर्वेदी जी ने संतों के बिखरे हुए संदेशों को बीज बैंक की तरह एक स्थान पर एकत्रित करने का कार्य किया, जिससे कि वो नष्ट न हों। 2.विश्लेषण -आचार्य चत...

महाराणा प्रताप जयंती 9 मई 2026 विशेष प्रस्तुति

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महाराणा प्रताप का संघर्ष आज भी है प्रासंगिक: प्रो. सन्तोष प्रसाद गुप्त महाराणा प्रताप भारतीय इतिहास के महानतम योद्धा जो वीरता, बलिदान तथा देशभक्ति के प्रतीक माने जाते है। महाराणा प्रताप (1540-1597) मेवाड़, राजस्थान के सिसोदिया राजवंश के 13वें राजपूत शासक थे। इनका जन्म राजस्थान के कुंभलगढ़ दुर्ग में 09 मई 1540 को हुआ था। इनके पिता का नाम महाराणा उदय सिंह द्वितीय तथा माता का नाम जयवंता बाई था। इनके बचपन का नाम भील समुदाय द्वारा कीका रखा गया था। महाराणा प्रताप का राजस्थान , उदयपुर (चावण्ड) जिनकी राजधानी थी। जहॉ 28 फरवरी 1572 को राज्याभिषेक किया गया था। इनकी जीवन संगनी अजबदे पंवार सहित 11 पत्नियां थी तथा अमर सिंह सहित कुल 17 पुत्र थे।महाराणा प्रताप अपने वीरता, साहस और बादशाह अकबर के सामने न झुकने के लिए अमर है। उन्होंने भीलों के साथ मिलकर मुगलों से संघर्ष किया। हल्दी घाटी तथा दिवेर जैसे युद्धों में भारतीय इतिहास में अपना नाम स्वर्ण अक्षरों में अंकित किया।  महाराणा प्रताप ने हल्दी घाटी का युद्ध 18 जून 1976 को बादशाह अकबर के मुगल सेना का नेतृत्व कर रहे सेनापति मानसिंह तथा म...