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जेएनसी लयू में हुआ केंद्रीय बजट 2026 का सजीव प्रसारण

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सभी विभागों के आचार्यगण एवं विद्यार्थियों ने देखा केंद्रीय बजट 2026 का सजीव प्रसारण तथा की परिचर्चा बलिया। जननायक चन्द्रशेखर विश्वविद्यालय में माननीय कुलपति प्रो संजीत कुमार गुप्ता के संरक्षण में जयप्रकाश नारायण सभागार, विश्वविद्यालय परिसर में एक फरवरी दिन रविवार को विश्वविद्यालय के सभी विभागों के आचार्य गण एवं विद्यार्थियों ने केंद्रीय बजट 2026 का सजीव प्रसारण देखा तथा परिचर्चा कीl  बजट में पांच यूनिवर्सिटी टाउनशिप विकसित करने का प्रस्ताव है इससे शैक्षणिक गुणवत्ता में सुधार होगा l फैकल्टी, शोधार्थी और छात्र को एक ही परिसर या आसपास रहने से अकादमिक संवाद, शोध- सहयोग और नवाचार में वृद्धि होगी, साथ ही अंतरराष्ट्रीय मानकों की शिक्षा व रिसर्च संस्कृति विकसित होगी l हॉस्टल, आवास, शॉपिंग कॉम्प्लेक्स, कन्वेंशन सेंटर, अस्पताल आदि से स्थायी आय स्रोत बनते हैं अतः विश्वाविद्यालयों की सरकारी अनुदान पर निर्भरता में कमी आएगी l बजट में हर जिले में कम से कम एक गर्ल्स हॉस्टल के निर्माण का प्रस्ताव है ताकि महिला शिक्षा की  भागीदारी में वृद्धि हो और उनकी सुरक्षा बढ़े। ...

बजट 2026: विकसित भारत @2047 हेतु संकल्पित

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प्रो. संजीत कुमार गुप्ता,  कुलपति जननायक चंद्रशेखर विश्वविद्यालय बलिया केंद्रीय बजट में तीन कर्तव्य पथों की चर्चा की गई है - विकास, समावेशन और सुधार ताकि समावेशी विकास का लक्ष्य पूरा हो सके तथा लोगों को संसाधनों तक पहुंच बन सके। विकसित भारत की संकल्पना के साथ भारत सरकार इस बजट के माध्यम से सुनिश्चित करना चाहती है कि विकास का लाभ किसान,अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित -जनजाति, महिलाओं तथा युवाओं तक पहुंचे।  बजट में वित्तीय वर्ष 2026 -27 के लिए राजकोषीय नीतियों को विकसित भारत @2047 के लक्ष्य के अनुकूल संतुलित किया गया है l इस बजट में रिकॉर्ड पूंजीगत व्यय लगभग 12.2 लाख करोड़ तक बढ़ाने का प्रस्ताव है जिससे इंफ्रास्ट्रक्चर, लॉजिस्टिक्स और आर्थिक वृद्धि को मजबूत कर निवेश के लिए अनुकूल माहौल बनाने का संपूर्ण प्रयास हो सके l मानसिक स्वास्थ्य को मजबूती प्रदान करने के लिए NIMHANS- 2 का बजट प्रस्ताव है।  बजट में चार राज्यों (उड़ीसा, केरल, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश ) के लिए विशेष दुर्लभ पृथ्वी गलियारे स्थापित करने का प्रस्ताव है l बजट 2026 -27 में प्रस्ताव है कि पूर्वोत्तर राज्...

जनता को भाषण नहीं बल्कि राशन और शासन में चाहिए अपनी हिस्सेदारी: रामगोविन्द

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बजट आंकड़ों का मायाजाल या उम्मीदों का झुनझुना बलिया। ह र साल जब वित्त मंत्री लाल ब्रीफकेस (या अब डिजिटल टैबलेट) लेकर संसद की सीढ़ियां चढ़ती हैं, तो देश के करोड़ों लोगों की निगाहें इस उम्मीद में टिकी होती हैं कि शायद इस बार उनकी थाली में रोटी और जेब में कुछ बचत के अवसर बढ़ेंगे। लेकिन संसद के भीतर मेजों की गड़गड़ाहट और बाहर आम आदमी की खामोशी के बीच का अंतर इस बार भी कम होता नहीं दिख रहा। मेजों की गड़गड़ाहट और कागजों का पुलिंदा संसद के भीतर जब वित्त मंत्री बजट भाषण की एक-एक पंक्ति पढ़ती हैं, तो सत्ता पक्ष के सांसद उसे ऐतिहासिक बताते हुए मेजें थपथपाते हैं। लेकिन विडंबना यह है कि जब वह भाषण समाप्त होता है और संसद की चौखट से बाहर आता है, तो जनता के हाथ में केवल 'बजट की प्रतियां' ही होती हैं—अधिकारों और राहत का वह वास्तविक हिस्सा गायब रहता है जिसकी उसे दरकार थी।                            रामगोविन्द चौधरी किसान, मजदूर और नौजवान: हाशिये पर खड़े लोग इस बजट को यदि बारीकी से देखा जाए, तो समाज के उन स्तंभो...