श्रेयस_की_साहित्यशाला ~श्रेयस साहित्य शोध केंद्र~
डॉ० गणेश कुमार पाठक के साहित्यिक आलेख सामयिक विषयों एवं प्रकृति से जोड़कर साहित्य को देते है नव रूप: राजेश सिंह 'श्रेयस' आसमान में उमड़ते घूमड़ते हुए बादलों को देखकर विभिन्न जन के मन में अलग-अलग विचार अलग अलग रूप में आते हैं। जहाँ एक कवि के मन के भाव इन बादलों को देखकर प्रकृति के श्रृंगार गीत का सृजन करतें हैं, तो वहीं शास्त्रीय संगीत गायक इन बादलों में मौसमी राग ढूंढता है। जहाँ प्रेमी -प्रेमिका इन बादलों में प्यार- विरह ढूंढते हैं, तो आध्यात्मिक वैदिक विद्वान् इंद्र के उदार एवं कुपित होने की बात कहते हैं,वही एक भूगोलवेत्ता बादलों के चक्रमण और भ्रमण को वैज्ञानिक दृष्टि से देख कर बता देता है कि आज इस मानसून की गति क्या रहेगी और ये कब बरस पड़ेंगे। आज मेरी वार्ता जनपद बलिया में जन्मे, बलिया में रहकर बलिया की छितिज में उमड़ते घूमडते बादलों के मन मिजाज को पढ़ने और पहचानने वाले हिंदी साहित्यकार एवं प्रख्यात भूगोलविद डॉ. गणेश कुमार पाठक जी से हुई। 1857 की क्रांतिवीर पंडित मंगल पाण्डेय जी के जन्मस्थान नगवा में ...