22 मई को अन्तर्राष्ट्रीय जैव विविधता दिवस पर विशेष-
मानव जगत के लिए भी खतरे भी घंटी है जैव विविधता का असंतुलन: डाॅ० गणेश पाठक जैव विविधता से तात्पर्य धरती पर पाए जाने वाले सभी जीवित प्राणियों एवं उनके पारिस्थितिक तंत्रों के मध्य उपलब्ध विविधता से है। अर्थात् सभी प्रकार के पेड़ - पौधों, जीव -जंतुओं एवं सूक्ष्म जीवों पारिस्थितिक तंत्र के मध्य प्राप्त विविधता को 'जैविक विविधता' कहा जाता है, जिसके अंतर्गत खासतौर से आनुवंशिक विविधता, प्रजाति विविधता एवं पारिस्थितिकी तंत्र की विविधता को सम्मिलित किया जाता है। जैविक विविधता का संतुलन जीवन की रक्षा हेतु, जलवायु नियंत्रण हेतु एवं आर्थिक तथा औषधीय लाभ सहित व्यवसायों के संतुलित संचालन तथा कृषि उत्पादन हेतु अति आवश्यक होता है। किंतु विकास हेतु विभिन्न परियोजनाओं के निर्माण, औद्योगीकरण एवं नगरीयकरण हेतु वन विनाश के तहत वन वृक्षों एवं अन्य प्राकृतिक संसाधनों का इस कदर दोहन एवं शोषण किया गया एवं किया जा रहा है कि न केवल वन वृक्ष समाप्त हो रहे हैं, बल्कि जीवन - जंतुओं के प्राकृतिक आवास भी समाप्त होते जा रहे हैं, जिससे जीवन - जंतु भी समाप्त होते जा रह...