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भारतीय संस्कृति एवं पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से महत्वपूर्ण है मिट्टी का दीपक जलाना: डाॅ. गणेश पाठक

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न केवल दीपावली में, बल्कि प्रत्येक दिन घर में मिट्टी का  दीपक(दीया) तथा उसमें घी या सरसो का तेल या तील का तेल डालकर कपास की रूई की बाती बनाकर दीपक में रखकर दीपक जलाना न केवल हमारे पूजा एवं श्रद्धा का प्रतीक है, बल्कि हमारी सनातन संस्कृति की अति प्राचीन सांस्कृतिक परम्परा रही है और किसी खास खुशी या पर्व त्यौहार के अवसर पर दीपक जलाना हमारी भारतीयता की अटूट पहचान है।   सनातन संस्कृति में या यों कहें कि हमारे भारतीय परम्परा में दीप को प्रज्वलित करना अति शुभ, सकरात्मक एवं प्रकाश उत्पन्न कर ज्ञान की अभिवृद्धि करने वाला तथा नकारात्मता को समाप्त कर सकारात्मकता का समावेश करते हुए ऊर्जा प्रदान करने वाला माना गया है।    खासतौर से दीपावली के दिन सामूहिक रूप से सभी लोगों द्वारा सर्वत्र दीप प्रज्वलित करना अंधकार पर प्रकाश के विजय का प्रतीक माना गया है। बुराई पर अच्छाई का प्रतीक माना गया है। बुरी शक्तियों का नाश कर सकारात्मक सोच उत्पन्न करने वाला माना गया है। यही नहीं जो नकारात्क शक्तियों  हैं एवं अज्ञानता को समाप्त कर जीवन एवं पूरे वातावरण में सकारात्मकता के ...

चन्द्रशेखर के व्यक्तित्व को समझने की कुंजी है उनकी जेल डायरी: प्रो. जैनेन्द्र पाण्डेय

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चन्द्रशेखर जन्मशताब्दी समारोह अंतर्गत जननायक चन्द्रशेखर विवि में विशेष व्याख्यान का आयोजन  बलिया। चन्द्रशेखर जन्मशताब्दी समारोह के अंतर्गत जननायक चन्द्रशेखर विश्वविद्यालय में बृहस्पतिवार को विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। चन्द्रशेखर की जेल डायरी के विविध परिप्रेक्ष्य विषय पर मुख्य वक्ता प्रो. जैनेन्द्र कुमार पाण्डेय, टी.डी. कॉलेज ने व्याख्यान दिया।   कहा कि चन्द्रशेखर की जेल डायरी चन्द्रशेखर के व्यक्तित्व को समझने के लिए कुंजी का काम करती है। आपातकाल के दौरान कैद-ए-तन्हाई  में रहते हुए चन्द्रशेखर ने जो जेल डायरी रची, उसमें आपातकाल के राजनीतिक परिदृश्य को समझने के सूत्र प्राप्त होते हैं। चन्द्रशेखर की इस डायरी में साधारण गँवई मानुष की चिंता से लेकर अंतरराष्ट्रीय राजनय तक की खबर और विश्लेषण मौजूद है। चन्द्रशेखर के विस्तृत अध्ययन का प्रमाण इस डायरी में मिलता है।   उन्होंने हिन्दी साहित्य से लेकर विश्व साहित्य की महत्त्वपूर्ण कृतियों को पढ़ा और विश्लेषित किया है। चन्द्रशेखर की संवेदनशीलता का परिचय इस डायरी से मिलता है, इसमें पेड़- पौधों, चि...

सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा में सार्थक सहयोग फाउंडेशन द्वारा चला निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर

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श्रद्धालुओं एवं क्षेत्रवासियों को निःशुल्क स्वास्थ्य परामर्श एवं चिकित्सा सेवाएं कराई गईं उपलब्ध बलिया। सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक महोत्सव 2026 के अंतर्गत ग्राम छोड़हर, गजियापुर, बलिया में अंतरराष्ट्रीय कथा वाचिका पूज्य जया किशोरी जी के श्रीमुख से आयोजित सप्त दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के पावन अवसर पर सार्थक सहयोग फाउंडेशन द्वारा आयोजित निःशुल्क सार्थक स्वास्थ्य सहयोग शिविर सफलता पूर्वक संपन्न हुआ। 28 अक्टूबर से 03 नवंबर तक चले इस आयोजन में श्रद्धालुओं एवं क्षेत्रवासियों को निःशुल्क स्वास्थ्य परामर्श एवं चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराई गईं। शिविर का उद्देश्य धार्मिक आयोजन में सम्मिलित होने वाले श्रद्धालुओं के साथ-साथ आसपास के क्षेत्र के लोगों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना था। इस आयोजन के मुख्य संरक्षक उत्तर प्रदेश सरकार के माननीय परिवहन मंत्री श्री दयाशंकर सिंह जी रहे।  कार्यक्रम की आयोजक संस्था जीवन प्रदाता फाउंडेशन रही, जबकि स्वास्थ्य शिविर का संचालन सार्थक सहयोग फाउंडेशन द्वारा किया गया।  शिविर में चिकित्सकीय सेवाएं प्रदान करने वाले प्रमुख चिकित्सकों में ...

धनतेरस पर विशेष-बर्तनों की खरीदारी या सेहत की तैयारी:

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 क्या है हमारी धनतेरस का असली विज्ञान?                                    - ईशान पाठक  (कक्षा 9)    जब भी धनतेरस आती है, हमारे घरों में एक अजीब सा उत्साह आ जात है। जैसे - बाजार जाओ, कुछ भी खरीदो, बस कोई धातु (मेटल) घर लेकर आना है। कोई चम्मच ला रहा है, तो कोई सोने का सिक्का। हम सब यही मान लेते हैं कि यह सिर्फ लक्ष्मी जी को खुश करने और तिजोरी भरने का एक तरीका है। लेकिन अगर आप इस पूरी परंपरा को आधुनिक विज्ञान और क्वांटम फिजिक्स के नजरिए से देखें, तो हमारे पूर्वजों ने इस दिन की शुरुआत सिर्फ धर्म के भरोसे नहीं, बल्कि शुद्ध विज्ञान के आधार पर की थी।   पहले थोड़ी पुरानी कहानी समझते हैं, फिर सीधे फिजिक्स परआते हैं। धनतेरस का असली नाम 'धन्वंतरि त्रयोदशी' है। माना जाता है कि इस दिन समुद्र मंथन से भगवान धन्वंतरि निकले थे, जिन्हें आयुर्वेद का पिता यानी दुनिया का पहला डॉक्टर कहा जाता है। उनके हाथ में एक कलश था, जिसमें 'अमृत' भरा था। अब यहाँ एक बहुत गहरी सोचने वाली बात है। ...

सर सीवी रमन के जन्मदिवस पर वैज्ञानिक जागरूकता कार्यक्रम हुआ आयोजित

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जिला विज्ञान क्लब बलिया द्वारा कंपोजिट विद्यालय मिठवार में हुआ कार्यक्रम बलिया। विज्ञान और प्रौद्योगिकी परिषद उत्तर प्रदेश के तत्वावधान में जिलाधिकारी महोदय के निर्देशन में जिला विज्ञान क्लब बलिया द्वारा कंपोजिट विद्यालय मिठवार, बलिया पर सर सीवी रमन जन्मदिवस पर वैज्ञानिक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पूर्व सीएमओ डॉ पी के सिंह द्वारा दीप प्रज्वलन कर कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ किया गया।  इस अवसर पर विद्यालय के बच्चों द्वारा सरस्वती वंदना और विज्ञान गीत के माध्यम से अतिथियों का स्वागत किया।  कार्यक्रम के दौरान विभिन्न विद्यालयों से आए बच्चों द्वारा पोस्टर प्रदर्शनी लगाई गई, जिसका मूल्यांकन निर्णायक मंडल के सदस्यों द्वारा किया गया तथा विजेता बच्चों को प्रमाण पत्र और पुरस्कार से मुख्य अतिथि के हाथों सम्मानित किया गया।   जिला विज्ञान क्लब के समन्वयक अतुल कुमार ने कार्यक्रम की रूपरेखा तथा उसके उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर पूर्व प्राचार्य डॉ प्रतिभा त्रिपाठी, एसआरजी और विशेषज्ञ आशुतोष सिंह तोमर द्...

स्टार्टअप संवाद कार्यक्रम में बलिया के दो स्टार्टअप के नवाचारों ने खींचा ध्यान

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प्रयागराज में पूर्वांचल स्टार्टअप संवाद- 2026 में जेएनसीयू की रही महत्वपूर्ण सहभागिता बलिया। उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं राज्य विश्वविद्यालयों की कुलाधिपति श्रीमती आनंदीबेन पटेल की अध्यक्षता में बुधवार को प्रो. राजेन्द्र सिंह (रज्जू भय्या) विश्वविद्यालय, प्रयागराज एवं डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय, लखनऊ के संयुक्त तत्वावधान में पूर्वांचल स्टार्टअप संवाद-2026 का आयोजन किया गया।  कार्यक्रम में स्टार्टअप संस्कृति को बढ़ावा देने, नवाचार एवं उद्यमिता को प्रोत्साहित करने, युवाओं को स्वरोजगार के लिए प्रेरित करने तथा शैक्षणिक संस्थानों में उद्यमशीलता का वातावरण विकसित करने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर व्यापक विचार-विमर्श हुआ।  इस अवसर पर जननायक चंद्रशेखर विश्वविद्यालय , बलिया की ओर से एक आकर्षक स्टॉल स्थापित किया गया, जिसमें विश्वविद्यालय से जुड़े स्टार्टअप एवं नवाचारों को प्रदर्शित किया गया। राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने विश्वविद्यालय के स्टॉल का रुचिपूर्वक अवलोकन किया। बलिया जनपद के दो नवाचारी स्टार्टअप विशेष आकर्षण का केंद्र रहे। इनम...

कायस्थ महासभा बरेली के महानगर अध्यक्ष बने मुकेश सक्सेना

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महानगर अध्यक्ष बनने पर शुभचिंतको ने दी बधाई बरेली। अखिल भारतीय कायस्थ महासभा के प्रदेश महासचिव श्री श्याम चंद्र श्रीवास्तव जी ने जिलाध्यक्ष अश्विनी कमठान जी की संस्तुति पर बरेली के कर्मठ और समर्पित समाजसेवी श्री मुकेश सक्सेना को बरेली का महानगर अध्यक्ष मनोनीत किया है। श्री श्रीवास्तव आज एक दिन के दौरे पर बरेली आए थे उन्होंने यहां जिला कार्यकारिणी की मीटिंग ली।  उन्होंने कायस्थ समाज से आगामी चुनाव में अपनी भूमिका सुनिश्चित करने की अपील की। श्री मुकेश के महानगर अध्यक्ष बनने पर प्रदेश के वन राज्य मंत्री डॉ अरुण कुमार, संजीव कुमार सक्सेना, वेद प्रकाश सक्सेना कातिब, अश्विनी कमठान, डॉ विकास वर्मा, डॉ सुबोध अस्थाना, धर्मेंद्र सक्सेना, अनूप सक्सेना, रवि सक्सेना, आशीष सिन्हा, शैलेन्द्र सक्सेना शैलू, विकल्प सक्सेना, आशीष सक्सेना, रश्मि प्रधान, बबीत रेक्रीवाल, विकास सक्सेना नीटू , आदित्य सक्सेना हनी आदि ने शुभकामनाएं दीं।

अमावस्या का अंधकार, वैकुंठ का रहस्य और विज्ञान का सच :ईशान पाठक

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वैकुंठ का रहस्य और शत्रुता में छिपी परम भक्ति- जब हम दीवाली की रात को इस घने अंधेरे (अमावस्या) के बीच अपने घरों की चौखट पर छोटे-छोटे दीये जलाते हैं, तो दिमाग में बस एक ही बात आती है कि हम एक दुश्मन की हार और भगवान राम के अयोध्या लौटने की खुशी मना रहे हैं। पर क्या रावण सच में सिर्फ एक  दुश्मन था? अगर हम अपनी सनातन परंपरा को थोड़ा गहराई से देखें, तो पता चलेगा कि इस पूरी कहानी की स्क्रिप्ट तो बहुत पहले ही वैकुंठ धाम में लिखी जा चुकी थी।   जिसे हम लंका का राजा रावण कहते हैं, वह असल में भगवान विष्णु के सबसे खास और वफादार द्वारपाल 'जय' थे, और उनके भाई कुंभकर्ण दूसरे द्वारपाल 'विजय' के अवतार थे। किस्सा कुछ ऐसा है कि एक बार ब्रह्मा जी के चार मानस पुत्र—सनत्कुमार ऋषियों का वैकुंठ आना हुआ। ये ऋषि बहुत ज्ञानी थे और उनकी उम्र करोड़ों साल थी, लेकिन अपनी शक्तियों की वजह से वे हमेशा पाँच साल के छोटे बच्चों जैसे ही दिखते थे। जय और विजय उन्हें पहचान नहीं पाए और बच्चा समझकर अंदर जाने से रोक दिया। ऋषियों को यह बात बुरी लगी, उन्होंने कहा कि नारायण के दरबार में तो सब बराबर हैं...

जनता के वास्तविक मुद्दों पर चर्चा करने से बच रही है भाजपा सरकार: सुशील पाण्डेय कान्हजी

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कहा: लोकतंत्र बचाने के लिए भाजपा को करनी पड़ रही हैं रैलियां, यह सरकार की विफलता का प्रमाण बलिया। बहुत आश्चर्य की बात है कि देश की सत्ता में बैठी भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष, केंद्रीय मंत्रियों यहां तक कि गृह मंत्री जिसके जिम्मे आंतरिक सुरक्षा की सम्पूर्ण जिम्मेदारी है साथ में अन्य नेताओं को  जगह-जगह लोकतंत्र बचाने के लिए बड़ी-बड़ी रैलियां करनी पड़ रही हैं। आखिर लोकतंत्र की रक्षा की जिम्मेदारी तो देश की जनता ने उन्हें ही सौंपी है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या भाजपा सरकार के रहते लोकतंत्र सुरक्षित नहीं है?  क्या वर्तमान सत्ता इतनी कमजोर और बेबस हो चुकी है कि लोकतंत्र बचाने के नाम पर उसे सरकारी तंत्र के सहारे जुटाई गई भीड़ की जरूरत पड़ रही है? यदि ऐसी स्थिति है तो सरकार को अपनी विफलता स्वीकार करते हुए सत्ता से हट जाना चाहिए।  लेकिन भाजपा ऐसा नहीं कर सकती, क्योंकि लोकतंत्र को वास्तविक खतरा किसी और से नहीं, बल्कि भाजपा की सोच, उसकी विचारधारा और उसकी बुलडोजर नीति से है। उक्त बातें समाजवादी पार्टी बलिया के जिला उपाध्यक्ष/प्रवक्ता सुशील पाण्डेय कान्...

गड़वार स्थित वृद्धाश्रम में सेवा कार्यक्रम का हुआ आयोजन

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स्व. प्रभावती देवी की चौथी पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि एवं सेवा कार्यक्रम गड़वार (बलिया)। नगर पंचायत रेवती निवासी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्वर्गीय रामपूजन तिवारी की धर्मपत्नी स्वर्गीय प्रभावती देवी की चौथी पुण्यतिथि पर गड़वार स्थित वृद्धाश्रम में श्रद्धांजलि एवं सेवा कार्यक्रम आयोजित किया गया।  उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेश सरकार के मुख्यमंत्री माननीय आदित्य योगी जी द्वारा 19 अगस्त बलिया बलिदान दिवस के अवसर पर प्रभावती देवी को सम्मानित भी किया गया था।  इस अवसर पर उनके चित्र पर माल्यार्पण कर भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। साथ ही वृद्धाश्रम में निवास कर रहे बुजुर्गों के बीच कंबल एवं फल वितरित किए गए। इस अवसर पर कामेश्वर चैरिटेबल ट्रस्ट के सचिव संतोष तिवारी ने कहा कि प्रभावती देवी सदैव समाज के लोगों के सहयोग और जरूरतमंदों की मदद के लिए तत्पर रहती थीं। उनका जीवन सेवा, संवेदना और सामाजिक सरोकारों का प्रेरणास्रोत रहा है। हम लोगों ने उनके इसी सेवा भाव से प्रेरित होकर कामेश्वर चैरिटेबल ट्रस्ट के माध्यम से जरूरतमंदों, असहायों एवं बुजुर्गों की सेवा का संकल...
बलिया जनपद स्थापना दिवस पर विशेष भृगु-दर्दर क्षेत्र, बालमीकिया और बलियाग के नाम से जानी जाती रही है बलिया अध्यात्म, अवदान, बलिदान की पावन धरा जो पौराणिक काल मे विमुक्त तीर्थ रही, भृगु-दर्दर क्षेत्र, बालमीकिया और बलियाग के नाम से बलिया जानी जाती रही है। इतिहासकार डाॅ.शिवकुमार सिंह कौशिकेय ने बताया कि इसे बलिया नाम से पहली बार पहचान सन् 1302 ई. मे बख्तियार खिलजी ने राजस्व वसूली की ईकाई ' बलिया ' महाल बनाकर दी।   सन् 1493 ई. मे दिल्ली सल्तनत का बादशाह सिकन्दर लोदी बलिया पहुँचा। जिसने बेला , चमेली ,गुलाब की सुगंध नगरी जिले की सिकन्दरपुर तहसील मुख्यालय पर एक किला बनाने की असफल कोशिश की। 05 मई 1529 ई. को मुगल सल्तनत की नींव रखने वाले बाबर और महमूद लोदी के बीच मध्ययुगीन इतिहास की पहली जल और थल की जंग जिले के खरीद गाँव मे घाघरा नदी तट पर हुई थी।  डाॅ.कौशिकेय ने बताया कि 29 दिसम्बर 1764 को यह भू-भाग ब्रिटिश ईस्ट इण्डिया कम्पनी के अधीन हुआ।1798 ई. मे कम्पनी ने जब गाजीपुर को जिला बनाए तब बलिया को इसे बलिया तहसील बनाए। एक नवंबर 1879 ई. को कम्पनी सरकार ने ही गाजीपुर और आजमगढ़ के भू-भाग ...

पर्यावरण मिनी मैराथन- 2026 दौड़ एक नवंबर को

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समीक्षा बैठक में पर्यावरण मिनी मैराथन के सफल आयोजन हेतु सहयोगियों को सौंपी गई जिम्मेदारी  बलिया। जनपद की समाजसेवी संस्था छात्र सहायता समिति, बलिया की एक महत्वपूर्ण बैठक 30 अक्टूबर दिन शुक्रवार की सायं संपन्न हुई जिसमें पर्यावरण मिनी मैराथन दौड़ - 2026 के आयोजन के तैयारियों की समीक्षा की गई। साथ ही  समिति के सदस्यों, पदाधिकारियों एवं सहयोगियों को कार्यक्रम को सफल एवं भव्य रूप से संपन्न कराने हेतु जिम्मेदारी सौंपी गई।  बैठक में कार्यक्रम की तैयारियों, प्रतिभागियों के पंजीकरण, आयोजन की रूपरेखा, अतिथियों के स्वागत, व्यवस्थाओं एवं विभिन्न दायित्वों को लेकर विस्तारपूर्वक चर्चा की गई। उपस्थित सभी पदाधिकारियों एवं सदस्यों ने कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए अपने-अपने सुझाव एवं सहयोग का आश्वासन दिया।  सभी ने एकजुट होकर पर्यावरण संरक्षण के इस जनजागरूकता अभियान को जन-जन तक पहुंचाने तथा अधिक से अधिक लोगों की सहभागिता सुनिश्चित करने का संकल्प लिया।   कार्यक्रम प्रमुख/ अध्यक्ष , छात्र सहायता समिति बलिया सर्वदमन कुमार जायसवाल ने बताया कि पर्यावरण मिनी मैराथन- 202...