बलिया जनपद स्थापना दिवस पर विशेष
भृगु-दर्दर क्षेत्र, बालमीकिया और बलियाग के नाम से जानी जाती रही है बलिया
अध्यात्म, अवदान, बलिदान की पावन धरा जो पौराणिक काल मे विमुक्त तीर्थ रही, भृगु-दर्दर क्षेत्र, बालमीकिया और बलियाग के नाम से बलिया जानी जाती रही है। इतिहासकार डाॅ.शिवकुमार सिंह कौशिकेय ने बताया कि इसे बलिया नाम से पहली बार पहचान सन् 1302 ई. मे बख्तियार खिलजी ने राजस्व वसूली की ईकाई ' बलिया' महाल बनाकर दी।
सन् 1493 ई. मे दिल्ली सल्तनत का बादशाह सिकन्दर लोदी बलिया पहुँचा। जिसने बेला , चमेली ,गुलाब की सुगंध नगरी जिले की सिकन्दरपुर तहसील मुख्यालय पर एक किला बनाने की असफल कोशिश की। 05 मई 1529 ई. को मुगल सल्तनत की नींव रखने वाले बाबर और महमूद लोदी के बीच मध्ययुगीन इतिहास की पहली जल और थल की जंग जिले के खरीद गाँव मे घाघरा नदी तट पर हुई थी।
डाॅ.कौशिकेय ने बताया कि 29 दिसम्बर 1764 को यह भू-भाग ब्रिटिश ईस्ट इण्डिया कम्पनी के अधीन हुआ।1798 ई. मे कम्पनी ने जब गाजीपुर को जिला बनाए तब बलिया को इसे बलिया तहसील बनाए। एक नवंबर 1879 ई. को कम्पनी सरकार ने ही गाजीपुर और आजमगढ़ के भू-भाग काटकर तथा बिहार के शाहाबाद के बिहिया परगना के कुछ भू-भाग लेकर बलिया को जिला बनाया।
जिले के प्रथम कलेक्टर मि.चार्ल्स विलियम विल्स ने दो नवम्बर 1879 को चार्ज ग्रहण किए 09 जनवरी 1880 ई. तक रहे । इस जिले के दूसरे कलेक्टर बने मि.डेविड थॉमसन राबर्टस् 25 अप्रैल 1880 को चार्ज ग्रहण किए इन्होंने ही इस जिले को सजाने - संवारने की नींव रखा।
क्या खोया - क्या पाया ?
डाॅ.कौशिकेय ने कहा कि उस समय जिले मे 671 चीनी के कारखाने लगे। तुर्तीपार के सफेद धातु के बर्तन, सिकन्दरपुर के इत्र, गुलाब जल, हनुमानगंज के लोहे के औजार, बलिया शहर मे सोने-चाँदी के आभूषण उद्योग, टीका दवरी के मिट्टी के बर्तन और मूंज की रस्सी, सिकहुति (टोकरी ) बनाने के कुटीर उद्योग की पूरे देश मे आपूर्ति होती थी। 146 वर्ष की यात्रा मे इस जिले ने प्रशासनिक क्षेत्र मे 3 तहसीलों बलिया सदर, रसड़ा, बाँसडीह का विस्तार कर 6 तहसीलें बनाई बैरिया, सिकन्दरपुर, बेल्थरारोड नयी तहसील बनीं। 17 विकास खण्ड हुए। बैरिया, रतसड़ और नगरा तीन नयी नगर पंचायत बनी। जिले मे जननायक चन्द्रशेखर विश्वविद्यालय बसंतपुर बना। सुरहाताल वैश्विक स्तर पर रामसर बना। कृषि विज्ञान केन्द्र सोहांव बना। चन्द्रशेखर स्पोर्ट्स काॅलेज पूर , अन्तरप्रान्तीय बस टर्मिनल चाँददियर बैरिया और बस स्टेशन उजियार घाट का कार्य प्रगति पर है।
इस जिले को मिशन- 2047 के तहत विकसित बनाने के लक्ष्य को लेकर जिन लक्ष्यों पर हमें आगे बढ़ना है,उसमे बलिया ऐतिहासिक सांस्कृतिक प्राधिकरण की स्थापना। गंगा- घाघरा नदियों के कटान का स्थायी समाधान करना। जिले के पुरातात्विक स्थलों लखनेश्वरडीह, खैराडीह, पक्काकोट, देवकली के पुरावशेषों को संरक्षित करने शोध कार्य कर इन्हें पर्यटन स्थल के रुप मे विकसित करना। कृषि आधारित उद्योग, प्रसंस्करण और निर्यात का प्रबंध करना। ददरी मेले को पुनः राष्ट्रीय स्तर के धार्मिक, व्यवसायिक मेला के रुप मे विकसित करना।
जननायक चन्द्रशेखर विश्वविद्यालय मे जिले के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक, पुरातात्विक शोध के साथ तकनीक और कौशल विकास की शिक्षा, प्रशिक्षण संस्थान, संग्रहालय स्थापित करने के साथ जिले के कुटीर उद्योगों के विकास का प्रयास शामिल है।
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