नवरात्रि, दीपावली और छठ महापर्व भारतीय लोक संस्कृति के जीवंत प्रतीक
पर्वों के सामाजिक महत्व पर संगोष्ठी में हुई चर्चा
बलिया। जननायक चंद्रशेखर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर नरेन्द्र कुमार शुक्ल के संरक्षण और कुलसचिव एस. एल. पाल के मार्गदर्शन में मध्यकालीन एवं आधुनिक इतिहास विभाग की ओर से ‘बसंत संगम’ के अंतर्गत ‘लोक व्यवहार में नवरात्रि, दीपावली एवं छठ महापर्व का महत्व’ विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी में भारतीय लोक परंपराओं, सांस्कृतिक विरासत, सामाजिक समरसता और जनजीवन में इन पर्वों की भूमिका पर विचार-विमर्श किया गया।
डॉ शैलेन्द्र कुमार सिंह ने कहा कि नवरात्रि, दीपावली और छठ महापर्व केवल धार्मिक आयोजन नहीं हैं, बल्कि भारतीय समाज की सांस्कृतिक चेतना, सामूहिकता और लोक आस्था के महत्वपूर्ण आधार हैं। इन पर्वों के माध्यम से समाज में पारिवारिक एकता, पारस्परिक सहयोग, अनुशासन, सेवा, त्याग और प्रकृति के प्रति सम्मान जैसे मूल्यों को बढ़ावा मिलता है।
संगोष्ठी में नवरात्रि के संदर्भ में शक्ति उपासना, नारी सम्मान और बुराई पर अच्छाई की विजय के संदेश पर चर्चा की गई। दीपावली को प्रकाश, उल्लास, सामाजिक मेल-मिलाप और सकारात्मकता का प्रतीक बताया गया। वहीं, छठ महापर्व की चर्चा करते हुए वक्ताओं ने सूर्योपासना,जल एवं प्रकृति के प्रति कृतज्ञता, लोक अनुशासन तथा सामूहिक सहभागिता की परंपरा को रेखांकित किया।
विद्यार्थियों ने महापर्व से संबंधित लोक परम्परा में प्रचलित गीत गाये। विद्यार्थियों ने कहा कि लोक पर्व पीढ़ियों के बीच सांस्कृतिक मूल्यों के हस्तांतरण का सशक्त माध्यम हैं।बदलते सामाजिक परिवेश में इन पर्वों की मूल भावना को समझना और नई पीढ़ी तक पहुंचाना आवश्यक है। साथ ही, पर्वों के आयोजन में स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक सद्भाव और लोक परंपराओं की मर्यादा का ध्यान रखना भी जरूरी है।
कार्यक्रम में इतिहास के अध्ययन के साथ लोक संस्कृति, सामाजिक परंपराओं और जनजीवन के अंतर्संबंधों को समझने पर बल दिया गया। डॉ. विनीत कुमार सिंह ने कहा कि भारतीय लोक पर्व देश की सांस्कृतिक विविधता में एकता का संदेश देते हैं और समाज को अपनी जड़ों से जोड़ने का कार्य करते हैं।
इस कार्यक्रम का संचालन सुधांशु पाण्डेय और धन्यवाद अंजलि वर्मा ने किया। इस कार्यक्रम में इतिहास विभाग के छात्र और छात्रा उपस्थित रहे।
रिपोर्ट: विनय कुमार
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