मदद संस्थान ने तीन परिवारों को दी 15 हजार रुपये की आर्थिक सहायता

पीड़ित परिवारों के घर पहुंची संस्थान की टीम, इलाज के लिए सौंपे पांच-पांच हजार रुपये के चेक
दुबहर (बलिया)। समाज के असहाय, लाचार, पीड़ित एवं बेहद जरूरतमंद लोगों की सेवा के संकल्प को साकार करते हुए मदद संस्थान ने मानवता और सामाजिक सरोकार की एक सराहनीय मिसाल पेश की है। आर्थिक तंगी और गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे तीन जरूरतमंद परिवारों के घर पहुंचकर संस्थान की टीम ने उन्हें उपचार के लिए पांच-पांच हजार रुपये के चेक प्रदान किए। इस प्रकार तीनों परिवारों को कुल 15 हजार रुपये की आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई गई।

मदद संस्थान की इस पहल का उद्देश्य केवल आर्थिक सहयोग प्रदान करना ही नहीं, बल्कि कठिन परिस्थितियों से गुजर रहे परिवारों को यह एहसास कराना भी है कि वे इस संघर्ष में अकेले नहीं हैं। संस्थान के सदस्यों ने पीड़ित परिवारों से मुलाकात कर उनकी समस्याओं को जाना और भविष्य में भी यथासंभव सहयोग उपलब्ध कराने का भरोसा दिलाया।

तीन परिवारों की पीड़ा ने झकझोरा, मदद के लिए आगे आई संस्थान की टीम
संस्थान की ओर से जिन तीन परिवारों को आर्थिक सहायता प्रदान की गई, उनमें पहला मामला आकाश गोंड का है, जो सपहा जनाड़ी के निवासी हैं। पैर फ्रैक्चर होने के कारण उन्हें काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। प्लास्टर कटवाने के लिए आवश्यक धनराशि की व्यवस्था करना उनके परिवार के लिए बेहद कठिन हो गया है। आर्थिक अभाव के कारण उपचार में आ रही परेशानियों को देखते हुए मदद संस्थान ने उनके परिवार को पांच हजार रुपये का चेक उपलब्ध कराया, ताकि उपचार संबंधी जरूरतों को पूरा करने में कुछ राहत मिल सके।

दूसरा मामला नगवां निवासी कंचन देवी का है, जिनके पति की सड़क दुर्घटना में मृत्यु हो चुकी है। पति के निधन के बाद चार बच्चों की जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई है। वर्तमान में वह अपने मायके नगवां में रहकर तमाम कठिनाइयों के बीच अपने बच्चों का पालन-पोषण करने के लिए संघर्ष कर रही हैं। परिवार के सामने उत्पन्न कठिन परिस्थितियों को देखते हुए मदद संस्थान ने कंचन देवी को पांच हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की। संस्थान की इस पहल से संकट के समय संघर्ष कर रहे परिवार को संबल देने का प्रयास किया गया है।

तीसरा मामला अखार निवासी प्रेमचंद बिंद का है। बताया गया कि उनके पूरे शरीर में संक्रमण के कारण मवाद बनने जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्या उत्पन्न हो गई है। बीमारी के साथ-साथ आर्थिक संकट ने उनके पूरे परिवार को बुरी तरह प्रभावित किया है। ऐसे कठिन समय में परिवार के लिए उपचार की व्यवस्था करना चुनौतीपूर्ण हो गया है। उनकी स्थिति को देखते हुए मदद संस्थान की टीम ने उनके परिवार को भी पांच हजार रुपये का चेक प्रदान किया, जिससे आवश्यक उपचार में सहयोग मिल सके।

सिर्फ आर्थिक सहायता नहीं, आगे भी साथ निभाने का संकल्प
मदद संस्थान की टीम ने तीनों परिवारों से मुलाकात के दौरान उनकी परेशानियों को गंभीरता से सुना। संस्थान के सदस्यों ने भरोसा दिलाया कि जरूरत पड़ने पर इन परिवारों को आगे भी यथासंभव सहयोग और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा। संस्थान का मानना है कि समाज के संपन्न और संवेदनशील लोगों को भी ऐसे जरूरतमंद परिवारों की सहायता के लिए आगे आना चाहिए, ताकि आर्थिक अभाव किसी पीड़ित के उपचार और जीवन की उम्मीदों में बाधा न बने।

इस अवसर पर संस्थान के सदस्यों ने कहा कि मानव सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है। किसी जरूरतमंद के कठिन समय में उसके साथ खड़ा होना, उसकी पीड़ा को समझना और सामर्थ्य के अनुसार मदद करना ही सच्ची सामाजिक सेवा है। उन्होंने ईश्वर से प्रार्थना की कि तीनों परिवारों के दुख दूर हों, पीड़ितों को शीघ्र स्वास्थ्य लाभ मिले और उनके जीवन में फिर से खुशियां लौटें। संस्थान के सदस्यों ने विश्वास जताया कि ईश्वर की कृपा और समाज के सहयोग से इन परिवारों की परेशानियां कम होंगी। मदद संस्थान का पूरा परिवार इन परिवारों के साथ खड़ा है और उनके बेहतर भविष्य की कामना करता है।

इस मानवीय सेवा अभियान के अवसर पर अखिलानंद तिवारी, रणजीत सिंह, निरंजन तिवारी, बब्बन विद्यार्थी, नितेश पाठक, पवन गुप्ता, अमरनाथ सिंह, श्रीभगवान चौधरी, पंचदेव दुबे सहित अन्य लोग उपस्थित रहे। मदद संस्थान की इस पहल ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि समाज में संवेदना, सहयोग और परस्पर विश्वास की भावना जीवित रहे, तो विपरीत परिस्थितियों से जूझ रहे लोगों को नई उम्मीद और संघर्ष करने की ताकत मिल सकती है। जरूरतमंदों के चेहरे पर राहत और जीवन में आशा की किरण जगाने का यह प्रयास मानवता की सेवा के प्रति संस्थान की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
रिपोर्ट: रणजीत सिंह

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