शोध एवं नवाचार के माध्यम से समस्याओं के समाधान में निभानी होगी सक्रिय भूमिका

बदलते अकादमिक परिदृश्य में करियर निर्माण विषय पर विशेष व्याख्यान का हुआ आयोजन
बलिया। जननायक चंद्रशेखर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर नरेंद्र कुमार शुक्ल के कुशल मार्गदर्शन एवं संरक्षण में तथा आंतरिक गुणवत्ता आश्वाशन प्रकोष्ठ के तत्वावधान में “शोध और नवाचार : बदलते अकादमिक परिदृश्य में करियर निर्माण” विषय पर एक विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में प्रोफेसर आनंद शंकर सिंह, प्राचार्य, ईश्वर शरण पी.जी. कॉलेज, प्रयागराज, उपस्थित रहे। प्रो. सिंह विभिन्न प्रतिष्ठित राष्ट्रीय शैक्षणिक, अकादमिक एवं सामाजिक संस्थाओं से भी जुड़े हुए हैं। उन्होंने विश्वविद्यालय के प्राध्यापकों और शोधार्थियों को संबोधित करते हुए वर्तमान अकादमिक परिदृश्य में शोध, नवाचार, परियोजना लेखन, फंडिंग तथा रोजगारपरक शिक्षा के महत्व पर विस्तार से चर्चा की।

मुख्य वक्ता ने विभिन्न प्रोजेक्ट फंडिंग एजेंसियों के बारे में जानकारी देते हुए शोध परियोजनाओं के लिए उपयुक्त विषय चयन, परियोजना प्रस्ताव तैयार करने, शोध की गुणवत्ता, वित्तीय संसाधनों की उपलब्धता तथा शोध को समाजोपयोगी बनाने जैसे महत्वपूर्ण बिंदुओं पर प्रकाश डाला। 

उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में केवल पारंपरिक शिक्षण तक सीमित रहना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उच्च शिक्षा संस्थानों को शोध एवं नवाचार के माध्यम से समाज की समकालीन समस्याओं के समाधान में सक्रिय भूमिका निभानी होगी। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय का दायित्व केवल मूल्यपरक शिक्षा प्रदान करना ही नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को रोजगार एवं स्वरोजगार के लिए सक्षम बनाना भी है। बदलते हुए रोजगार बाजार और तकनीकी परिदृश्य को ध्यान में रखते हुए विश्वविद्यालयों को नए एवं रोजगारपरक पाठ्यक्रम प्रारंभ करने की दिशा में गंभीरता से कार्य करना चाहिए। ऐसे पाठ्यक्रम विद्यार्थियों में आवश्यक कौशल विकसित करने के साथ-साथ उन्हें आत्मनिर्भर बनने के अवसर भी प्रदान करेंगे।

मुख्य वक्ता ने प्राध्यापकों से एवं शोधार्थियों से आह्वान किया कि वे शोध एवं नवाचार को अपनी अकादमिक गतिविधियों का अभिन्न हिस्सा बनाएं तथा उपलब्ध राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय फंडिंग अवसरों का अधिकतम लाभ उठाएं। उन्होंने कहा कि गुणवत्तापूर्ण शोध न केवल शिक्षक के अकादमिक विकास में सहायक होता है, बल्कि विश्वविद्यालय की राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय पहचान को भी मजबूत करता है।

कार्यक्रम के दौरान प्राध्यापकों ने शोध परियोजनाओं, फंडिंग एजेंसियों, नवाचार तथा रोजगारपरक पाठ्यक्रमों से संबंधित विभिन्न प्रश्न पूछे, जिनका मुख्य वक्ता द्वारा विस्तारपूर्वक उत्तर दिया गया। कार्यक्रम के अंत में डॉ पुष्पा मिश्रा, निदेशक शैक्षणिक द्वारा धन्यवाद ज्ञापन दिया गया। 

इस अवसर पर डॉ प्रियंका सिंह, समन्वयक,आईक्यूएसी, डॉ विनीत सिंह, समन्वयक शोध प्रकोष्ठ एवं आईक्यूऐसी सदस्य डॉ अनुराधा राय, डॉ नीरज कुमार सिंह, डॉ संजीव कुमार, डॉ गुंजन, डॉ दिलीप मद्धेशिया सहित परिसर के समस्त प्राध्यापक और शोधार्थी उपस्थित रहे।
रिपोर्ट: विनय कुमार

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