व्यक्ति के व्यक्तित्व का समग्र विकास करना है शिक्षा का उद्देश्य: श्रीमती रजनी तिवारी
जननायक चन्द्रशेखर विश्वविद्यालय का अष्टम् दीक्षान्त समारोह संपन्न
बलिया। जननायक चन्द्रशेखर विश्वविद्यालय का अष्टम् दीक्षान्त समारोह 29 जुलाई दिन बुधवार को विश्वविद्यालय परिसर के दीक्षान्त मण्डप में संपन्न हुआ।
समारोह की अध्यक्षता कर रहीं उच्च शिक्षा राज्य मंत्री श्रीमती रजनी तिवारी ने अपने उद्बोधन में कहा कि भारतीय संस्कृति में शिक्षा को केवल सूचना का संग्रह नहीं माना गया है। शिक्षा का उद्देश्य व्यक्ति के व्यक्तित्व का समग्र विकास करना है। शिक्षा मनुष्य में संवेदनशीलता, आत्मानुशासान, नैतिकता, सेवा भाव, सहिष्णुता और सामाजिक उत्तरदायित्व का विकास करती है। कहा कि जब विश्व परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है तब भारतीय शिक्षा दर्शन की प्रासंगिकता और भी बढ़ जाती है।
विद्यार्थियों का आह्वान करते हुए कहा कि वे केवल रोजगार प्राप्त करने तक ही अपनी आकांक्षाओं को सीमित न रखें बल्कि रोजगार सृजन करने वाले उद्यमी बनें। बेटियों के अधिक मात्रा में स्वर्ण पदक प्राप्त करने पर उन्हें बधाई दी। कहा कि आज हमारी बेटियांँ शिक्षा, विज्ञान, प्रशासन, रक्षा, चिकित्सा, खेल, साहित्य, न्यायपालिका और उद्यमिता सहित प्रत्येक क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रही हैं। राष्ट्र की प्रगति महिलाओं की सहभागिता पर निर्भर करती है।
मुख्य अतिथि पद्मश्री डॉ. अशोक कुमार सिंह, पूर्व निदेशक, भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, नयी दिल्ली ने विद्यार्थियों को दीक्षोपदेश प्रदान किया। कहा कि आज का युग ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था का युग है। किसी भी राष्ट्र की वास्तविक शक्ति उसके प्राकृतिक संसाधनों के साथ ही उसके शिक्षित, कुशल और नवाचारी युवाओं में निहित होती है। आज आवश्यकता केवल प्रयोगशालाओं में शोध करने की नहीं है, बल्कि शोध को खेत तक पहुँचाने की है। विश्वविद्यालयों, वैज्ञानिक संस्थानों, उद्योगों और किसानों के बीच सशक्त साझेदारी स्थापित करना समय की आवश्यकता है। कहा कि आज का युवा नयी तकनीकों ए. आई., ड्रोन, जैव प्रौद्योगिकी, डिजिटल कृषि आदि के माध्यम से कृषि और ग्रामीण विकास को नयी दिशा देने के लिए उत्साहित है। विश्वास जताया कि आने वाले वर्षों में यही युवा भारत की कृषि को अधिक आधुनिक, प्रति स्पर्धी और पर्यावरण अनुकूल बनाएगा।
विशिष्ट अतिथि कुलाधिपति एवं श्री राज्यपाल के विशेष कार्याधिकारी डॉ. पंकज एल. जानी ने विश्वविद्यालय की कुलाधिपति एवं श्री राज्यपाल के सन्देश का वाचन किया। स्वर्ण पदक विजेता विद्यार्थियों और उपाधि प्राप्तकर्ता विद्यार्थियों को बधाई दी, इनमें छात्राओं की संख्या अधिक होने पर प्रसन्नता व्यक्त की। युवाओं को अपनी इच्छा करने के पूर्व योग्यता अर्जित करने की प्रेरणा दी। भारत अब आत्मनिर्भरता की ओर आगे बढ़ रहा है। युवाओं को सन्देश दिया कि प्रगति और विकास की यात्रा में अपनी माटी, अपने देश, अपनी संस्कृति से अलग नहीं होना। संस्कार एवं संस्कृति से तकनीकी की यात्रा, वेद से विज्ञान की यात्रा में आगे बढ़ने की जरुरत है। भारतीय ज्ञान परंपरा अत्यंत प्राचीन एवं समृद्ध है। इस परंपरा को शोध, अनुसंधान और नवाचार के माध्यम से और समृद्ध करना है।
बताया कि कठोर परिश्रम का कोई विकल्प नहीं है। युवाओं को लक्ष्य सुनिश्चित करने, उसे पाने के लिए मनोयोगपूर्वक प्रयत्न करने और उसे हस्तगत करने के लिए प्रेरित किया। गुरु पूर्णिमा के पावन पर्व पर गुरुओं का अभिवादन किया, विद्यार्थियों के भविष्य निर्माण में उनके महत्व को स्वीकारते हुए कहा कि बिना गुरु के ज्ञान अधूरा रहता है।
कुलपति प्रो. नरेन्द्र कुमार शुक्ल ने स्वागत व्यक्तव्य प्रस्तुत किया। विश्वविद्यालय की प्रगति आख्या प्रस्तुत की और भविष्य की योजनाओं का खाका सामने रखा। कुलसचिव एस. एल. पाल ने समावर्तन संस्कार के लिए विद्यार्थियों को प्रस्तुत किया।दीक्षान्त समारोह में संकायाध्यक्ष गण को आमंत्रित कर कुलसचिव द्वारा विद्यार्थियों को उपाधि प्रदान करने का कार्य संपन्न कराया गया।
कार्यक्रम के आरंभ में किशोरियों को सर्विकल कैंसर से बचाने के लिए एच पी वी टीकाकरण किया गया। कार्यक्रम में जिलाधिकारी मंगला प्रसाद सिंह एवं पुलिस अधीक्षक ओमवीर सिंह को प्रशस्ति पत्र से सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. सरिता पाण्डेय ने किया।
कार्यक्रम में निवर्तमान कुलपति प्रो. संजीत कुमार गुप्ता, संकायाध्यक्ष गण, कार्य परिषद एवं विद्या परिषद के सदस्य गण, विश्वविद्यालय एवं सम्बद्ध महाविद्यालयों के प्राध्यापक गण, प्राचार्य एवं प्रबंधक गण, वित्त अधिकारी आनंद दुबे एवं विद्यार्थी गण उपस्थित रहे।
स्वर्ण पदकों का हुआ वितरण
जननायक चन्द्रशेखर विश्वविद्यालय के अष्टम् दीक्षान्त समारोह में अपनी कक्षा में सर्वाधिक अंक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक वितरित किये गये। एम. एस-सी. रसायन विज्ञान की छात्रा नन्दिनी वर्मा को पूरे विश्वविद्यालय में सर्वोच्च अंक प्राप्त करने के लिए कुलाधिपति स्वर्ण पदक से सम्मानित किया गया।
विश्वविद्यालय परिसर की प्राचीन इतिहास, संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग की छात्रा विनीता सिंह को डॉ. काशी प्रसाद जायसवाल स्मृति स्वर्ण पदक से सम्मानित किया गया। इनके अलावा स्वर्ण पदक प्राप्तकर्ता अन्य विद्यार्थी हैं- बी. ए.- अमीना खातून, बी. कॉम.- ममता सिंह, बी. एस- सी.- श्रेया पाण्डेय, बी. सी. ए. स्वेता मौर्या, बी. बी ए.- अतुल कुमार सिंह, बी. एस- सी. कृषि- खुशी सिंह, बी. एड.- कुमार शुभम, बी. लिब.- सोनिया मिश्रा, बी. पी. एड.- शिवांक तिवारी, बी. एल. एड.- सोनम यादव, एल. एल. बी.- कु. सत्या, एम. ए. हिन्दी- महिमा पाण्डेय, एम. ए. अंग्रेजी- संजना सिंह, एम. ए. संस्कृत- रितिका तिवारी, एम. ए. उर्दू- नूर सीबा, एम. ए. समाजशास्त्र- तमन्ना यादव, एम. ए. शिक्षाशास्त्र- शालू सिंह, एम. ए. प्राचीन भारतीय इतिहास, संस्कृति एवं पुरातत्व- खुशी ठाकुर, एम. ए. मध्यकालीन एवं आधुनिक इतिहास- शाश्वत राय, एम. ए. भूगोल- अनुराग भास्कर, एम. ए. राजनीति विज्ञान- सुनंदा प्रजापति, एम. ए. अर्थशास्त्र- सलोनी पाठक,
एम. ए. दर्शनशास्त्र- परितोष कुमार प्रजापति, एम. ए. रक्षा एवं रणनीतिक अध्ययन- तृप्ति तिवारी, एम. ए. समाजशास्त्र- उदय प्रताप प्रभाकर चौहान, एम. एस. डब्लू.- कृष्ण कांत पटेल, एम. ए. गृह विज्ञान मानव विकास- जयंती ठाकुर, एम. ए. गृह विज्ञान आहार एवं पोषण- निर्मला, एम. ए. संगीत गायन- सुनीता, एम. ए. संगीत तबला- पीयूष कुमार राय, एम.कॉम.- वैष्णवी, एम. एड.- कु. आकांक्षा शुक्ला, एम. एस- सी. भौतिक विज्ञान- रुपाली गुप्ता, एम. एस-सी. गणित- कोमल श्रीवास्तव, एम. एस- सी. वनस्पति विज्ञान- आस्था मिश्रा, एम. एस-सी. जन्तु विज्ञान- नीलाक्षी पाण्डेय, एम. एस-सी. बायोटेक्नोलॉजी- ज्योति यादव, एम. एस-सी. कृषि कृषि अर्थशास्त्र- कशिश कुमारी, एम. एस-सी. कृषि मृदा विज्ञान एवं कृषि रसायन- निशु सिंह, एम. एस-सी. कृषि आनुवांशिकी एवं पादप प्रजनन- अंजलि कुशवाहा, एम. एस-सी. कृषि हार्टिकल्चर- समीक्षा मिश्रा, एम. एस- सी. कृषि एग्रोनॉमी- सृष्टि सिंह। स्वर्ण पदक विजेता विद्यार्थियों में कुल 35 छात्राएँ एवं 9 छात्र हैं।
स्मारिका एवं पुस्तकों का हुआ लोकार्पण
दीक्षान्त समारोह के सुअवसर पर स्मारिका सृजन, विश्वविद्यालय की त्रैमासिक समाचार पत्रिका अन्वीक्षण (द क्वेस्ट) एवं 4 पुस्तकों का लोकार्पण हुआ। सृजन के संपादक मण्डल में डॉ. संदीप यादव, डॉ. प्रमोद शंकर पाण्डेय, डॉ. अभिषेक मिश्र, डॉ. दिलीप कुमार मद्धेशिया, डॉ. नीरज कुमार सिंह, डॉ. छबिलाल, श्री शशिप्रकाश जबकि अन्वीक्षण के संपादक डॉ. प्रमोद शंकर पाण्डेय एवं संपादक मण्डल के सदस्य डॉ. सरिता पाण्डेय, डॉ. दिलीप कुमार मद्धेशिया, डॉ नीरज कुमार सिंह, डॉ. संदीप यादव, डॉ. प्रवीण नाथ यादव एवं डॉ. अभिषेक मिश्र सम्मिलित हैं।
लोकार्पित पुस्तकों में ए बंच ऑफ़ प्रिज्मेटिक थॉट्स के लेखक डॉ. नीरज कुमार सिंह एवं डॉ. संजीव कुमार, फंडामेंटल्स ऑफ़ नीमेटोलॉजी के लेखक डॉ. जय प्रकाश सिंह, प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (एडॉप्शन एंड सस्टेनिबिलिटी) की लेखिका डॉ. रंजना मल्ल एवं जननायक चन्द्रशेखर एवं भारतीय समाजवाद के लेखक डॉ. पंकज कुमार सिंह हैं।
प्राथमिक विद्यालय के बच्चों एवं आंगनबाड़ी कार्यकर्त्रियों को किट वितरण
इस अवसर पर प्राथमिक विद्यालयों के बच्चों को शैक्षणिक किट वितरित किये गये। इस किट में स्कूल बैग, कॉपी, पेन्सिल, पेन्सिल बॉक्स, इरेजर, पुस्तकें, बिस्किट, टॉफी आदि वस्तुएँ थीं। इसके अतिरिक्त फलों की टोकरी भी दी गयी। आंगनबाड़ी कार्यकर्त्रियों को भी 200 किट वितरित किये गये, जिनमें 100 किट विश्वविद्यालय प्रशासन और 100 किट जिला प्रशासन द्वारा वितरित किया गया। इस किट में बच्चों के लिए कुर्सी, मेज, ट्राई साइकिल, वर्णमाला और गिनती की पहेलियाँ, फल, सब्जी और जानवरों के चार्ट आदि वस्तुएँ सम्मिलित थीं।
रिपोर्ट: विनय कुमार
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