'अगस्त क्रान्ति उत्सव' अभियान की हुई शुरूआत

19 अगस्त बलिया बलिदान दिवस पर प्रधानमंत्री को आमंत्रण तथा विभिन्न मांगों को पूर्ण कराने हेतु भेजा गया ज्ञापन पत्र
बलिया। कबीरम् समाज, बलिया तथा अखिल भारतीय विश्वविद्यालय सम्बद्ध महाविद्यालय शिक्षक संघ (ए0आई0 एफ0 यू0सी0टी0ओ0) के तत्तवावधान में 9 अगस्त दिन रविवार को टी0डी0 काॅलेज चौराहे के पास अगस्त क्रान्ति उत्सव अभियान की शुरूआत की गयी। भारत माता की जय, अगस्त क्रान्ति जिन्दाबाद तथा इंकलाब का नारा देकर 09 अगस्त 2026 से 23 अगस्त 2026 तक चलने वाले अगस्त क्रान्ति अभियान में अधिक से अधिक सहभागिता किये जाने तथा सहयोग हेतु अपील की गयी है। 

उक्त अवसर पर कबीरम् समाज तथा अखिल भारतीय विश्वविद्यालय सम्बद्ध महाविद्यालय शिक्षक संघ के आजीवन सदस्य व संरक्षक तथा टी0डी0 काॅलेज, अर्थशास्त्र विभागाध्यक्ष प्रो0 सन्तोष प्रसाद गुप्त द्वारा बताया गया है कि 19 अगस्त बलिया बलिदान दिवस/विजय दिवस/शौर्य दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को आमंत्रण किये जाने तथा विभिन्न डिमाण्ड को पूर्ण कर घोषणा किये जाने हेतु भारतीय डाक विभाग द्वारा ज्ञापन पत्र भेजा गया है। आगे बताया गया कि सन् 1857 का प्रथम राष्ट्रीय स्वाधीनता आन्दोलन के नायकों के योगदान जैसे-मंगल पाण्डेय की शहादत, वीर कुँवर सिंह, बेगम हजरत महल, तात्या टोपे, रानी लक्ष्मी बाई, मेघर सिंह का त्याग व बलिदान व संघर्षों के फलस्वरूप 02 अगस्त, 1858 को ब्रिटिश सरकार ने ईस्ट इण्डिया कम्पनी का अधिग्रहण कर लिया। क्राउन अर्थात विक्टोरिया युग-भारत शासन अधिनियम की शुरूआत हुई। आगे 09 अगस्त 1942 को महात्मा गांधी के ‘‘अंग्रेजों’’ भारत छोड़ो आन्दोलन का नारा ‘‘करो या मरो’’ की क्रान्ति के फलस्वरूप महाराष्ट्र का सतारा, पश्चिमी बंगाल का मिदनापुर तथा उत्तर प्रदेश का बलिया ब्रिटिश दासता से सबसे पहले आजाद हो गये। 

आगे चलकर 15 अगस्त 1947 को पंडित जवाहर लाल नेहरू के नेतृत्व में देश भारत को आजादी मिली। महात्मा गांधी के ‘‘करो या मरो’’ 1942 के आन्दोलन का सबसे अधिक प्रभाव बलिया पर पड़ा। 18 अगस्त 1942 को बैरिया में दर्जनों क्रांतिकारी शहीद हो गये, जिसके जनाक्रोश के कारण तत्कालीन जिलाधिकारी जगदीश्वर निगम (जे0 निगम) ने 19 अगस्त 1942 को जिला कारागार, बलिया पहुंचकर जेल में बन्द सेनानियों को रिहा कर दी। शेर-ए-बलिया चित्तू पाण्डेय जिलाधिकारी बने। पंडित महानन्द मिश्र पुलिस कप्तान तथा जानकी-मानकी देवी जिला-न्यायधीश बनीं। इस प्रकार क्रांतिकारी राजकुमार बाघ, पंडित रामदहिन ओझा, राधेमोहन सिंह, उमाशंकर सोनार, मुरली मनोहर लाल इत्यादि के नेतृत्व में पहली प्रजातांत्रिक सरकार बनी थीं। कहीं भी काई अप्रिय घटना नहीं घटी। 

महान कवि जगदीश ओझा ‘‘सुन्दर’’ ने मार्मिक शब्दों में उल्लेख किया है जैसे-
चौदह दिन अपना राज रहा। 
जिसके हम सब अभिमानी है।।
‘‘अंग्रेजों’’ भारत छोड़ों की नारे की।
बलिया इक अमिट निशानी है।।

पुनश्च अवगत कराना है कि कृपालपुर, सोनवानी, जनपद- बलिया निवासी श्री घूराराम समाजसेवी का कहना है कि प्रधानमंत्री कार्यालय, नई दिल्ली तथा शासन/प्रशासन के अधिकारीगण उनके मो0नं0- 7275910783 पर बात कर सम्बन्धित डिमाण्ड को पूर्ण किये जाने को लेकर आश्वासन प्रदान की है। वे चाहते हैं कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी उनके मो0नं0- 7275910783 पर बात कर व मुलाकात कर संतुष्ट करें ताकि वे आश्वस्त हो सके। आशा व्यक्त की गयी है कि जल्द ही प्रधानमंत्री, नरेन्द्र मोदी जी सभी सम्बन्धित सुझावों तथा डिमाण्ड को पूर्ण किये जाने की घोषणा कर सकते हैं, सभी से सहयोग की अपील की गयी है। सम्बन्धित सुझाव तथा डिमाण्ड का संक्षेप में विवरण इस प्रकार है ‘जैसे- ‘‘आजादी का पर्व 19 अगस्त बलिया बलिदान दिवस/विजय दिवस/शौर्य दिवस को राष्ट्रीय मान्यता प्रदान किया जाय अर्थात सार्वजनिक तथा एकेडमिक अवकाश घोषित की जाय। पुरानी पेंशन योजना पुनः बहाल किया जाय अर्थात केन्द्र सरकार तथा राज्य सरकारों ने सन् 2004-05 के बाद नियुक्त कार्मिकों जैसे- कर्मचारी, शिक्षक तथा अधिकारीगण इत्यादि को पुरानी पेंशन योजना पुनः बहाल किया जाय। नई पेंशन योजना रद्द किया जाय। यू0पी0एस0 रद्द किया जाय। तदर्थ तथा संविदा के आधार पर कार्य कर रहे अस्थायी कार्मिकों की सेवाओं का स्थायीकरण एवं विनियमतीकरण किया जाय। नई शिक्षा नीति 2020 रद्द किया जाय। प्रोफेसर पदनाम हेतु पीएच-डी0 की अनिवार्यता खत्म किया जाय। शिक्षा बजट जी0डी0पी0 का दस प्रतिशत किया जाय। शिक्षा बजट आबंटन बढ़ाया जाय। विकास भत्ता प्रति परिवार प्रति सदस्य के हिसाब से रू0-2500/-(दो हजार पांच सौ रू0) प्रतिमाह प्रदान किया जाय। आधार कार्ड की अनिवार्यता व बाध्यता समाप्त किया जाय। शोध अध्येत्तावृत्ति रू0-25000/-(रू0 पच्चीस हजार) प्रतिमाह प्रदान किया जाय। लाॅक डाउन से पीड़ित परिवारों की मदद की जाय।

 अमर शहीद मंगल पाण्डेय की जन्म स्थली नगवाँ गांव तथा आस-पास के इलाके को मंगल क्षेत्र घोषित किया जाय तथा इसका सामाजार्थिक सुधार कर अम्बेडकर ग्राम तथा दीनदयाल उपाध्याय ग्राम जैसी में विशेष सरकारी सुविधाएं प्रदान की जाय। छात्रो के हित में छात्र संघ बहाल किया जाय। आपदा प्रबन्धन नीति को मजबूत किया जाय। न्याय की पहुंच का आम आदमी तक सरल एवं सुगम किया जाय। सार्वजनिक वितरण प्रणाली को सर्वसुलभ, सरल तथा मजबूत किया जाय। आधार कार्ड की अनिवार्यता व बाध्यता समाप्त किया जाय। टकरसन स्थित श्रीराम लक्ष्मण जानकी आश्रम (प्राचीन ठाकुर जी का मठिया) का पुनः उद्धार एवं सुन्दरीकरण किया जाय। आठवे वेतनमान की रिपोर्ट को यथाशीघ्र लागू किया जाय। वेतन विसंगतिया दूर किया जाय। कार्यकाल के आधार पर प्रमोशन किया जाय। ए0पी0आई0 व्यवस्था समाप्त किया जाय। शिक्षा तथा स्वास्थ्य विभाग का बाजारीकरण बंद किया जाय। बलिया के प्रथम सांसद, कुशल अधिवक्ता तथा स्वतंत्रता सेनानी मुरली मनोहर के नाम पर श्री मुरली मनोहर केन्द्रीय विश्वविद्यालय की भी सुविधा प्रदान किया जाय। हिन्दी को राष्ट्रभाषा घोषित किया जाय। सार्वजनिक क्षेत्र में फीस, फेयर तथा फाॅइन जैसी निजी संकल्पना बंद किया जाय। सम्पूर्ण भारतवर्ष में रामराज्य लागू किया जाय इत्यादि।’‘ 

उक्त अवसर पर प्रो0 सुशील किशोर श्रीवास्तव, डाॅ0 प्रदीप कुमार श्रीवास्तव, डाॅ0 फतेह चन्द बेचैन, डाॅ0 सुशील कुमार श्रीवास्तव, सौदागर राम, शिवाजी, एजाज शेख, मंटू साहनी, अधिवक्ता श्रीराम जी ठाकुर, घूराराम समाजसेवी, बब्बन यादव, एन0के0 सिंह पत्रकार इत्यादि उपस्थित रहे। अंत में प्रो0 सन्तोष प्रसाद गुप्त ने आभार व्यक्त किया।

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