अकीदत के साथ संपन्न हुआ जुलूसे चेहल्लुम, गूंजी 'या हुसैन' की सदाएं

ऐतिहासिक जंजीरी मातम के साथ शोहदा-ए-कर्बला को पेश की गई खिराज-ए-अकीदत
बलिया। शहर के बिशुनीपुर स्थित स्व. मुनीर हसन जैदी के प्राचीन इमामबाड़े से 25 सफर को जुलूसे चेहल्लुम पूरी अकीदत, गम और शांतिपूर्ण माहौल में बरामद हुआ। 'या हुसैन' की सदाओं के बीच जुलूस में अमारी, जुल्जनाह, अलम और ताबूत शामिल रहे।

जुलूस से पूर्व आयोजित मजलिस को खिताब करते हुए हुज्जतुल इस्लाम मौलाना आज़ीम जौरासी किब्ला ने हजरत इमाम हुसैन (अ.स.) और 72 शोहदा-ए-कर्बला की कुर्बानियों पर प्रकाश डाला। मजलिस की शुरुआत सोजख्वानी से हुई, जिसका संचालन मौलाना कुमैल व सिमाब गाजीपुरी ने किया।

 समापन मौलाना वसीम रजा ज़ैदी की तकरीर के साथ हुआ। जुलूस में अंजुमन मुहिब्बाने हुसैन सम्मनपुर (आजमगढ़) व सदा-ए-अब्बास (बनारस) के नौहाख्वाहों सहित कुमैल, सुहैल और अली जै़दी ने दर्दभरे नौहे पेश किए। इस दौरान अंजुमन के सदस्यों ने जंजीरी मातम कर जनाबे जैनब (स.अ.) को पुरसा दिया।

रास्ते में अकीदतमंदों के लिए सबीलों का इंतजाम था। पुलिस व प्रशासन के कड़े सुरक्षा इंतजामों के बीच आयोजन सौहार्दपूर्ण माहौल में संपन्न हुआ। अंत में अंजुमन हाशिमियां के सदर शहनशाह हुसैन ज़ैदी, समेत अन्य पदाधिकारियों ने जिला प्रशासन, मातमी अंजुमनों और पत्रकारों के प्रति आभार व्यक्त किया।
रिपोर्ट: विक्की कुमार गुप्ता

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