ग्रीष्मकालीन उपशास्त्रीय संगीत कार्यशाला' का समापन समारोह संपन्न

सभी प्रतिभागियों को उ०प्र० संगीत नाट्य अकादमी, लखनऊ द्वारा  प्रदान किया गया प्रमाण-पत्र
बलिया। उ० प्र० संगीत नाट्य अकादमी, लखनऊ (संस्कृति विभाग, उ० प्र०) एवं 'पं० पारस नाथ उपाध्याय न्यास समिति, बलिया' के संयुक्त तत्वावधान में कुंवर सिंह इण्टर कालेज, बलिया के सभागार में डाॅ० अरविंद कुमार उपाध्याय के संयोजकत्व में आयोजित 'नाद प्रवाह' के अंतर्गत 'ग्रीष्मकालीन उपशास्त्रीय संगीत कार्यशाला' का समापन समारोह धूम -धाम से एवं हर्षोल्लास के साथ सम्पन्न हुआ। 

समापन समारोह के मुख्य अतिथि  बलिया जिला के प्रोबेशन अधिकारी एवं विशिष्ट अतिथि जिला चिकित्सालय, बलिया के बाल रोग विशेषज्ञ डाॅ० के० के० उपाध्याय  रहे। इसके अतिरिक्त जिले के प्रसिद्ध कवि, साहित्यकार एवं प्रतिभागियों के अभिभावक सहित अन्य विशिष्ट गण भी उपस्थित रहे। उल्लेखनीय है कि उ०प्र० संगीत नाट्य अकादमी, लखनऊ के सहयोग से बलिया में यह संगीत कार्यशाला पहली बार आयोजित हुई है। इस कार्यशाला को आयोजित कर प्रशिक्षक के रूप में  प्रतिभागियों को प्रशिक्षण देने में डाॅ० अरविंद कुमार उपाध्याय द्वारा अथक भूमिका निभाई गयी है। इसके साथ ही साथ अन्य प्रशिक्षकों द्वारा भी प्रशिक्षण प्रदान कर कार्यशाला को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई गयी।

 यह कार्यशाला 15 दिनों तक चली एवं इसमें 35 प्रतिभागियों ने भाग लिया। नन्हें मुन्ने बच्चों (प्रतिभागियों) द्वारा प्रस्तुत किए गये विविध प्रकार के कार्यक्रमों ने सबका मन मोह लिया। सभी प्रतिभागियों को उ० प्र० संगीत नाट्य अकादमी, लखनऊ द्वारा प्रमाण -पत्र प्रदान किया गया।

संगीत एक साधना है, जिससे होता है व्यक्तित्व का समग्र विकास 
इस संगीत कार्यशाला के आयोजन से निश्चित तौर पर बलिया में संगीत के प्रति एक नई चेतना पैदा हुई है और इस कार्यशाला में भाग लेने वाले प्रतिभागियों को विशेष अवसर प्राप्त हुआ है एवं संगीत के प्रति विशेष रूझान पैदा हुआ है एवं रूचि बढ़ी है। संगीत न केवल हमारा मनोरंजन करता है, बल्कि संगीत हमारी संस्कृति से जुड़ी हुई एक ऐसी विधा है, जिससे हमारा जीवन संवरता है, हम तनाव मुक्त होकर सुकून से अपना जीवन बिताते हैं, हमें अच्छी नींद आती है, हमारा स्वास्थ्य भी संतुलित रहता है एवं हम तन - मन से स्वस्थ रहकर अपने जीवन पथ के विकास में अग्रसर होते रहते हैं। इस तरह संगीत सम्पूर्ण व्यक्तित्व का विकास करता है। खासतोर से बच्चों के व्यक्तित्व के समग्र विकास में संगीत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

Comments

Popular posts from this blog

महिला सशक्तिकरण के बिना संभव नहीं हैं समग्र सामाजिक विकास: डॉ. पुष्पा मिश्रा

शिक्षकों का हो रहा मानसिक व आर्थिक शोषण: सुधांशु शेखर त्रिपाठी

संगीत विभाग के छात्र का दिल्ली शिक्षा निदेशालय में म्यूजिक टीचर पद पर चयन