संस्कृति की संवाहक एवं संरक्षक होती हैं भाषाएं: डॉ. विवेकानंद देव
चन्द्रशेखर विश्वविद्यालय में हिन्दी दिवस का हुआ आयोजन
बलिया। जननायक चन्द्रशेखर विश्वविद्यालय में सोमवार को हिन्दी दिवस का आयोजन किया गया। इस अवसर पर हिन्दी विभाग द्वारा भारतीय संस्कृति के संरक्षण में हिन्दी की भूमिका विषय पर एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया।
मुख्य वक्ता डॉ. विवेकानंद देव पाण्डेय ने अपने उद्बोधन में कहा कि संस्कृति और भाषा का अन्योन्याश्रित सम्बन्ध होता है। भाषाएं संस्कृति की संवाहक एवं संरक्षक होती हैं। भारतीय संस्कृति की धारा अजस्र प्रवाहित होती रही है जिसमें भारतीय भाषाओं विशेषकर हिन्दी की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। हिन्दी के रचनाकारों सूर, कबीर, तुलसी आदि ने अपनी रचनाओं के माध्यम से भारतीय संस्कृति के संरक्षण में महनीय योगदान दिया है। विशेषकर रामचरितमानस ने देश में ही नहीं विदेशों में भी जहाँ गिरमिटिया मजदूर गये वहाँ भारतीय संस्कृति की ध्वजा फहरायी है।
कुलपति प्रो. नरेन्द्र कुमार शुक्ल के संरक्षण में आयोजित इस कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. विनीत सिंह, छात्र कल्याण अधिष्ठाता ने की। कार्यक्रम में स्वागत डॉ. प्रवीण नाथ यादव, विषय प्रवर्तन डॉ. संदीप यादव ने किया। संचालन डॉ. प्रमोद शंकर पाण्डेय एवं धन्यवाद ज्ञापन डॉ. अभिषेक मिश्र ने किया।
इस अवसर पर डॉ. शशिभूषण, डॉ. विजय शंकर पाण्डेय, डॉ. राम सरन आदि परिसर के प्राध्यापक, शोधार्थी एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।
रिपोर्ट: विनय कुमार
Comments
Post a Comment