झील दिवस पर विशेष-

जैव विविधता एवं जल असंतुलन को बचाने हेतु बचाना होगा झीलों को: डाॅ० गणेश पाठक
     झील हमारे लिए प्रकृति प्रदत्त एक उपहार है, जिससे न केवल हमें जल मिलता है, बल्कि भू- गर्भ जल में वृद्धि करने एवं भू - गर्भ जल को संतुलित बनाए रखने भी झीलों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। झीलें आर्द्र भूमियों को समृध्द बनाकर उनको संतुलित बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। पारिस्थिकी तंत्र को संतुलित बनाए रखने में झीलों की मसत्वपूर्ण भूमिका होती है। 

     कष्ट तो इस बात का है कि मानव की भोगवादी प्रवृत्ति एवं विलासितापूर्ण जीवन तथा आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु इन झीलों का भी इस कदर उपयोग एवं दुरूपयोग किया गया है कि जीवन प्रदायी ये झीलें भी प्रदूषण का शिकार हो गयी हैं। यही नहीं इन झीलों का अतिक्रमण भी हो रहा है और इन झीलों को पाट कर उन पर तरह - तरह के ढांचे का निर्माण भी हो रहा है। अनेक झीलें समाप्ति के कगार पर हैं। अत: यदि पारिस्थितिकी स़तुलन को बनाए रखना है तो झीलों को बचाना होगा। 

इनको बचाने हेतु सबसे आवश्यक है हमारे अन्दर जागरूकता पैदा होना , जिसके तहत हम झीलों कै कब्जा करने वाले लोगों को समझा सके कि ये झीलें हमारे लिए, हमारी अगली पीढी के लिए, पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी के स़तुलन को बनाए रखने के लिए कितना महत्वपूर्ण हैं।

  संयुक्त राष्ट्र महासभा ने वर्ष 2024 में एक प्रस्ताव पारित कर 27 अगस्त को आधिकारिक रूप से झील दिवस के रूप में घोषित किया, जिसके आयोजन का मुख्य दायित्व 'संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP)' को सौंपा गया और आधिकारिक रूप से  27 अगस्त, 2025 को पहला विश्व झील दिवस मनाया गया।

  झील दिवस मनाने का प्रमुख उद्देश्य झीलों एवं उनके पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण के प्रति वैश्विक स्तर पर 
जागरूकता उत्पन्न करना, झीलों में बढ़ते जल प्रदूषण, अतिक्रमण तथा जलवायु परिवर्तन के दुष्परिणामों को रोकने के लिए ठोस कदम उठाना, मीठे पानी की सुरक्षा और जैव विविधता को बचाए रखने के लिए सामुदायिक एवं सरकारी भागीदारी को बढ़ावा देना है।

 पृथ्वी पर 11.7 करोड़ से अधिक झीलें हैं, जिनमें वीश्व के कुल सतही मीठे जल का लगभग 90% हिस्सा विद्यमान है। झीलें धरती के लगभग 4% भू-भाग को घेरे हुई हैं। विगत 50 वर्षों में प्रदूषण और मानवीय गतिविधियों के कारण मीठे पानी की लगभग 85% प्रजातियां प्रभावित या विलुप्त हुई हैं।

 इस प्रकार यदि पारिस्थितिकी तंत्र को असंतुलित होने से बचाना है, जैव विविधता के क्षरण को रोकना है, भूमिगत जल को समृद्ध बनाना है, जल प्रदूषण को रोकना है एवं जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को रोकना है तो झीलों को अतिक्रमण से मुक्त कराकर उन्हें पत्येक दृष्टि से सुरक्षित एवं संरक्षित करना होगा, जिसके लिए जन सहभगिता एवं जन - जागरूकता अति आवश्यक है, क्यों की सब कुछ सरकार के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता, कुछ अपनी भी जिम्मेदारी निभानी होगी।

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