बलिया की आज़ादी और बलिदान को किया गया याद
बलिया बलिदान दिवस पर अमर बलिदानियों को किया गया सादर नमन
बलिया। जननायक चन्द्रशेखर विश्वविद्यालय मे कुलपति प्रो. नरेन्द्र कुमार शुक्ल के संरक्षण में मध्यकालीन एवं आधुनिक इतिहास विभाग द्वारा बसंत संगम के माध्यम से आज सन् 1942 में मिली बलिया के आजादी का जश्न मनाया गया और आजादी के प्रयास में सर्वोच्च बलिदान देने वाले अमर बलिदानियों को सादर नमन किया गया।
इस अवसर पर सहायक आचार्य डॉ० शैलेन्द्र कुमार सिंह ने बताया कि गांधी जी के ग्वालिया टैंक मैदान में 8 अगस्त 1942 को करो या मरो के आह्वान पर 10 मार्च को बलिया ओक्नडेगंज से विश्वनाथ प्रसाद मर्दाना के नेतृत्व में अंग्रेजों के खिलाफ़ विशाल जुलूस निकाल कर विरोध का बिगुल फूंका गया और 13 अगस्त तक बलिया के हर हिस्से में अंग्रेजी सत्ता का भीषण विरोध शुरु हो गया। बैरिया में 18 अगस्त को कौशल किशोर सिंह सहित 19 लोग अंग्रेजी सत्ता से आर पार की लड़ाई में शहीद हो गए। 19 अगस्त को आजादी के हजारों दीवानों का बलिया शहर में उत्साह देखकर तत्कालीन जिलाधिकारी जगदीश निगम ने बलिया कारावास में बंद चित्तू पाण्डेय से बाहर निकल कर परिस्थिति संभालने का निवेदन किया।
इसी के साथ सन् 42 में बलिया अंग्रेजी सत्ता से आज़ादी पाने वाला देश का पहला जिला बना। छात्र शाश्वत राय ने स्वतंत्रता सेनानी प्रसिद्ध नारायण सिंह की रचित कविता लुटा दिहल परान जे, मिटा दिहल निशान जे का सस्वर पाठ किया। श्वेता वर्मा, लक्ष्मी गुप्ता, शिवानी यादव, अंजली वर्मा, गुड्डी, शांम्भवी ने देश भक्ति गीत गाया। संचालन आनन्द देव राणा और धन्यवाद ज्ञापन सुधांशु पाण्डेय ने किया।
कार्यक्रम में निदेशक शैक्षणिक डॉ०पुष्पा मिश्रा, कुलानुशासक डॉ० प्रियंका सिंह, डॉ० अनुराधा राय, डॉ० विनीत सिंह, डॉ० लाल विजय सिंह, डॉ० ज्ञानेन्द्र चौहान आदि शिक्षकगण और भारी संख्या में विद्यार्थी व कर्मचारी उपस्थित रहे।
रिपोर्ट: विनय कुमार
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