योग एवं प्राणायाम सनातन संस्कृति एवं भारतीय ज्ञान परम्परा की महत्वपूर्ण देन: डाॅ० गणेश कुमार पाठक
सरस्वती विद्या मंदिर माल्देपुर में योग शिविर का हुआ आयोजन
बलिया। अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर सरस्वती विद्या मंदिर माल्देपुर, बलिया के सभागार में योग शिविर का आयोजन किया गया, जिसके मुख्य अतिथि अमरनाथ मिश्र स्नातकोत्तर महाविद्यालय दूबेछपरा, बलिया के पूर्व प्राचार्य एवं जननायक चन्द्रशेखर विश्वविद्यालय बलिया के पूर्व शैक्षणिक निदेशक पर्यावरणविद् डाॅ० गणेश कुमार पाठक रहे। जबकि विशिष्ट अतिथि बैंक आफ इण्डिया के बलिया शाखा के प्रबंधक महोदय रहे।
योग शिविर की शुरुआत मंच पर आसीन अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर एवं मां शारदे तथा मां भारती के चित्र पर पुष्पांजलि जन कर किया गया। योग शिविर में योग क्रिया को प्रदर्शित करने का कार्य विद्यालय के प्रतिष्ठित योग प्रशिक्षक श्री राजेश आचार्य जी द्वारा किया गया। आगे - आगे योग प्रशिक्षक द्वारा योग क्रिया किया जा रहा था, जिसको शिविर में उपस्थित सभी लोग उनका अनुसरण कर योग क्रिया कर रहे थे।
योग क्रिया की समाप्ति के बाद सर्वप्रथम विद्यालय के प्रधानाचार्य श्री शैलेन्द्र त्रिपाठी द्वारा अपने उद्बोधन में विषय का परावर्तन करते हुए योग के महत्व पर प्रकाश डाला। तत्पश्चात विशिष्ट अतिथि ने योग पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यदि वर्तमान परिवेश में हमें स्वस्थ रहना है तो हमें योग क्रिया को अपने जीवन में अपनाना होगा। बतौर मुख्य अतिथि डाॅ० गणेश कुमार पाठक ने अपने उद्बोधन में कहा कि योग एवं प्राणायाम हमारी सनातन संस्कृति एवं भारतीय ज्ञान परम्परा की एक अति महत्वपूर्ण देन है, जिसको अपनाकर हम आजीवन स्वस्थ रह सकते हैं। योग एक ऐसी क्रिया है , जिसको करने में उम्र का बंधन नहीं है। शरीर की क्षमता एवं आवश्यक अनुसार सभी आयु वर्ग के लोग योग क्रिया करके अपने को स्वस्थ रख सकते हैं एवं चिकित्सकों के पास अनावश्यक रूप से जाने से बच सकते हैं। किंतु चिकित्सकों का अपना महत्व है। विशेष योग एवं आपातकाल में चिकित्सकों की भूमिका को नकारा नहीं जा सकता।
मुख्य अतिथि ने कहा कि योग एवं प्राणायाम एक ऐसी विधा है, जिसको अपनाकर कर हम न केवल स्वस्थ रह सकते हैं, बल्कि हम शारिरिक, मानसिक, आत्मिक एवं बौद्धिक रूप से भी पूर्ण स्वस्थ होकर आजीवन स्वस्थ रहकर अपना जीवन सुखमय रूप से व्यतीत कर सकते हैं। यदि बच्चे प्रारम्भ से ही योग एवं प्राणायाम क्रिया को सीखकर अपने जीवन शैली का अंग बना लें तों उनका समग्र विकास हो सकता है। योग जीवन का आर्दश मार्ग है, जिस पर चलकर हम अपने जीवन को सुखमय एवं सफल बना सकते हैं।
मंच पर विद्या भारती के अक्षय जी एवं विभाग प्रमुख अनिल सिंह सहित विद्यालय के प्रधानाचार्य शैलेंद्र त्रिपाठी जी भी अपनी उपस्थिति से मंच की शोभा बढ़ा रहे थे। पूरा सभागार विद्यालय के छात्र भैया - बहनों, शिक्षक गण, अभिभावक गण एवं अन्य गणमान्य लोगों से भरा रहा।
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