शिविर में होता है प्रतिभागियों के व्यक्तित्व का समग्र विकास: डाॅ. गणेश पाठक

संस्था 'संकल्प' के तत्वावधान में उमंग 2026 तीस दिवसीय समर कैंप का समापन
बलिया। साहित्यिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक संस्था 'संकल्प' के तत्वावधान में नन्द होटल रेजीडेंसी, बलिया में 30 दिवसीय समर कैंप का समापन समारोह हर्षोल्लास के साथ धूम -धाम से मनाया गया। जिसमें सर्वप्रथम अतिथियों के द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम की विधिवत शुरुआत की गयी। 

प्रमुख अतिथियों में जनपद के मुख्य कोषाधिकारी श्री आनन्द दूबे, अमरनाथ मिश्र स्नातकोत्तर महाविद्यालय दूबेछपरा, बलिया के पूर्व प्राचार्य एवं जननायक चन्द्रशेखर विश्वविद्यालय बलिया के पूर्व शैक्षणिक निदेशक डाॅ० गणेश कुमार पाठक, टाउन इण्टर कालेज, बलिया के पूर्व प्रधानाचार्य डाॅ० अखिलेश सिन्हा, सुप्रसिद्ध कलाकार डाॅ० इफ्तेखार खां, डाॅ० कादम्बिनी सिंह, अर्चना पाण्डेय, वरिष्ठ पत्रकार अशोक जी, डाॅ० राजेन्द्र भारती आदि की उपस्थिति उल्लेखनीय रही। सभागार में प्रतिभागियों के अभिभावक गण एवं अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

इस 30 दिवसीय समर कैंप में कविता, नाटक, नृत्य, गीत एवं संगीत में संकल्प संस्था के निदेशक एवं अन्य प्रशिक्षकों द्वारा प्रतिभागियों कै प्रशिक्षण प्रदान किया गया। प्रशिक्षण देने में प्रशिक्षकों द्वारा प्रतिभागियों के आचार, विचार, व्यवहार, रूचि एवं उनकी मनोदशा के अनुरूप सहज एवं सरस रूप में अपनत्व प्रदान कर प्रशिक्षण दिया गया। उन्हें विद्यालय के वातावरण तथा किताबों एवं होमवर्क के बोझ से अलग रखकर सहज भाव से प्रशिक्षण दिया गया, जिसकी स्पष्ट झलक प्रतिभागियों द्वारा प्रस्तुत कार्यक्रमों में देखने को मिली कि उन्होंने क्या एवं कितना सीखा है।

 कार्यक्रम में प्रतिभागियों द्वारा कविता, नाटक, नृत्य एवं संगीत कू विधाओं गायन तथा वादन की बखूबी प्रस्तुति की गयी, जो अत्यन्त सराहनीय रहा। कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों को अतिथियों द्वारा प्रमाण -पत्र दिया गया।

 जिला चिकित्सालय में कार्यरत बलिया के ही निवासी डाॅ० सोनी, नंद होटल के मालिक श्री अजय सिंह एवं सभी प्रशिक्षकों को स्मृति चिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का संचालन प्रकृति त्रिवेदी द्वारा किया गया। कार्यक्रम के अंत में संकल्प संस्था के निदेशक आशीष त्रिवेदी द्वारा सभी आगंतुकों के प्रति धन्यवाद ज्ञापन किया गया।

      वास्तव में इस तरह के समर कैंप से बच्चों का समग्र विकास होता है। कारण कि ऐसे शिविरों में बच्चे किसी दबाव में न रहकर एक दूसरे से मिल- जूल कर एवं एक दूसरे से मित्रवत व्यवहार करते हुए कार्यक्रम में बताई गयी बातों को तल्लीनता से जानने एवं समझने का प्रयास करते हैं, जो उनके जीवन का अंग बन जाता है। 

यहां बच्चे खेल - खेल में स्वयं अनुशासित रहते हुए आपस में मिल - जूल कर कैसे एक महीना का समय बिता दिए, उन्हें पता ही नहीं चला। प्रतिभागियों के चेहरे पर एक अजीब संतोष, उल्लास एवं ओज का भाव था, जो यह बताने के लिए पर्याप्त है कि इस शिविर से प्रतिभागियों ने बहुत कुछ सीखा एवं पाया है, जो उनके समग्र विकास में सहायक होगा।

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