'मेरे हिस्से की माँ' एवं 'धूप का मुसाफिर' का गरिमामय लोकार्पण, नवोदित रचनाकारों का हुआ सम्मान

शिविजा पब्लिकेशंस एवं सतीश चंद्र कॉलेज के संयुक्त तत्वावधान में भव्य पुस्तक लोकार्पण एवं साहित्य संगोष्ठी सम्पन्न
बलिया। शिविजा पब्लिकेशंस, बलिया एवं सतीश चंद्र कॉलेज, बलिया के संयुक्त तत्वावधान में शनिवार को सतीश चंद्र कॉलेज परिसर में भव्य पुस्तक लोकार्पण समारोह एवं साहित्य संगोष्ठी का आयोजन अत्यंत गरिमामय वातावरण में सम्पन्न हुआ। 

साहित्य, शिक्षा और सामाजिक चेतना को समर्पित इस आयोजन में मातृ दिवस एवं पितृ दिवस पर आधारित दो महत्वपूर्ण कृतियों 'मेरे हिस्से की माँ' तथा 'धूप का मुसाफिर' का विधिवत लोकार्पण किया गया। कार्यक्रम में जनपद के प्रतिष्ठित शिक्षाविदों, साहित्यकारों, पत्रकारों, प्राध्यापकों एवं युवा रचनाकारों की उल्लेखनीय सहभागिता रही।

कार्यक्रम की मुख्य अतिथि श्रीमती अर्चना दुबे (धर्मपत्नी श्री आनंद दुबे, वरिष्ठ कोषाधिकारी एवं वित्त अधिकारी, बलिया) रहीं। विशिष्ट अतिथि के रूप में डॉ. गणेश पाठक (पूर्व प्राचार्य, अमरनाथ मिश्र पी.जी. कॉलेज, दूबेछपरा) उपस्थित रहे। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. जनार्दन राय रहे, जबकि समारोह की अध्यक्षता प्राचार्य प्रो. बैकुंठ नाथ पांडेय (सतीश चंद्र कॉलेज, बलिया) ने की।

कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन एवं सरस्वती वंदना के साथ हुआ। इसके उपरांत सभी अतिथियों का शिविजा पब्लिकेशंस की संपूर्ण टीम द्वारा पुष्पगुच्छ एवं अंगवस्त्र भेंट कर हार्दिक स्वागत एवं अभिनंदन किया गया। समारोह में सर्वप्रथम शिविजा पब्लिकेशंस के साहित्यिक सलाहकार श्री अखिलेश मिश्र का सम्मान किया गया। इसके उपरांत युवा साहित्यकार एवं संपादक अभिषेक मिश्रा द्वारा संपादित दोनों पुस्तकों 'मेरे हिस्से की माँ' एवं 'धूप का मुसाफिर' का विधिवत लोकार्पण हुआ। 

विशिष्ट अतिथि डाॅ० गणेश कुमार पाठक ने लोकार्पित  इन दोनों पुस्तकों को भारतीय पारिवारिक मूल्यों, मातृ-पितृ श्रद्धा, मानवीय संवेदनाओं एवं समकालीन साहित्य की सशक्त  अभिव्यक्ति बताते हुए इनके साहित्यिक महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला।

   मुख्य वक्ता डॉ० जनार्दन राय  ने अपने उद्बोधन में कहा कि साहित्य केवल शब्दों का संयोजन नहीं, बल्कि समाज की आत्मा का स्वर है। उन्होंने युवा रचनाकारों को निरंतर अध्ययन, चिंतन और मौलिक सृजन की प्रेरणा देते हुए कहा कि ऐसे साहित्यिक प्रयास नई पीढ़ी को भारतीय संस्कारों एवं मानवीय मूल्यों से जोड़ने का महत्वपूर्ण कार्य कर रहे हैं।

   अध्यक्षीय संबोधन में प्रो.बैकुंठ नाथ पांडेय ने शिविजा पब्लिकेशंस की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि आज के समय में नवोदित रचनाकारों को मंच उपलब्ध कराना अत्यंत सराहनीय कार्य है। उन्होंने कहा कि साहित्यिक आयोजन केवल पुस्तकों के लोकार्पण तक सीमित नहीं होते, बल्कि नई साहित्यिक चेतना और सृजनशीलता को दिशा देने का माध्यम भी बनते हैं।

  इस अवसर पर उपस्थित अन्य विशिष्ट जनों में चीफ प्रॉक्टर प्रो. देवेंद्र सिंह, प्रो. अवनीश चंद्र पांडेय, विजय मिश्रा, डॉ. मंजीत कुमार सिंह (कुंवर सिंह पी.जी. कॉलेज), शशि देव सिंह 'प्रेमदेव' (प्रधानाचार्य, कुंवर सिंह इंटर कॉलेज), डॉ. जनार्दन चतुर्वेदी 'कश्यप', वरिष्ठ पत्रकार अशोक जी, डॉ. राजेंद्र भारती, डॉ. कादंबिनी सिंह, श्वेता पाण्डेय, सुशीला पाल, शशि लता पांडेय, डॉ. राम कुमार, डॉ. ओम प्रकाश गुप्ता (विभागाध्यक्ष, वाणिज्य विभाग), डॉ. प्रमोद श्रीवास्तव तथा रचनाकार ज्योति वर्मा की माताश्री सहित अनेक शिक्षाविद्, साहित्यकार एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
       
     कार्यक्रम में नवोदित रचनाकारों के उत्कृष्ट साहित्यिक योगदान को विशेष रूप से सम्मानित किया गया। अतिथियों द्वारा उन्हें मेडल, प्रशस्ति-पत्र एवं 'शिविजा काव्य स्नेह उपहार प्रदान कर उनके साहित्यिक उत्साहवर्धन का कार्य किया गया। सम्मान प्राप्त करने वाले युवा रचनाकारों ने इसे अपने साहित्यिक जीवन का महत्वपूर्ण एवं प्रेरणादायी क्षण बताया।

   कार्यक्रम में यह भी जानकारी दी गई कि लोकार्पित दोनों पुस्तकें 'मेरे हिस्से की माँ' एवं 'धूप का मुसाफिर' देशभर के पाठकों के लिए Amazon पर भी उपलब्ध हैं, जिससे पाठक घर बैठे इन पुस्तकों को प्राप्त कर सकते हैं।

   कार्यक्रम के सफल आयोजन में कार्यक्रम संयोजक प्रो. श्रीपति कुमार यादव (विभागाध्यक्ष, हिन्दी विभाग) एवं कार्यक्रम संयोजिका प्रो. माला कुमारी की महत्वपूर्ण भूमिका रही। आयोजन को सफल बनाने में शिविजा पब्लिकेशंस की पूरी टीम—अखिलेश मिश्र, अभिषेक मिश्रा, शिवम पांडेय, वैभव प्रताप, तुलसी बरनवाल, खुशी गुप्ता, आनंद जी वर्मा, शुभम ओझा, मुस्कान ओझा, अंजलि ओझा एवं अफसाना परवीन—का सराहनीय योगदान रहा। कार्यक्रम का प्रभावशाली एवं सुसंचालित मंच संचालन नंदिनी शर्मा एवं अभिषेक मिश्रा द्वारा किया गया, जिन्होंने पूरे समारोह को अपनी प्रभावी वाणी एवं संयमित प्रस्तुति से गरिमामय बनाया।

समारोह के अंत में कार्यक्रम संयोजक हिंदी विभागाध्यक्ष प्रोफेसर श्रीपति कुमार यादव ने सभी अतिथियों, साहित्यकारों, रचनाकारों, शिक्षकों, विद्यार्थियों एवं उपस्थित जनों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए भविष्य में भी साहित्य, संस्कृति और नवोदित प्रतिभाओं के प्रोत्साहन हेतु ऐसे भव्य आयोजनों को निरंतर आयोजित करने का संकल्प व्यक्त किया। यह आयोजन केवल पुस्तक लोकार्पण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि साहित्य, संवेदनाओं, संस्कारों और नई पीढ़ी के रचनात्मक भविष्य को समर्पित एक यादगार साहित्यिक उत्सव के रूप में अपनी विशेष पहचान छोड़ गया।

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