अपने संवैधानिक अधिकारों की रक्षा हेतु एकजुट हो आदिवासी गोंड समुदाय: जीउत जी गोंड

वीरांगना महारानी दुर्गावती जी के 463वें बलिदान शहादत दिवस पर अर्पित की श्रद्धांजलि
बलिया। गोंडवाना की वीरांगना महारानी दुर्गावती जी के 463वें बलिदान शहादत दिवस पर 24 जून दिन बुधवार को आदिवासी जनजाति गोंड समुदाय के लोगों द्वारा शंकरपुर स्थिति गोंड भवन पर उनके चित्र पर फूल माला श्रद्धा सुमन अर्पित कर श्रद्धांजलि दी गयी तथा गोंडवाना की वीरांगना महारानी दुर्गावती अमर रहें के जोरदार नारे लगाए गए।

इस दौरान संरक्षक जीउत जी गोंड ने कहा कि गोंडवाना वीरांगना महारानी दुर्गावती का इतिहास संघर्ष गाथा बड़ा ही शानदार रहा है। उन्होंने अपने जीवन काल में कुल 52 युद्ध लड़ीं और उनके कुशल नेतृत्व में 51 युद्धों में विजय श्री प्राप्त हुयी। महारानी दुर्गावती ने अकबर की मुगल सेनापति आसफ खां को तीन-तीन बार परास्त करने का काम की। गोंडवाना राज्य तथा आदिवासी गोंड समुदाय के मान सम्मान स्वाभिमान की रक्षा हेतु अपने आप को दुश्मनों से घिरा पाकर अपना ही कटार अपने सिने में घोंप कर वीर गति का प्राप्त हुईं लेकिन जीते जी कभी भी मुगल सम्राट अकबर की अधीनता स्वीकार नहीं की जो प्रेरणा श्रोत है।

कहा कि वीरांगना महारानी दुर्गावती जी के संघर्ष से प्रेरणा लेकर आदिवासी गोंड समुदाय को अपने संवैधानिक अधिकारों की रक्षा हेतु एकजुट होने की आवश्यकता है। संरक्षक जीउत जी गोंड ने आगे कहा कि यदि सभी पीड़ित संगठित हो जाएं तो पीड़ित ही पॉवर बन जाते हैं। इसी तर्ज पर गांव गांव में संगठन बनाने की आवश्यकता है। अपने को जानों अभियान के तहत आज की गोंड युवा पीढ़ी को अध्ययन आंदोलन के लिए प्रेरित करने की आवश्यकता है।

कार्यक्रम में प्रमुख रूप से अरविंद गोंडवाना, संजय गोंड, शिवजी गोंड, श्रीभगवान गोंड, शंकर गोंड, पूर्व प्रधान कन्हैया गोंड, ओमप्रकाश गोंड, विजय शंकर गोंड, धनेश गोंड, जगलाल गोंड, हरिशंकर गोंड, राजकुमार गोंड, रामस्नेही गोंड उपस्थित रहे।

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