नव कुंडी गायत्री महायज्ञ में गायत्री परिजनो ने समर्पित की आहुतियां

गायत्री जयंती गंगा दशहरा पर्व पर हुआ विविध कार्यकम
बलिया। महावीर घाट गंगा जी मार्ग स्थित गायत्री शक्तिपीठ पर बड़े ही श्रद्धा उल्लास के साथ गायत्री परिजनों द्वारा नव कुंडी गायत्री महायज्ञ में अपनी आहुतियां दे संपन्न की। 
इस अवसर पर गायत्री शक्तिपीठ प्रमुख विजेद्र नाथ चौबे जी ने पर्व के महात्म्य बोध पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सृष्टि के आदि में ब्रह्मा जी जिस शक्ति की साधना करके विश्व संचालन के उपयुक्त ज्ञान एवं विज्ञान अनुभव एवं पदार्थ प्राप्त कर सकने में समर्थ हुए पौराणिक प्रतिपादन के अनुसार उसका नाम गायत्री है। सृजन और अभिवर्धन का उद्देश्य लेकर चल रहे जीवन प्रक्रिया को भी इसी संबल की आवश्यकता है जो ब्रह्मा जी की तरह उसे मानसिक क्षमता एवं भौतिक संपन्नता युक्त कर सके गायत्री मंत्र में तत्व बीज मौजूद है। उपासना और तपश्चर्या के विधान को अपनाकर इन तत्वों को वैज्ञानिक रूप से अपने भीतर बाहर बढ़ाया भी जा सकता है। 

गायत्री को वेद माता ज्ञान गंगोत्री संस्कृति की जननी एवं आत्म बल की अधिष्ठात्री कहा गया है। इसे गुरु मंत्र कहते हैं। यह समस्त भारतीय धर्म अनुवाइयों की उपाधि है। इसमें वे सभी विशेषताएं विद्यमान है जिनके आधार पर यह सार्वभौम सार्वजनिक उपासना का पद पुनः ग्रहण कर सके। इसी ज्ञान विज्ञान की देवी गायत्री का जन्मदिन है गायत्री जयंती

इसी दिन भगवती गंगा स्वर्ग से धरती पर अवतरित हुई जिस प्रकार स्थूल गंगा भूमि को सिंचित सृष्टि प्राणियों की तृष्णा मिटाती  मलीनता हरति और शांति देती है वही सब विशेषताएं अध्यात्म क्षेत्र में गायत्री रूपी ज्ञान गंगा की है गायत्री महाशक्ति की  गंगा अवतरण से संगति भली प्रकार मिल जाता है। एक को सूक्ष्म दूसरे को स्थूल एक ही तत्व की व्याख्या कहा जाए तो कुछ अत्युक्ति न होगी।

Comments