प्रतिभागियों के व्यक्तित्व का समग्र विकास होता है संगीत कार्यशाला में: डाॅ० गणेश पाठक
नाद प्रवाह के अंतर्गत ग्रीष्मकालीन उप शास्त्रीय गायन कार्यशाला का आयोजन
बलिया। उत्तर -प्रदेश संगीत अकादमी, लखनऊ ( संस्कृति विभाग, उ० प्र०) एवं डाॅ० पारस नाथ उपाध्याय समिति न्यास के संयुक्त तत्वावधान में एक माह के लिए आयोजित 'समर कैम्प संगीत कार्यशाला' में प्रतिभागियों को सम्बोधित करते हुए अमरनाथ मिश्र स्नातकोत्तर महाविद्यालय, दूबेछपरा, बलिया के पूर्व प्राचार्य एवं जननायक चन्द्रशेखर विश्वविद्यालय, बलिया के पूर्व शैक्षिक निदेशक डाॅ० गणेश कुमार पाठक ने अपने उद्बोधन में कहा कि समर कैम्प संगीत कार्यशाला में सहभागिता निभाने वाले प्रतिभागियों के व्यक्तित्व का सम्पूर्ण विकास होता है।
कारण कि संगीत एक ऐसी विधा है जिससे व्यक्तित्व का सम्पूर्ण पक्ष प्रभावित होता है। ऐसे कार्यशालाओं में भाग लेने वाले बच्चे में संगीत के विभिन्न माध्यमों से एक तरफ जहां वो उनके अंदर संगीत का समावेश होता है, वहीं दूसरी तरफ उनमें अनुशासन, संस्कार, चरित्र निर्माण, शारीरिक विकास, मनोवैज्ञानिक विकास एवं बौद्धिक विकास का समावेश होता है। इस तरह उनके व्यक्तित्व का समग्र विकास होता है। इस संगीत कार्यशाला के आयोजक/ संयोजक ऐसे व्यक्तित्व के धनी संगीतज्ञ हैं , जो बच्चों के समग्र विकास के लिए पूर्णत: तत्पर रहते हैं तथा न केवल संगीत के माध्यम से, बल्कि उन्हें उन्मुक्त वातावरण प्रदान कर उन में पारंपरिक खेल विधाओं, लोकोक्तियों, कहावतों, लोक गीतों, संस्कार गीतों आदि के माध्यम से प्रतिभागियों के समग्र विकास हेतु सदैव तत्पर रहते हैं।
विनायक सामाजिक महिला सेवा संस्थान की प्रबंधक सुश्री संध्या पाण्डेय ने अपने उद्बोधन में कहा कि संगीत हमारी भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर है। ऐसे कार्यशालाओं से प्रतिभागियों में कला, संस्कृति एवं संस्कार का विकास होता है। इस कार्यशाला में 35 प्रतिभागी सम्मिलित होकर अपने व्यक्तित्व का विकास कर रहे हैं।
कार्यक्रम के आयोजक/ संयोजक डाॅ० अरविंद उपाध्याय एवं समिति के अध्यक्ष जया उपाध्याय द्वारा अतिथियों, प्रशिक्षकों एवं प्रतिभागियों के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया।
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