हम हैं पुजेरी अपने हिंदुस्तान के भारत के संविधान के

मासिक काव्य गोष्ठी में कवियों ने सुनाई अपनी रचना 
रसडा़ (बलिया)। क्षेत्र के कवि साहित्यकारों ने रविवार को मासिक काव्य गोष्ठी का एक आयोजन किया गया। मासिक कवि गोष्ठी आयोजन का उद्देश्य है कि क्षेत्र के युवा लेखक युवा कवि को अपनी लेखनी निखारने का अवसर मिलेगा। उन्हें अपने प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलेगा मासिक काव्य गोष्ठी हर महीने के अंतिम रविवार को की जायेगी। जो निर्धारित स्थान सुनिश्चित की गई है जो गोष्ठी का आयोजन राजधानी मार्ग के एक आवासीय स्थान पर होती रहेगी। 

काव्य गोष्ठी की इस कविता गोष्ठी की अध्यक्षता बलिया से आये फतेहचंद बेचैन ने किया। कविता की सुरजीत करते हुए  शायर अकबर ज्या ने मां की ममता का चित्रण करते हुए सुनाया 'एक पल जो दूर होऊ वो तड़प जाती थी,  मेरे दिल के टुकड़े कहकर सीने से लगा लेती थी। संचालन कर्ता के अगले कड़ी मेहनत कवि  ने अपनी रचना में सुनाया 'वो दिन कितने अच्छे थे,, जब हम दोनो संग रहते थे। सुनाया जिसे साराहा गया। इसी कड़ी मे मुखराम यादव नेमी ने 'हम हैं पुजेरी अपने हिंदुस्तान के भारत के संविधान के। देश भक्ति गीत सुनाई। फिर शौकत वाजदी ने खड़ा होते हैं कहा वह जरूर किसी मासूम का कातिल होगा, जिसे हंसते हुए हमने कम देखा है। 

क्षेत्र के मशहूर व्यंग रचनाकार सुनील कुमार सरदासपुरी ने सामाजिक पीड़ा पर अपनी रचना पेश करते हुए सुनाया कि' देखा दुनिया को तो दुनिया हमें खूब भायी, देख भाई ने भाई की खून बहाई, देखा बहाई खून भाई भाई की खातिर तो बड़ा आश्चर्य हुआ, यहां तो कुछ भले हैं कुछ है कसाई। सुन कर सामाजिक दुर्व्यवस्था पर कड़ा प्रहार किया अगले कड़ी में कवि अध्यक्षता कर रहे बेचैन जी ने राष्ट्रभक्ति की कविता सुनाते हुए गोष्ठी का समापन किया और अंत में कवियों ने मासिक कवि गोष्ठी के सुरजीत  पर एक दूसरे को बधाई देते हुए अगले महीने फिर कवि लोगो की उपस्थित की कामना की।
रिपोर्ट: मोहसिन उर्फ रिंकू 

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