पत्रकारिता एक व्यवसाय हो गया है जो गम्भीर चिंता का विषय: दिग्विजय सिंह

हिन्दी पत्रकारिता दिवस पर हुई विशेष विचार गोष्ठी, पत्रकारो ने रखे अपने विचार 
रसड़ा (बलिया)। आज समाज में पत्रकारिता भटक गया है। पत्रकारिता एक मिशन के बजाय व्यवसायिक होकर रह गया है पत्रकार एक समाज में एक सजग प्रहरि आइना दर्पण होता है जो आइने के तरह  साफ सुथरा समाज में एक मिशन का कार्य समाचार के माध्यम से करता है। समाज के आलावा शासन प्रशासन को अवगत कराते हुए  व समाज में रखते हुए सच्चाई का उजागर करता है और  जिससे जनमानस उस पर भरोसा व  विश्वास करता है निर्भिक पत्रकारिता से समाज  से लेकर शासन प्रशासन को सूचना या लोगो के समस्या को रखते हुए उसे मिशन के तौर पर कार्य करता है।

 उक्त बाते हिन्दी पत्रकारिता दिवस पर पत्रकार मतलूब अहमद ने अपने व्यवसायिक प्रतिष्ठान स्थिति  कार्यालय, पर विचार,  इसके पूर्व मां सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलित व पुष्पांजलि कर हिन्दी पत्रकारिता दिवस पर व्यक्त की। इस अवसर पर पत्रकार श्याम कृष्ण गोयल ने हम पत्रकारिता दिवस क्यों मनाते है इसे मनाने का उद्देश्य क्या है पर प्रकाश डालते हुए कहा कि 200 वर्ष पूर्व  जब देश परतंत्र था तो देश में अंग्रेजी समाचार पत्र था जिसे हिन्द वासियो हिन्दी भाषी लोग अंग्रेज सरकार की नीतियो उनके भाषा समझ नही पाते जिसे 30 मई जुगत किशोर मिश्रा ने उतंड मार्तंड एक हिन्दी  समाचार पत्र अखबार का बंगाल से  प्रकाशित किया जो राष्ट्र् की चेतना को जागृत करना देश के लोगों को जागृत करना और अंग्रेजों के सत्ता सिसवार करना समाज को स्वतंत्रता के लिए एक मिशन के लिए दिशानिर्देश वाला हिन्दी पत्र था।  सरकार से डाक व्यवस्था के लिए रियायत व प्रसार विस्तार के लिए  प्रस्ताव रखा लेकिन अंग्रेज़ो  ने सुविधा नही दिया जिससे प्रकाशन सिमित रहा कम लोगो तक ही पहुँच पाता था देश में सभी लोगों तक पहुंचाने में परेशानियां होती थी  लेकिन देश को स्वतंत्रता दिलाने में एक मिशन बनाकर अखबार को बढ़ाया गया और हमारा देश स्वतंत्र भी हुआ जिसे हम देश भर में 30 मई को हिन्दी पत्रकारिता दिवस मनाते है।

 इस दिवस पर पत्रकार दिग्विजय सिंह ने कहा आज पत्रकारिता मे ह्रास आई है पत्रकारिता व्यवसाय बन गया है लेकिन हम  इस मिशन को हम सब एक  होकर पुरा करते हुए आयाम देगें और मिशन को करते  रहेगें आज समाज में मोबाइल के सोशल  मीडिया के फेस बुक यूटूब वाट्स एप तथा  इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के चलते प्रिन्ट मीडिया का ह्रास हुआ है लेकिन  हम लिखने से अपने लेखनी से इस  मिशन को असफल नही होने देगें। समाज के किसी व्यक्ति को या किसी पत्रकार पर समाचार पत्र प्रकाशित कराने में  अवरोध पैदा करता है या उसे बाधा डालता है या हमला करता है हम सब एक होकर हम समाज को एक आइना दर्पण समाज में रखते हुए उसे हम आगे बढ़ायेगें जिससे समाज जागरूक होगा  शासन प्रशासन के सामने रखेगें जिसे इस  पर शासन प्रशासन को  ध्यान देना पड़ेगा और हम अपने मिशन में सफल होगें तभी हम इस मिशन मेंहिन्दी पत्रकारिता दिवस मनाने का सही उद्देश्य होगा। हिन्दी पत्रकारिता दिवस पर अन्य वक्ताओ ने हिन्दी पत्रकारिता दिवस पर अपना अपना  विचार रखा । 

इस अवसर पर इश्तियाक अहमद,  दिग्विजय सिंह, ओमप्रकाश वर्मा,  गोपाल जी गुप्ता, सन्तोष सिंह, कृष्णा शर्मा, मतलूब अहमद, अखिलेश सैनी, हरिन्द्र वर्मा, सुनील सरदासपुरी, शाहिद अहमद, संजय शर्मा,  लल्लन बागी, आरिफ अहमद, भगवान पाण्डेय, शैलेन्द्र सिंह आदि पत्रकार उपस्थित रहे। अध्यक्षता मतलूब अहमद और संचालन श्याम कृष्ण गोयल ने किया।
रिपोर्ट: लल्लन बागी

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