देश की आज़ादी में आर्य वीरों ने दी अमूल्य कुर्बानी: आचार्य ज्ञान प्रकाश वैदिक

आर्य वीर चरित्र निर्माण शिविर का समापन समारोह संपन्न
बलिया। आर्य वीर दल पूर्वी उत्तर प्रदेश एवं आर्य वीर दल बलिया के तत्वावधान में आयोजित आर्य वीर चरित्र निर्माण शिविर का समापन समारोह गणतंत्र दिवस एवं आर्य वीर दल स्थापना दिवस के अवसर पर प्राथमिक विद्यालय शेरवां कलां के गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। 

कार्यक्रम की अध्यक्षता आचार्य ज्ञान प्रकाश वैदिक (प्रांतीय संचालक आर्य वीर दल पूर्वी उत्तर प्रदेश) ने की। इस कार्यक्रम में सात दिवसीय प्रशिक्षण में पूर्व माध्यमिक विद्यालय शेरवां कलां के प्रांगण में बच्चों को सर्वांग सुन्दर व्यायाम, डम्बल, लेजियम, लाठी, भाला व गोल चक्र संचलन का प्रशिक्षण दिया गया साथ बच्चों को भारत के पुरातन संस्कृति से साक्षात्कार कराकर बच्चों को आर्यवीर व वीरांगना बनने हेतु प्रेरित किया गया। 

अपने अध्यक्षीय संबोधन में आचार्य ज्ञान प्रकाश वैदिक ने कहा कि राष्ट्र की एकता, अखंडता और संप्रभुता की रक्षा के लिए आर्य वीर दल ने ऐसे वीरों को जन्म दिया, जिन्होंने भारत माता को गुलामी की जंजीरों से मुक्त कराने हेतु अपना सर्वस्व न्यौछावर कर दिया। उन्होंने कहा कि श्यामजी कृष्ण वर्मा, पंडित रामप्रसाद बिस्मिल, लाला लाजपत राय, चंद्रशेखर आज़ाद, उधम सिंह और भगत सिंह जैसे महान क्रांतिकारी उसी वैदिक राष्ट्रभक्ति की भट्टी में तपकर तैयार हुए, जिसकी प्रेरणा आर्य समाज और आर्य वीर दल ने दी। इन्हीं वीरों के बलिदान के कारण आज हम स्वतंत्र भारत में सांस ले पा रहे हैं।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि- श्री कमला सिंह आर्य ने कहा कि आर्य वीर दल, आर्य समाज का सशक्त युवा संगठन है, जो राष्ट्र सेवा और संस्कृति रक्षा के लिए सदैव तत्पर रहता है। राष्ट्र पर आने वाली किसी भी विपत्ति के समय यह संगठन सैनिक की भांति आगे खड़ा होकर सेवा करता है।

कार्यक्रम के संयोजक राजेश आर्य ने बताया कि चरित्र निर्माण शिविरों का उद्देश्य युवाओं में संयम, अनुशासन, राष्ट्रभक्ति और नैतिक मूल्यों का विकास करना है। उन्होंने चिंता व्यक्त की कि आज का युवा नशा, व्यसन और सामाजिक बुराइयों की ओर आकर्षित हो रहा है, ऐसे में आर्य वीर दल का दायित्व है कि उन्हें सही मार्गदर्शन प्रदान किया जाए। इसी उद्देश्य से संगठन द्वारा निरंतर राष्ट्र रक्षा, संस्कृति रक्षा एवं शक्ति संचय के कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता आचार्य अरुण प्रसाद ने कहा कि महर्षि दयानंद सरस्वती द्वारा प्रज्वलित वैदिक चेतना का दीपक ‘आर्य समाज’ के रूप में आगे बढ़ा, जिसने देश और समाज की उन्नति के लिए बहुआयामी कार्य किए। उन्होंने बताया कि रूढ़िवादी कुप्रथाओं का उन्मूलन, स्त्री शिक्षा का प्रसार, दलितोद्धार तथा सामाजिक सुधार के अनेक ऐतिहासिक कार्य आर्य समाज के माध्यम से संपन्न हुए।

इस अवसर पर गौरव आर्य, चंद्रभूषण प्रजापति, शंकर कुमार रावत, दिलीप कुमार, विवेक आर्य सागर, अनुज आर्य, राधा आर्या, शालू आर्या, विपिन आर्य, सोनम आर्य, ब्रजकिशोर आर्य, शुभम आर्य, ओम भारद्वाज, गंगा आर्य , शुभम आर्य (कठौरी), विश्वास आर्य, सुदर्शन सिंह आर्य, आनंद आर्य सहित बड़ी संख्या में आर्य वीर एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान एवं वैदिक मंत्रोच्चार के साथ किया गया।

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