उच्चतम न्यायालय स्थापना दिवस पर विशेष प्रस्तुति

अदालतों की भाषा हिन्दी,आम आदमी तक न्याय की पहुॅच को बनाया जाय सरल व सुगम
भारत का उच्चतम न्यायालय, भारत का सर्वोच्च न्यायिक निकाय है और भारतीय संविधान के तहत भारत गणराज्य का सर्वोच्च न्यायालय है।

भारत के उच्चतम न्यायालय (भारतीय उच्चतम न्यायालय, सर्वोच्च न्यायालय) की स्थापना 26 जनवरी 1950 को अनुच्छेद-124 के तहत की गयी थी जो भारत के संप्रभु, लोकतांत्रित, गणराज्य बनने के दो दिन बाद जिसका उद्घाटन तत्कालीन राष्ट्रपति डाॅ0 राजेन्द्र प्रसाद ने 28 जनवरी 1950 को किया था। यह नई दिल्ली स्थित संसद भवन के नरेन्द्र मण्डल अर्थात चेम्बर ऑफ प्रिंसेस से कार्य प्रारम्भ किया था, इसके प्रथम मुख्य न्यायाधीश हीरा लाल जे0 कानिया ने पदभार ग्रहण किया, तब से न्यायालय ने कार्य करना प्रारम्भ किया, जिसने फेडरल कोर्ट (संघीय न्यायालय) और प्रीवी काउसिंल की समिति का स्थान लिया।

                   प्रोफेसर सन्तोष प्रसाद गुप्त
इसके पास न्यायिक पुनरावलोकन (जो अमेरिका से लिया गया है) की शक्ति है। भारत का मुख्य न्यायाधीश सर्वोच्च न्यायालय का प्रमुख और मुख्य न्यायाधीश होता है जिसमें अधिकतम 34 न्यायाधीश होते है और इसके पास मूल, अपीलीय और सलाहकार क्षेत्राधिकार के रूप में व्यापक शक्तियां होती है। भारत के 53वें वर्तमान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकान्त हैं। उन्होंने 24 नवम्बर 2025 को भारत के 53वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ली है। यह राज्यों में उच्च न्यायालय तथा जनपद न्यायालयों को आवश्यक दिशा निर्देश देता है।

श्री मुरली मनोहर टाउन पी0जी0 कालेज, बलिया, अर्थशास्त्र -विभागध्यक्ष, प्रोफेसर सन्तोष प्रसाद गुप्त ने बताया कि चूंकि उच्चतम् न्यायालय की भाषा अंग्रेजी है परन्तु ‘संघर्ष के दौर में राष्ट्रभाषा हिन्दी’ पुस्तिका तथा ‘अथ् श्रीराम कथा-अच्छे मतदाता बनो’ इत्यादि। इसके हिन्दी होने की दावा प्रस्तुत करती है जिसके लिए शासन -प्रशासन के स्तर पर प्रयास किये जा रहे है। उन्होंने केन्द्रीय सूचना आयोग, नई दिल्ली के प्रपत्र अपील सं0-सी.आई.सी./सीसी/ए/2015/001809 दिनांक 15.03.2016 के माध्यम से कहा गया है कि डिमार्टमेंट आफ पोस्ट की हिन्दी भारतीय डाक विभाग हो सकती है तो सुप्रीम कोर्ट ऑफ इण्डिया की हिन्दी भारतवर्ष का उच्चतम न्यायालय या उच्चतम् न्यायालय भारतवर्ष क्यों नहीं। 

अन्य शब्दों में उच्चतम न्यायालय, भारतवर्ष, नई दिल्ली किया जाना उचित प्रतीत होता है, साथ ही देश भारत का नाम भारतवर्ष किया जाना सही है क्योंकि भारत सिर्फ देश नहीं बल्कि एक राष्ट्र भी है जिसे कई नामों से जाना व पहचाना जाता है जैसे-इंडिया, आर्यावर्त, जम्बूद्वीप, अजनाभवर्ष, हिमवर्ष, भारतखण्ड, हिन्दुस्तान, भारतवर्ष इत्यादि। उक्त की सुनवाई करते हुए तत्कालीन केन्द्रीय सूचना आयुक्त राधा कृष्ण माथुर ने दिनांक 15.03.2016 को कहा कि उच्चतम् न्यायालय की भाषा भी हिन्दी होना चाहिए और न्याय की पहुॅच को आम आदमी तक सरल व सुगम बनाया जाना चाहिए। शुभकामनाओं सहित जय हिन्द, जय भारत।

                            प्रोफेसर सन्तोष प्रसाद गुप्त
                         विभागाध्यक्ष-अर्थशास्त्र विभाग
                   श्री मुरली मनोहर टाउन पी0जी0 कालेज                                        बलिया (उ0प्र0)
                     मो0- 9450286159, 9450777079

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