30 जनवरी जयशंकर प्रसाद जयंती के अवसर विशेष प्रस्तुति

जयशंकर प्रसाद, महात्मा गांधी व मंगल पाण्डेयः तुलनात्मक अध्ययन
जयशंकर प्रसाद, महात्मा गांधी और मंगल पाण्डेय भारतीय इतिहास और संस्कृति के तीन अलग-अलग स्तम्भ हैं जिन्होंने अलग-अलग क्षेत्रों (साहित्य, अहिंसक आन्दोलन और सशक्त क्रांति) में रहकर भारत की स्वतंत्रता और अस्मिता के लिए योगदान दिया। प्रसाद ने सांस्कृतिक चेतना जगाई, गांधी ने अहिंसक आन्दोलन का नेतृत्व किया और मंगल पाण्डेय ने पहले विद्रोह की चिंगारी भड़काई। तीनों ने भारत की स्वतंत्रता में अपनी अनूठी भूमिका निभाई।

जयशंकर प्रसाद- 
जयशंकर प्रसाद का जन्म 30 जनवरी 1889 कोे वाराणसी में सुघनी साहु के परिवार में हुआ था। वे छायावादी युग के प्रमुख कवि, नाटककार और कहानीकार थे। इन्होंने

 ‘कामायनी’, स्कन्दगुप्त, ध्रुवस्वामिनी और चन्द्रगुप्त जैसे नाटकों व उपन्यासों के माध्यम से भारतीय संस्कृति, गौरव और राष्ट्रीयता की भावना को पुनर्जीवित किया। उन्होंने अपनी प्रसिद्ध काव्यउक्ति ‘नारी तुम केवल श्रद्धा हो’ कहकर नारी वैभव को उच्च स्थान प्रदान किया। प्रसाद जी प्राचीन वैभव को याद दिलाकर औपनिवेशिक दासता से मुक्ति के लिए साहित्य के स्तर पर आत्म विश्वास भरने का कार्य किया।

महात्मा गांधी-

(‘शहीद दिवस 30 जनवरी 1948’)- महात्मा गांधी का जन्म 02 अक्टुबर 1869 को गुजरात के पोरबन्दर में हुआ था। इनके बचपन का नाम मोनिया था। ये भारतीय स्वतंत्रता

 संग्राम के नेता, जिन्होंने सत्य और अहिंसा के मार्ग पर चलकर ब्रिटिश शासन के खिलाफ असहयोग आन्दोलन, सविनय अवज्ञा आन्दोलन, अंग्रेजों ‘भारत छोड़ो’ आन्दोलन, करो या मरो का नारा जैसे बड़े आन्दोलनों का नेतृत्व किया। जिसमें आम जनता, किसानों, मजदूरों और महिलाओं को शामिल किया। वे नैतिक बल को शारिरिक बल से श्रेष्ठ मानते थे। वे अहिंसात्मक प्रतिरोध के माध्यम से सच्ची स्वतंत्रता प्राप्त करना चाहते थे जिसमें नैतिक बल को श्रेष्ठ माना जाता था। गांधी जी का दृष्टिकोण सत्य और अहिंसा सत्याग्रह पर आधारित था।

मंगल पाण्डेय- (शहादत दिवस 08 अप्रैल 1857) 
मंगल पाण्डेय का जन्म 30 जनवरी 1831 को भारत में उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में नगवा गांव (तत्कालीन गाजीपुर) में एक ब्राम्हण परिवार में हुआ था जिनके पिता का नाम

 दिवाकर पाण्डेय था। मंगल पाण्डेय एक भारतीय स्वतंत्रता सेनानी थे जिन्होंने 1857 में भारत के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। वे ईस्ट इण्डिया कम्पनी में बंगाल के 34वीं इन्फेन्ट्री के सिपाही थे। इन्होंने 29 मार्च 1857 को ब्रिटिश अधिकारियों पर हमला किया था। मंगल पाण्डेय का प्रसिद्ध नारा था ‘मारो फिरंगी को’। फिरंगी शब्द का प्रयोग अंग्रेजो के लिए किया जाता था और यह नारा भारत की आजादी की लड़ाई का प्रतीक बना। फलस्वरूप ईस्ट इण्डिया कम्पनी का विघटन हुआ और 1858 के भारत सरकार अधिनियम के माध्यम से ब्रिटिश राज की शुरूआत हुई। मंगल पाण्डेय ने भारतीयों के मन में देशभक्ति और अंग्रेजों के खिलाफ लड़ने की इच्छा को मजबूत किया। वे प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के प्रथम क्रांतिकारी शहीद थे जिन्होंने दमनकारी शासन के खिलाफ सीधे संघर्ष व बलिदान का रास्त चुना।

ये तीनों व्यक्ति भारत की स्वतंत्रता के लिए विभिन्न चरणों (सांस्कृतिक पुनर्जागरण, सशक्त शुरूआत और अहिसंक जन आन्दोलनों को दर्शात हैं।) श्री मुरली मनोहर टाउन पी0जी0 कालेज, अर्थशास्त्र विभागाध्यक्ष, प्रोफेसर सन्तोष प्रसाद गुप्त ने बताया कि जयशंकर प्रसाद (साहित्यकार) महात्मा गांधी (अहिंसक स्वतंत्रता सेनानी) और मंगल पाण्डेय (1857 के क्रांतिकारी) ये तीनों व्यक्तित्व भारतीय इतिहास और संस्कृति के अलग-अलग स्तम्भ है।

 प्रसाद ने जहां अतीत के गौरव के माध्यम से वर्तमान को जगाया हैं, वहीं गांधी जी वर्तमान में अहिंसक संघर्ष को अपनाया, जबकि मंगल पाण्डेय तत्कालिक हिंसक प्रतिकार द्वारा इतिहास की धारा को बदलते हैं। तीनों का योगदान अपने-अपने तरीके से अद्वितीय तथा महत्वपूर्ण है, जिन्होंने भारत की स्वतंतत्रा मे अपनी अनूठी भूमिका निभाई। यह हम सभी के लिए प्रेरणादायी सीख प्रदान करते हैं।

शुभकामनाओं सहित ! 
जय हिन्द, जय भारत !

                                  
                  प्रोफेसर सन्तोष प्रसाद गुप्त
                विभागाध्यक्ष अर्थशास्त्र विभाग
        श्री मुरली मनोहर टाउन पी0जी0 कालेज, 
                         बलिया (उ0प्र0)
                   मो0नं0- 9450286159
                                9450777079

Comments

Popular posts from this blog

विज्ञान मॉडल प्रतियोगिता के विजेता बच्चे मंडल स्तर पर करेंगे प्रतिभाग

ओजोन परत संरक्षण दिवस, 16 सितम्बर पर विशेष-

खेल दिवस पर राजकीय महाविद्यालय नगवा में कबड्डी प्रतियोगिता का हुआ आयोजन