सात सूत्रीय अनुमोदित डिमाण्ड को लेकर सीडीओ से मिला कबीरम् समाज
वार्ता के दौरान मिला आश्वासन
बलिया। बलिया के मालवीय मुरली बाबू के बचपन के साथी श्रीरामजी ठाकुर वरिष्ठ अधिवक्ता के नेतृत्व में कबीरम् समाज- बलिया आठ मई दिन शुक्रवार को विकास भवन, बलिया पहुंच कर मुख्य विकास अधिकारी ओजस्वी राज से भेंट किया।
वरिष्ठ अधिवक्ता व समाजसेवी श्रीरामजी ठाकुर ने भारत के प्रधानमंत्री माननीय श्री नरेन्द्र मोदी जी के नाम सम्बोधित प्रपत्र जनसूनवाई सं0- 20019326003494 इत्यादि का हवाला देते हुए कहा कि मा0 श्रीयुत जिलाधिकारी- बलिया ने आपको सात सुत्रीय अनुमोदित डिमाण्ड के सन्दर्भ में यथाशीघ्र जांच/आख्या रिपोर्ट प्रस्तुत करने को आदेशित की है। अतः आप कार्यवाही करने की कृपा करें। यह भी कहा कि सात सुत्रीय अनुमोदित डिमाण्ड का कई बार अनुमोदन किया जा चुका हैं। अब कोई भी शिकायत नहीं रह गई है। सारे मामलों का निपटारा किया जा चुका है। अब सिर्फ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी द्वारा औपचारिक घोषण किया जाना शेष रह गया है। अतः आप सात सुत्रीय अनुमोदित डिमाण्ड की जांच/आख्या रिपोर्ट जल्द से जल्द प्रस्तुत कर शासन/प्रशासन को भेजने का कष्ट करें।
सात सुत्रीय अनुमोदित डिमाण्ड का विवरण इस प्रकार है। जैसे-
1. 19 अगस्त बलिया बलिदान दिवस को राष्ट्रीय मान्यता प्रदान किया जाय।
2. पुरानी पेंशन योजना पुनः बहाल किया जाय।
3. नई पेंशन योजना रद्द किया जाय। यू0पी0एस0 रद्द किया जाय।
4. कार्मिकों का स्थायीकरण तथा विनियमितीकरण किया जाय।
5. शोध छात्रों को शोध अध्येत्तावृत्ति रू0-25000/- प्रतिमाह प्रदान किया जाय।
6. आधार कार्ड की अनिवार्यता व बाध्यता समाप्त किया जाय।
7. मुरली मनोहर के नाम पर केन्द्रीय विश्वविद्यालय स्थापित किया जाय इत्यादि।
वार्ता के दौरान अखिल भारतीय विश्वविद्यालय सम्बद्ध महाविद्यालय शिक्षक संघ (ए0आई0एफ0यू0 सी0टी0ओ0) के आजीवन सदस्य व संरक्षक तथा टी0डी0 काॅलेज अर्थशास्त्र विभागाध्यक्ष प्रो0 सन्तोष प्रसाद गुप्त ने जन कवि जगदीश ओझा ‘‘सुन्दर’’ की कविता ‘‘अंग्रेजों’’ भारत छोड़ों के नारे की बलिया इक अमिट निशानी है।’’ रखते हुए कहा कि महात्मा गांधी ने अंग्रेजो भारत छोड़ो आन्दोलन 1942 के दौरान 18 अगस्त 1942 को बैरिया मे दर्जनों क्रांतिकारी शहीद हो गये, जिसके जनाक्रोश के कारण तत्कालीन जिलाधिकारी जगदीश्वर निगम (जे0निगम) ने जिला कारागार बलिया पहुंचकर जेल का फाटक खोल दिया। चित्तू पाण्डेय सहित सभी सेनानी बंदियों को रिहा कर दी। इस प्रकार 19 अगस्त 1942 को बलिया सर्वप्रथम अंग्रेजी दासता से मुक्त हो गया। 14 दिन की पहली प्रजातांत्रिक सरकार बनी थी। शेरे बलिया चित्तू पाण्डेय पहले जिलाधिकारी बने थे। पंडित महानन्द मिश्र पुलिस कप्तान तथा जानकी-मानकी देवी जिला न्यायाधीश बनी थी। इस तरह 19 अगस्त, 1942 को बलिया आजाद हो गया। अतः 19 अगस्त बलिया बलिदान दिवस को विजय दिवस तथा शौर्य दिवस के रूप में सार्वजनिक एवं एकेडेमिक अवकाश घोषित कर राष्ट्रीय मान्यता प्रदान किया जाना चाहिए जो वाजिब व जायज है। अतः सभी डिमाण्ड पूर्ण करने की कृपा करें।
इसी क्रम में टी0डी0 काॅलेज के पर्वू नाट्यमंत्री जाकिर हुसैन ने कहा कि वे प्रत्येक वर्ष 26 जनवरी गणतंत्र दिवस के अवसर पर पुलिस परेड ग्राउण्ड में मंच का संचालन करते आ रहे हैं। वर्तमान परिवहन मंत्री माननीय दयाशंकर सिंह जी ने उन्हे मोमेन्टो देकर सम्मानित किया है। यदि सभी सात सुत्रीय अनुमोदित डिमाण्ड पूर्ण होते है तो जिले का नाम प्रदेश व देश स्तर पर रौशन होगा। क्रांतिकारी निर्दल मोर्चा के संगठन मंत्री श्री सीताराम जी ने कहा कि सभी डिमाण्ड के पूर्ण होने से छात्र, नौजवान ही नहीं बल्कि आमजन भी लाभान्वित होंगे।
भेंट व वार्ता के दौरान मुख्य विकास अधिकारी श्री ओजस्वी राज ने सभी सात सूत्रीय अनुमोदित डिमाण्ड की जांच/आख्या रिपोर्ट शासन/प्रशासन स्तर पर यथाशीघ्र भेजने तथा क्रियान्वयन हेतु आश्वासन प्रदान किया। उक्त अवसर पर वरिष्ठ अधिवक्ता व समाजसेवी श्रीरामजी ठाकुर सहित प्रो0 सन्तोष प्रसाद गुप्त, सीताराम जी, कामेरड तेजनारायन, शिवाजी, समाजसेवी घुराराम, जाकिर हुसैन, नन्दू जी पासवान, बब्बन यादव, डाॅ0 फतेहचन्द बेचैन, डाॅ0 प्रदीप कुमार श्रीवास्तव, एड0 कृष्ण कुमार चैरसिया इत्यादि उपस्थित रहे।
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