कबीरम् समाज ने मनाई गुरूदेव रवींद्रनाथ टैगोर की जयंन्ती

प्रबुद्ध जनों ने दी पुष्पांजलि, हुई व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर चर्चा
बलिया। शहर के श्रीराम विहार काॅलोनी स्थित मिश्रा कुँज (श्रीमती सुमन मिश्रा पत्नी श्री अरविन्द मिश्र) में प्रो0 सन्तोष प्रसाद गुप्त के सहयोग से कबीरम् समाज-बलिया तथा अखिल भारतीय विश्वविद्यालय सम्बद्ध महाविद्यालय शिक्षक संघ (ए0आई0एफ0यू0सी0टी0ओ0) के संयुक्त तत्वावधान में 7 मई  दिन गुरुवार को गुरूदेव रवींद्रनाथ टैगोर की जयंती मनाई गयी। उक्त कार्यक्रम की अध्यक्षता का0 तेजनारायण जी ने की। 

उक्त अवसर पर टी0डी0 काॅलेज, अर्थशास्त्र विभागाध्यक्ष प्रो0 सन्तोष प्रसाद गुप्त ने कहा कि गुरूदेव रवींद्रनाथ टैगोर का जन्म 07 मई 1861 को कोलकाता के जोड़ासांको, ठाकुरबाड़ी (बंगाल प्रेसीडेंसी, ब्रिटिश भारत) में हुआ था जिनका मूल नाम रवींद्रनाथ ठाकुर था। पिता का नाम महर्षि देवेन्द्र नाथ टैगोर एवं माँ का नाम शारदा देवी तथा इनके पत्नी का नाम मृणालिनी देवी (01 मार्च 1874-23 नवम्बर 1902) था। इनकी पांच संतानें जिसमें दो बाल्यावस्था में ही निधन हो गया। गुरूदेव रवींद्रनाथ टैगोर बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे। उन्होंने यूनिवर्सिटी काॅलेज ऑफ लन्दन से वकालत की उपाधि प्राप्त की थी। वे बंगाली कवि, उपन्यासकार, नाटककार, दार्शनिक थे। 1913 में गीतांजली क लिए साहित्य का नोबेल पुरस्कार मिला जो एशिया महाद्वीप के पहले सम्मान प्राप्त करने वाले व्यक्ति थे। वे भारत तथा बंाग्लादेश दो राष्ट्रों के राष्ट्रगान के रचयिता हैं। उन्होंने भारत का राष्ट्रगान ‘‘जन-गण-मन’’ और बांग्लादेश का राष्ट्रीयगान ‘‘आमार-सोनार-बांग्ला’’ की रचना की। रवींद्रनाथ टैगोर ने शान्ति निकेतन में विश्व-भारती विश्वविद्यालय की स्थापना की जो शिक्षा देेने की एक अनूठा केन्द्र के रूप में जाना जाता है। महात्मा गंाधी ने उन्हें गुरूदेव कहकर नवाजा था। 

रवींद्रनाथ टैगोर का साहित्य, मानवीय सोच, आधुनिकता आज भी सभी के लिए प्रेरणा प्रदान करता है। युवा पीढ़ी को उनसे सीख लेना चाहिए। आगे शासन/प्रशासन के विविध प्रपत्रों/दस्तावेजों/रिपोर्ट इत्यादि का अवलोकन किया गया। जैसे-19 अगस्त बलिया बलिदान दिवस को विजय दिवस तथा शौर्य दिवस के रूप में सार्वजनिक तथा एकेडेमिक अवकाश घोषित किया जाय। कार्मिकों का स्थायीकरण एवं विनियमितीकरण किया जाय। पुरानी पेंशन योजना पुनः बहाल किया जाय। नई पेंशन योजना रद्द किया जाय। यू0पी0एस0 रद्द किया जाय। शोध छात्रों को शोध अध्येत्तावृत्ति रू0-25000/- (पच्चीस हजार रू0) प्रतिमाह प्रदान किया जाय। आधार कार्ड की अनिवार्यता व बाध्यता समाप्त किया जाय। मुरली मनोहर के नाम पर केन्द्रीय विश्वविद्यालय स्थापित किया जाय इत्यादि। अवलोकन के दौरान कहा गया कि उपरोक्त सभी डिमाण्ड व सुझाव केन्द्र सरकार/राज्य सरकार/स्थानीय सरकारों द्वारा पूर्ण किये जाने हेतु व्यापक स्तर पर प्रयास किया जा रहा है। जल्द ही पूर्ण किये जाने की घोषण की जा सकती है। सभी से सहयोग की अपील की गयी। अंत में भारत का राष्ट्रगान जन-गण-मन गान कर सभा का समापन किया गया। 

उक्त अवसर पर सीताराम, का0 तेजनारायण जी, समाजसेवी श्रीरामजी ठाकुर (वरिष्ठ अधिवक्ता), समाजसेवी घुराराम, नित्या बचन राम, श्री कृष्ण कुमार चैरसिया (सहायक अधिवक्ता), प्रभाकर प्रवीण, जाकिर हुसैन इत्यादि उपस्थित रहे। अंत में अखिल भारतीय विश्वविद्यालय सम्बद्ध महाविद्यालय शिक्षक संघ के आजीवन सदस्य व संरक्षक प्रो0 सन्तोष प्रसाद गुप्त ने सभी के प्रति आभार व्यक्त की।

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