20 अप्रैल को भी जारी रहा गोंड समुदाय का धरना
अपनी मांग को लेकर बांसडीह तहसील पर गोंड समुदाय का धरना चल रहा
बांसडीह (बलिया)। भारत के राजपत्र संविधान अनुसूचित जनजाति आदेश संशोधन अधिनियम-2002 द्वारा बलिया जिले में निवास करने वाली गोंड जाति को अनुसूचित जनजाति के रूप में मान्यता दी गयी है। इसी क्रम में प्रमुख सचिव उत्तर प्रदेश शासन समाज कल्याण अनुभाग-3 लखनऊ शासनादेश 3 नवम्बर 2021 द्वारा गोंड जाति को अनुसूचित जनजाति का प्रमाण पत्र जारी करने हेतु स्पष्ट दिशा निर्देश दिया गया है, उक्त दिशा-निर्देश का अक्षरशः कड़ाई से अनुपालन कराने, गोंड अनुसूचित जनजाति का प्रमाण पत्र सुगमता पूर्वक जारी कराने की मांग को लेकर गोंड समुदाय का बांसडीह तहसील पर चल रहा अनिश्चित कालीन धरना 20 अप्रैल 2026 को भी जारी रहा।
गोंड नेताओं ने कहा कि बांसडीह तहसीलदार भारत के राष्ट्रपतीय राजपत्र संविधान शासनादेश की घोर अवमानना कर रहे हैं। गोंड अनुसूचित जनजाति प्रमाण पत्र बनवाने हेतु ऑनलाइन आवेदन करने पर आवेदन बार-बार अस्वीकृत निरस्त कर दे रहे हैं। बांसडीह तहसीलदार गोंड समुदाय का उत्पीड़न कर रहे हैं।
धरना में प्रमुख रूप से उमाशंकर गोंड, सत्यम गोंड, राजेश कुमार गोंड, नवनीत कुमार गोंड, तुलसी राम गोंड, बलिराम गोंड, मुकेश कुमार गोंड, सुजीत प्रसाद, छट्ठू गोंड, हीरालाल गोंड, रामअवध गोंड, सोनू कुमार गोंड, सुशील गोंड, रवि कुमार गोंड, शिवसागर गोंड, खड़क बहादुर गोंड रहे।
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