शाखा के वर्षभर के सतत् साधना एवं कार्यों का सजीव प्रदर्शन है वार्षिकोत्सव: संजय शुक्ल
बाल्मीकि शाखा का वार्षिकोत्सव हर्षोल्लास के साथ हुआ संपन्न
बलिया। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, बलिया नगर द्वारा 12 अप्रैल दिन रविवार को प्रातः 06:30 बजे मण्डी समिति परिसर, परिखरा में लगने वाली बाल्मीकि शाखा का वार्षिकोत्सव अत्यंत हर्षोल्लास एवं उत्साहपूर्ण वातावरण में सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर उपस्थित स्वयंसेवकों ने पूर्ण गणवेश में शाखा के नियमित कार्यक्रमों योग, व्यायाम, आसन, खेल एवं समता का अनुशासित एवं प्रभावशाली प्रदर्शन कर उपस्थित जनसमूह को अभिभूत किया।
कार्यक्रम में मंच पर सह जिला संघचालक डॉ. विनोद सिंह तथा मुख्य वक्ता गोरक्षप्रान्त के प्रान्त संयोजक श्री संजय शुक्ल जी की गरिमामयी उपस्थिति रही। अपने प्रेरक उद्बोधन में मुख्य वक्ता ने कहा कि संघ का शताब्दी वर्ष चल रहा है। संघ के शताब्दी वर्ष में विभिन्न कार्यक्रमों के साथ साथ बलिया नगर की शाखाएं अपना परंपरागत शाखा का वार्षिकोत्सव मना रहा है। शाखा का वार्षिकोत्सव केवल एक आयोजन नहीं, अपितु शाखा के वर्षभर के सतत् साधना एवं कार्यों का सजीव प्रदर्शन है। यह आत्ममंथन का भी अवसर होता है “हम संघ में आते हैं, पर क्या संघ हमारे भीतर उतर रहा है?” संघ का उद्देश्य केवल शाखा में उपस्थिति भर नहीं, बल्कि व्यक्ति के चरित्र, विचार और व्यवहार में सकारात्मक परिवर्तन लाना है। शाखा के माध्यम से संघ निरंतर व्यक्ति निर्माण का कार्य करता है, जिससे सशक्त समाज और राष्ट्र का निर्माण संभव होता है।
उन्होंने आगे कहा कि परम पूज्य डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार जी ने सन् 1925 में संघ की स्थापना इस उद्देश्य से की थी कि भारत का समाज संगठित, सुसंस्कृत और सशक्त बने। उस समय देश अनेक प्रकार की सामाजिक, सांस्कृतिक और मानसिक दुर्बलताओं से ग्रसित था। डॉ. हेडगेवार जी ने यह अनुभव किया कि राष्ट्र निर्माण का आधार सशक्त और संस्कारित व्यक्ति ही होता है। इसी उद्देश्य से शाखा पद्धति का प्रारम्भ हुआ, जहाँ अनुशासन, राष्ट्रभक्ति, त्याग, समर्पण और संगठन के संस्कारों का विकास किया जाता है। आज भी संघ उसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए लाखों स्वयंसेवकों के माध्यम से समाज जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में सकारात्मक परिवर्तन का कार्य कर रहा है।
सामाजिक समरसता पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि संघ का मूल भाव है समाज में कोई भेदभाव न रहे, सभी एक-दूसरे को समान दृष्टि से देखें। जाति, वर्ग, भाषा या आर्थिक स्थिति के आधार पर समाज में विभाजन न हो, इसके लिए संघ निरंतर प्रयासरत है। विभिन्न उत्सवों, सहभोज, संपर्क कार्यक्रमों एवं सेवा कार्यों के माध्यम से समाज के सभी वर्गों को जोड़ने का कार्य किया जाता है। शाखा में सभी स्वयंसेवक एक साथ बैठकर भोजन करते हैं, खेलते हैं और संवाद करते हैं यही समरसता का सजीव उदाहरण है।
कुटुम्ब प्रबोधन विषय पर उन्होंने कहा कि संघ संयुक्त परिवार व्यवस्था को भारतीय संस्कृति की आत्मा मानता है। कुटुम्ब केवल साथ रहने का माध्यम नहीं, बल्कि संस्कारों की प्रथम पाठशाला है। जब परिवार में दादा-दादी, माता-पिता, चाचा-चाची, भाई-बहन सभी एक साथ रहते हैं, तो अनुभव, स्नेह और मार्गदर्शन की समृद्ध धारा प्रवाहित होती है। एक चूल्हे पर बना भोजन, एक साथ बैठकर भोजन करना, भजन-पूजन एवं पारिवारिक संवाद- ये सभी कुटुम्ब को सुदृढ़ बनाते हैं। संघ का प्रयास है कि परिवारों में आत्मीयता, संवाद और संस्कारों का पुनर्जागरण हो, जिससे समाज सुदृढ़ बने।
पर्यावरण विषय पर उन्होंने कहा कि प्रकृति का संरक्षण केवल दायित्व नहीं, बल्कि हमारा नैतिक कर्तव्य है। हमारे जीवन का प्रत्येक पहलू प्रकृति पर निर्भर है। जल, वायु, भूमि और वनस्पति के बिना जीवन असंभव है। इसलिए हमें केवल वृक्षारोपण तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि जल संरक्षण, स्वच्छता, प्लास्टिक मुक्त जीवन और प्राकृतिक संसाधनों के संतुलित उपयोग को भी अपनाना चाहिए।
साथ ही समाज में जागरूकता फैलाकर अधिक से अधिक लोगों को इस अभियान से जोड़ना भी आवश्यक है। ‘स्व’ के भाव पर उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को अपने स्वत्व, स्वाभिमान और स्वदेशी चेतना को पहचानना चाहिए। जब हम अपने राष्ट्र, संस्कृति, परंपराओं और मूल्यों के प्रति जागरूक होते हैं, तभी सच्चे अर्थों में आत्मनिर्भर और आत्मविश्वासी बनते हैं। ‘स्व’ का जागरण व्यक्ति को अपने कर्तव्यों के प्रति सजग बनाता है और उसे समाज व राष्ट्र के लिए समर्पित जीवन जीने की प्रेरणा देता है।
नागरिक कर्तव्य पर उन्होंने कहा कि एक आदर्श राष्ट्र के निर्माण में प्रत्येक नागरिक की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। हमें अपने कर्तव्यों का निष्ठापूर्वक पालन करना चाहिए- जैसे कानून का पालन, स्वच्छता बनाए रखना, मतदान करना, सामाजिक कार्यों में सहयोग देना और समाज के प्रति संवेदनशील रहना। जब प्रत्येक नागरिक अपने दायित्वों को समझकर उनका पालन करता है, तभी राष्ट्र सशक्त, समृद्ध और अनुशासित बनता है।
इस कार्यक्रम के मुख्य शिक्षक युवराज रहे। प्रार्थना नगर शारीरिक शिक्षण प्रमुख भोला द्वारा तथा एकल गीत अमरेंद्र द्वारा प्रस्तुत किया गया, जिसने वातावरण को अत्यंत भावपूर्ण एवं प्रेरणादायी बना दिया। कार्यक्रम में बाल्मीकि बस्ती एवं शाखा क्षेत्र के अनेक गणमान्य बन्धु-भगिनियों की गरिमामयी उपस्थिति रही, जिन्होंने स्वयंसेवकों का उत्साहवर्धन किया। समापन में संघ प्रार्थना के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।
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