पूर्व प्रधानमंत्री चन्द्रशेखर जी की 100वीं जयंती पर कबीरम समाज ने किया नमन
पुलिस अधीक्षक ओमवीर सिंह को गुलाब का पुष्प गुच्छ देकर कि गई जन्मशताब्दी समारोह की शुरूआत
बलिया। अखिल भारतीय विश्वविद्यालय सम्बद्ध महाविद्यालय शिक्षक संघ (ए0आई0एफ0यू0 सी0टी0ओ0) तथा कबीरम् समाज एवं विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों ने आज दिनांक 17.04.2026 दिन शुक्रवार को 10.30 बजे कार्यालय पुलिस अधीक्षक- बलिया पहुंचकर बलिया के लाल, सादगी एवं सिद्धान्तों के राजनीति के पर्याय पूर्व प्रधानमंत्री चन्द्रशेखर जी की 100वीं जयंती वर्षगाठ पर मा0 पुलिस अधीक्षक श्री ओमवीर सिंह को गुलाब का पुष्प गुच्छ देकर जन्म शताब्दी समारोह/कार्यक्रम की शुरूआत की गयी।
साधुवाद ज्ञापित करते हए सभी के मंगलमय की कामनी की गयी। वरिष्ठ अधिवक्ता श्रीरामजी ठाकुर ने समाजवादी स्वतंत्रता सेनानी डॉ0 राम मनोहर लोहिया के कथन का उद्धरण देते हुए कहा कि ‘‘याद करेंगे लोग मुझे, पर मेरे मरने के बाद’’। चन्द्रशेखर एक कुशल राजनेता के रूप में उसी परम्परा के प्रतिनिधि थे जिनकी स्मृतियों, विचारों तथा योगदान के पुनः स्मरण किये जाने को लेकर देश भर में जन्म शताब्दी वर्ष मनाया जा रहा है। चन्द्रशेखर जी का ही प्रभाव है कि आज की भारतीय राजनीति और समाज के लिए वे उतने ही प्रासंगिक है जितने अपने समय में थे।
अखिल भारतीय विश्वविद्यालय सम्बद्ध महाविद्यालय शिक्षक संघ (ए0आई0एफ0यू0सी0टी0ओ0) के आजीवन सदस्य तथा संरक्षक एवं श्री मुुरली मनोहर टाउन पी0जी0 कॉलेज, बलिया अर्थशास्त्र विभागाध्यक्ष प्रो0 सन्तोष प्रसाद गुप्त ने कहा कि चन्द्रशेखर जी ने 06 जनवरी 1983 को कन्या कुमारी से भारत यात्रा की शुरूआत की थी जो 06 जनवरी 1987 को 05 माह 20 दिन बाद राजघाट दिल्ली में समाप्त हुई। यह भारत यात्रा केवल भौगोलिक नहीं थी बल्कि देश की आत्मा को समझने का एक प्रयास थी। भारत यात्रा ट्रस्टी सूर्य कुमार के दस्तावेजो को रखते हुए कहा कि भारत यात्रा के दौरान कर्नाटक के साथियों के मन मे यह विचार आया कि चन्द्रशेखर जी का जन्मदिन मनाया जाय। जब यह प्रस्ताव चन्द्रशेखर के सामने रखा गया तो उन्होंने सहजता से कहा कि पहले यह तय हो जाना चाहिए कि उनका वास्तविक जन्मदिन कौन सा है। दस्तावेजों से उनकी जन्मतिथ जुलाई माह में दर्ज थी।
उनकी माता के अनुसार उनका जन्म ज्येष्ठ माह की हनुमान जयंती को हुआ था। बाद में गणना के आधार पर 17 अप्रैल 1927 को जन्म तिथि निर्धारित की गयी जो हनुमान जयंती के दिन ही थी। यह ज्यातिषीय गणना तमिलनाडु के सुप्रसिद्ध ज्योतिषी द्वारा तय की गयी थी। इसके बाद कर्नाटक के ऐतिवेलय (बैंगलुर-ग्रामीण) में उनका जन्मदिन बड़े उत्साह के साथ मनाया गया। यही परम्परा आगे चलकर भोड़सी (हरियाणा) स्थित भारत यात्रा केन्द्र में वार्षिकोत्सव के रूप में स्थापित हुई। यह परम्परा उनके निधन 08 जुलाई 2007 के बाद भी जारी रही। पहले राजघाट स्थित ‘‘जननायक स्थल’’ पर फिर उसी में स्मरण तथा संकल्प का सिलसिला चलता रहा।
आगे कलेक्ट्रेट बलिया स्थित कम्पनी बाग के निकट नगर पालिका परिषद बलिया द्वारा संचालित चन्द्रशेखर उद्यान में चन्द्रशेखर जी की कांस्य प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की गयी। तदोपरान्त बसन्तपुर स्थित जननायक चन्द्रशेखर विश्वविद्यालय के जे0पी0 सभागार में आयोजित ‘‘चन्द्रशेखर का व्यक्तित्व एवं कृतित्व’’ विषयक संगोष्ठी में सहभाग किया गया।
कबीरम् समाज में चर्चा/परिचर्चा के दौरान शासन व प्रशासन से प्राप्त विभिन्न दस्तावेजों तथा प्रपत्रों का अवलोकन किया गया। कहा गया कि शासन व प्रशासन के द्वारा व्यापक स्तर पर पूर्ण किये जाने हेतु प्रयास किया जा रहा है। जैसे- पुरानी पेंशन योजना पुनः बहाल किया जाय, नई पेंशन योजना रद्द किया जाय, यू0पी0एस0 रद्द किया जाय, कार्मिकों का स्थायीकरण किया जाय, शोध छात्रों को शोध अध्येत्तावृत्ति रू. -25000/- प्रतिमाह प्रदान किया जाय, सार्वजनिक वितरण प्रणाली को मजबूत किया जाय, मुरली मनोहर के नाम पर केन्द्रीय विश्वविद्यालय स्थापित किया जाय, 19 अगस्त बलिया बलिदान दिवस को विजय दिवस तथा शौर्य दिवस के रूप में सार्वजनिक तथा एकेडेमिक अवकाश घोषित किया जाय, सम्पूर्ण भारतवर्ष में राम राज्य लागू किया जाय इत्यादि।
उक्त अवसर पर पत्रकार सत्यबीर ओझा (मोनिया न्यूज 24 चैनल), सहायक पत्रकार संजय कुमार सिंह, सुरज कुमार सिंह, नरेन्द्र कुमार सिंह, समाजसेवी घूराराम, डॉ0 सन्तोष प्रसाद गुप्त, डॉ0 शैलेश मिश्र, डॉ0 विवेक कुमार साहु, शोध छात्र नवीन कुमार यादव इत्यादि उपस्थित रहे।
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