महापर्व होली पर खान पान में सावधानी जरुरी
मिलावट कानूनी अपराध ही नहीं, बल्कि सामाजिक अपराध भी है: डॉ० रंजना मल्ल
होली भारत का प्रमुख लोकपर्व है, जो रंगों, उमंग और आपसी प्रेम का संदेश देता है। इस अवसर पर मिठाइयों का विशेष महत्व होता है। लोग एक-दूसरे को गुझिया, लड्डू, बर्फी और पेड़ा भेंट कर खुशियाँ साझा करते हैं। परंतु हाल के वर्षों में त्योहारों के समय मिलावटी मिठाइयों की बढ़ती समस्या ने जन-स्वास्थ्य के लिए गंभीर चिंता उत्पन्न कर दी है।
विभागाध्यक्ष, गृहविज्ञान विभाग
जननायक चंद्रशेखर विश्वविद्यालय, बलिया
अधिक मुनाफा कमाने की लालसा में कुछ दुकानदार मिठाइयों में मिलावट कर देते हैं। मिलावटी खोया, नकली घी, कृत्रिम रंग और रसायन मिठाइयों को देखने में आकर्षक तो बनाते हैं, लेकिन वे स्वास्थ्य के लिए अत्यंत हानिकारक होते हैं। ऐसी मिठाइयों के सेवन से पेट दर्द, उल्टी-दस्त, एलर्जी, फूड प्वाइजनिंग तथा दीर्घकालीन बीमारियाँ हो सकती हैं। बच्चों, बुजुर्गों और पहले से बीमार व्यक्तियों के लिए यह खतरा और भी बढ़ जाता है। जिस पर्व का उद्देश्य खुशियाँ बाँटना होता है, वही पर्व यदि बीमारी का कारण बने तो यह समाज के लिए गंभीर संकेत है।इस समस्या के समाधान के लिए जन-जागरूकता सबसे प्रभावी माध्यम है। उपभोक्ताओं को चाहिए कि वे सजग और सतर्क रहें। अत्यधिक चमकदार रंग, असामान्य गंध या बहुत कम कीमत वाली मिठाइयों से सावधान रहना चाहिए। मिठाइयाँ केवल लाइसेंस प्राप्त, स्वच्छ और विश्वसनीय दुकानों से ही खरीदनी चाहिए। खुले में रखी मिठाइयों की स्वच्छता पर विशेष ध्यान देना आवश्यक है। संभव हो तो सीमित मात्रा में ही मिठाइयाँ खरीदें और ताजगी की जांच अवश्य करें।
घर पर बनी मिठाइयाँ मिलावट से बचने का सुरक्षित विकल्प हैं। पारंपरिक तरीकों से शुद्ध सामग्री का उपयोग कर बनाई गई मिठाइयाँ स्वास्थ्य के लिए बेहतर होती हैं और परिवार में अपनत्व की भावना भी बढ़ाती हैं। महिलाओं और युवाओं को शुद्ध एवं सुरक्षित भोजन के प्रति जागरूक करना विशेष रूप से आवश्यक है। प्रशासन और खाद्य सुरक्षा विभाग की भूमिका भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। त्योहारों से पूर्व बाजारों में नियमित जांच, नमूना परीक्षण और दोषी दुकानदारों पर सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। मीडिया और शैक्षणिक संस्थान भी जन- जागरूकता फैलाने में प्रभावी भूमिका निभा सकते हैं।
अंत में, यह कहना उचित होगा कि मिलावट केवल कानूनी अपराध नहीं, बल्कि सामाजिक अपराध भी है। स्वस्थ समाज के निर्माण के लिए शुद्ध भोजन अनिवार्य है। आइए, इस होली पर हम सभी यह संकल्प लें कि मिलावट के विरुद्ध सजग रहेंगे, शुद्ध मिठाइयों का ही सेवन करेंगे और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करेंगे। तभी होली का पर्व वास्तव में स्वस्थ, सुरक्षित और आनंदमय बन पायेगा।
रिपोर्ट: विनय कुमार
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