लोककलाओं के संरक्षण मे बड़ी भूमिका निभाने की ओर बढ़ रहा है बलिया
बलिया। रंग महोत्सव के माध्यम से देश की लोक-संस्कृति, लोककलाओं के संरक्षण मे बड़ी भूमिका निभाने की ओर बलिया बढ़ रहा है। जागरूक शिक्षण प्रशिक्षण सेवा संस्थान के बैनर तले महाराष्ट्र, हिमाचल प्रदेश, पं.बंगाल, झारखंड, असम, उड़ीसा, मणिपुर, उत्तर प्रदेश और दिल्ली सहित 10 राज्यों के रंगकर्मी अपने नाटक और लोकनृत्य का उत्कृष्ट प्रदर्शन 16- 17 और 18 जनवरी को आदर्श वाटिका मे आयोजित बलिया रंग महोत्सव मे प्रतिस्पर्धात्मक प्रस्तुति करेंगे।
आयोजक जागरूक संस्थान के संरक्षक डाॅ.शिवकुमार सिंह कौशिकेय और सचिव अभय सिंह कुशवाहा ने बताया कि अध्यात्म, अवदान, बलिदान की धरती बलिया और लोकनृत्य के कलाकारों की प्रतिभा निखारने के लिए राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता आयोजित की गयी। इसके साथ ही जिले के विभिन्न विद्यालयों के बच्चों की भी प्रतियोगिता होगी। जो बच्चे राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिभाग करना चाहते हैं उन्हें राष्ट्रीय प्रतियोगिता मे भी शामिल किया जायेगा। अभी तक प्रतियोगिता मे देश की इन टीमों ने पंजीयन कराए हैं।
अभिरंग फाउण्डेशन मुंबई, महाराष्ट्र। स्टेपको सोसाइटी नाहर सिरमौर, हिमाचल प्रदेश। बैली अंकुर नाट्य संस्थान हाबडा, पश्चिम बंगाल। नाट्य वास्तु सांस्कृतिक एवं सामाजिक संस्था कानपुर, उत्तरप्रदेश। पथ, जमशेदपुर झारखंड। कर्मा थिएटर ग्रुप, दिल्ली। विंज इण्टरटेनमेंट फिल्मस् गिरिडीह झारखंड। विश्व रुपम् कला संगम वाराणसी। कलाकृति नाट्य मंच जमशेदपुर। अस्मिता नाट्य संस्थान, मुगलसराय। रंग थियेटर ग्रुप गिरिडीह। बिहू ( असमिया लोकनृत्य) स्मृति कश्यप एवं दल गुवाहाटी असम। फरुवाही लोकनृत्य, सुजीत यादव एवं दल महराजगंज। पायका लोकनृत्य, रविराज एवं दल गिरिडीह। ओडिसी ( उड़िया लोकनृत्य) ज्योतिदास एवं दल बरहमपुर उड़ीसा। पउसा (मणिपुरी लोकनृत्य) द पोल स्टार मणिपुर। छाऊ लोकनृत्य, नटराज ग्रुप साहबगंज झारखंड। कथक नृत्य, संदीप मौर्य एवं दल वाराणसी।
धोबिया लोकनृत्य प्रियांशु सोनकर एवं दल आजमगढ। पखावज लोकनृत्य, शिवनाथ पासवान एवं दल बसंतपुर। कहरवां नृत्य, गोंड़ऊ नृत्य राम अवध गोंड़ एवं दल सग्गापाली गाजीपुर। इसके अतिरिक्त जिले की लोककलाओं के कलाकार और विभिन्न विद्यालयों के नवांकुर कलाकारों की भी प्रस्तुतियाँ होंगी।
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