—बयासी अखार ढाला स्थित श्रीराम जानकी मंदिर में श्रीमद् रामकथा के दूसरे दिन उमड़ा जनसैलाब
— सोहर और भजनों के बीच धूमधाम से मनाया गया भगवान राम का जन्मोत्सव
दुबहर (बलिया)। क्षेत्र के शिवपुर दियर नई बस्ती बयासी अखार ढाला स्थित श्रीराम जानकी मंदिर के प्रांगण में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद् रामकथा के दूसरे दिन गुरुवार को कथा व्यास संत पंडित अरविंद तिवारी ने भगवान श्री राम के जन्मोत्सव का प्रसंग सुनाकर श्रोताओं को भाव-विभोर कर दिया।
संगीत की मधुर धुनों और पारंपरिक सोहरों के बीच भगवान का जन्मोत्सव मनाते हुए पूरा परिसर 'जय श्री राम' के उद्घोष से गुंजायमान हो उठा। धर्म की रक्षा हेतु अवतारवाद का महत्व कथा व्यास ने श्रीमद् रामचरितमानस की चौपाई “विप्र धेनु सुर संत हित, लीन्ह मनुज अवतार” की व्याख्या करते हुए कहा कि जब-जब धरती पर अधर्म बढ़ता है, तब-तब भगवान दुष्टों का संहार करने और सज्जनों की रक्षा के लिए मानवीय रूप में अवतार लेते हैं। उन्होंने बताया कि प्रभु का अवतार मात्र असुरों के वध के लिए नहीं, बल्कि समाज में मर्यादा और धर्म की स्थापना के लिए होता है।
भए प्रगट कृपाला... से जीवंत हुआ जन्मोत्सव जैसे ही कथा में भगवान के जन्म का प्रसंग आया, पंडित जी ने “भए प्रगट कृपाला दीन दयाला, कौशल्या हितकारी” स्तुति का सस्वर पाठ किया। इस अवसर पर उपस्थित श्रद्धालुओं ने भगवान के विग्रह पर पुष्प वर्षा की और झूमते हुए संकीर्तन किया। कथा व्यास ने कहा कि जो दंपत्ति पूरी निष्ठा और पवित्रता से प्रभु की आराधना करते हैं, उन्हें श्री राम जैसी सुयोग्य संतान की प्राप्ति होती है।
गृहस्थ जीवन और मर्यादा का संदेश मानव जीवन के दैनिक क्रियाकलापों पर चर्चा करते हुए उन्होंने जोर दिया कि गृहस्थ जीवन में रहते हुए भी धर्म का पालन संभव है। उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि अपनी समस्त जिम्मेदारियों का निर्वहन मर्यादा और धर्म के मार्ग पर चलते हुए करें। यही प्रभु श्री राम के जीवन का मूल संदेश है।
आरती और प्रसाद वितरण कथा के विश्राम पर मुख्य यजमान सहित अन्य गणमान्य नागरिकों ने विधि-विधान से आरती उतारी। इसके पश्चात उपस्थित सैकड़ों श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद का वितरण किया गया। कथा के दौरान क्षेत्र के तमाम संभ्रांत नागरिक और बड़ी संख्या में महिला व पुरुष श्रद्धालु उपस्थित रहे।
रिपोर्ट: रणजीत सिंह
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