सुरक्षित पेयजल तक पहुंच के विकल्पों के बारे में जानने की है जरूरत
प्रख्यात मौसम वैज्ञानिक प्रो जॉन माइक वॉलेस ने विभिन्न मुद्दों पर रखे विचार
बलिया। अमेरिका से पधारे प्रख्यात पर्यावरणविद एवं मौसम वैज्ञानिक प्रो जॉन माइक वॉलेस, जो सिआटेल में स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ वाशिंगटन में कार्यरत है ने द्वारिका प्रसाद सिन्हा महिला स्नातकोत्तर महाविद्यालय, बांसडीह के भूगोल विभाग में कार्यरत अभिनव पाठक से एक भेंटवार्ता में विभिन्न मुद्दों पर बातचीत की।
प्रो माइक वॉलेस ने बलिया के सन्दर्भ में बात करते हुए कहा कि बलिया उसी तरह की पर्यावरणीय समस्याओं से जूझ रहा है जिसका सामना भारत के अधिकांश लोग करते हैं। जैसे कि वायु और जल का प्रदूषण, मिट्टी की ऊपरी परत का क्षरण, भूजल की कमी और अत्यधिक शोर। इनमें से अधिकांश समस्याओं को हल किया जा सकता है, लेकिन सामुदायिक कार्रवाई के बिना नहीं, और यह भारत में कठिन प्रतीत होता है। मुझे लगता है कि समाधान शुरू करने के लिए सबसे पहले ग्रामीण स्तर पर कार्य करना चाहिए। उदाहरण के लिए, शोर कम करना, तालाबों की सफाई करना, कचरे का प्रबंधन करना। वायु गुणवत्ता में सुधार के लिए सरकार द्वारा उचित कार्यवाही की आवश्यकता होगी।
बलिया के भूजल में स्थित आर्सेनिक के बारे में उन्होंने बताया कि कुओं के पानी में आर्सेनिक का संदूषण कुछ गांवों में एक गंभीर समस्या है। उदाहरण के लिए, बैरिया और बेल्हारी, प्रखंडों में। कई लोग आर्सेनिक से संबंधित बीमारियों से पीड़ित हैं और कई लोगों की मौत हो चुकी है। इन गांवों में रहने वाले परिवारों की सामाजिक स्थिति और आर्थिक स्थिति पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। वहां रहने वाले लोगों को यह देखने के लिए अपने कुओं का परीक्षण करवाना होगा कि कहीं पानी दूषित तो नहीं है। यदि ऐसा है, तो उन्हें सुरक्षित पेयजल तक पहुंच प्राप्त करने के अपने विकल्पों के बारे में जानने की जरूरत है। ऐसे में परिवारों की मदद के लिए बलिया वाटर सेंटर स्थापित किया गया है।
साभार: गणेश कुमार पाठक
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