अधिवक्ता परिषद, बलिया इकाई द्वारा अधिवक्ता दिवस पर आयोजित हुआ कार्यक्रम
बलिया। अधिवक्ता परिषद बलिया इकाई द्वारा अधिवक्ता दिवस व संविधान दिवस के उपलक्ष्य पर जिला न्यायालय के सेंट्रल हाल में एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। न्याय व्यवस्था में अधिवक्ताओं के योगदान, उनकी भूमिका एवं कर्तव्यनिष्ठा को समर्पित इस समारोह में न्यायालय एवं अधिवक्ता समाज से जुड़ी प्रतिष्ठित हस्तियों की विशेष उपस्थिति रही।
कार्यक्रम का शुभारंभ भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद तथा संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुई। इसके पश्चात लोक गायिका वैष्णवी द्वारा भावपूर्ण वन्दे मातरम् की प्रस्तुति ने सभागार में उत्साह और गरिमा का वातावरण बना दिया।कार्यक्रम का संचालन तथा मंचस्थ अतिथियों का औपचारिक परिचय अधिवक्ता परिषद के पूर्व जिला मंत्री अजय राय एवं आउटरीच के मंत्री सुधीर कुमार द्वारा संयुक्त रूप से किया गया।
समारोह में न्यायिक व्यवस्था की गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराने वाले निम्न अतिथि मंचासीन रहे- जनपद न्यायाधीश श्री अनिल कुमार झा (मुख्य अतिथि), वरिष्ठ अधिवक्ता जय प्रकाश सिंह, एल्डर्स कमेटी प्रभारी अध्यक्ष मणिंद्र नाथ राय, कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे अधिवक्ता परिषद बलिया इकाई के जिला अध्यक्ष सुनील राय के साथ रेवेन्यू बार एसोसिएशन के अध्यक्ष, अधिवक्ता परिषद के संरक्षक व प्रान्त कार्यकारिणी के सदस्य विनय कुमार सिंह थे।
मुख्य अतिथि जनपद न्यायाधीश श्री अनिल कुमार झा ने संविधान दिवस व अधिवक्ताओं की भूमिका पर सारगर्भित और प्रेरणादायी वक्तव्य दिया। उन्होंने बताया कि “आज का दिन हम सभी के लिए अत्यंत प्रेरणादायी और गौरव का विषय है। संविधान दिवस हमें उस महान संकल्प की याद दिलाता है, जिसके आधार पर हमारे राष्ट्र की लोकतांत्रिक नींव खड़ी है। उन्होंने आगे बताया कि भारत का संविधान केवल एक दस्तावेज नहीं, बल्कि यह नागरिकों की आशाओं, आकांक्षाओं और अधिकारों का संरक्षक है। उन्होंने अदिवक्ता दिवस पर बोलते हुए कहा कि आज का दिन भारत की विधि-परंपरा, न्याय-व्यवस्था और संवैधानिक मूल्यों के रक्षक- अधिवक्ताओं को समर्पित है। यह अवसर हमें न केवल न्याय के मंदिर में अधिवक्ता की भूमिका का स्मरण कराता है, बल्कि हमारे कर्तव्यों और आदर्शों को भी पुनः दृढ़ता से स्थापित करता है।
उन्होंने कहा “न्यायालय और जनता के बीच विश्वास की जो कड़ी है, उसका सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा अधिवक्ता होते हैं। न्यायिक प्रक्रिया के हर चरण में अधिवक्ताओं की निष्ठा, ज्ञान और प्रतिबद्धता ही न्याय को सार्थक बनाती है। अधिवक्ता दिवस हमारे पेशे की मूल आत्मा- सत्य, कर्तव्य और नैतिक मूल्यों- को पुनः स्मरण करने का दिन है।” हम सभी जानते हैं कि भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद स्वयं एक श्रेष्ठ अधिवक्ता थे। उनकी जयंती के अवसर पर मनाया जाने वाला यह दिवस हमें यह संदेश देता है कि अधिवक्ता केवल केस लड़ने वाला व्यक्ति नहीं, बल्कि समाजिक न्याय का संरक्षक, संविधान का सेतु और जनता की आवाज़ का प्रतिनिधि होता है। उन्होंने युवा अधिवक्ताओं को सतत अध्ययन, शोधशीलता व संवेदनशीलता अपनाने की प्रेरणा दी।
अपर जनपद न्यायाधीश-प्रथम श्री पुनीत गुप्ता ने न्यायिक व्यवस्था में अधिवक्ताओं की जिम्मेदारियों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि “न्याय की गति और गुणवत्ता अधिवक्ताओं के परिश्रम व तैयारी पर टिकी होती है। अधिवक्ताओं की वकालत केवल बहस नहीं, बल्कि विधि व समाज के प्रति उत्तरदायित्व की अभिव्यक्ति है।” उन्होंने संविधान की व्याख्या करते हुए कहा कि “संविधान दिवस केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं—यह विचार, मूल्य और प्रतिबद्धता का दिवस है। हम सब उस परम्परा के वाहक हैं, जिसे हमारे संविधान-निर्माताओं ने अत्यंत परिश्रम और दूरदर्शिता से स्थापित किया।
मंच से भिन्न वक्ताओं में श्री अवधेश राय पूर्व अध्यक्ष, सिविल बार एसोसिएशन, बलिया ने कहा कि अधिवक्ता समाज न्याय और सत्य की आवाज़ है। परिषद के संगठनात्मक कार्यों और अधिवक्ता हितों की रक्षा पर उन्होंने विशेष जोर दिया। प्रदीप कौशिक ने युवा अधिवक्ताओं को धैर्य, शुचिता, विश्लेषण-क्षमता और निरंतर अध्ययन को अपनाने का संदेश दिया।
विषय प्रवर्तन रखते हुए डॉ. राकेश सिंह- जिला प्रमुख, स्वाध्याय मंडल ने अधिवक्ता परिषद के वैचारिक योगदान और सामाजिक दायित्वों पर प्रकाश डाला तथा अधिवक्ताओं को समाज के बौद्धिक नेतृत्वकर्ता की संज्ञा दी। वक्ताओं ने अधिवक्ता पेशे की चुनौतियों, जिम्मेदारियों, संविधान-समर्थित कर्तव्यों और न्याय व मानवाधिकारों के प्रति अधिवक्ताओं की भूमिका पर अपने विचार रखे।
समारोह के अंत में अधिवक्ता परिषद काशी प्रान्त के प्रान्त कार्यकारिणी सदस्य एवं बलिया इकाई के संरक्षक श्री विनय कुमार सिंह ने सभी अतिथियों, वक्ताओं, अधिवक्ता बंधुओं और आयोजन समिति के सदस्यों का हृदय से आभार व्यक्त करते हुए कहा कि आज का यह आयोजन अधिवक्ताओं के ज्ञान-विस्तार, आत्ममंथन और संगठनात्मक सुदृढ़ता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। ज्ञात हो कि इस अवसर पर उपस्थित न्यायाधिकारियों, अधिवक्ताओं, कर्मचारियों व वादकारियों का जिला अस्पताल के चिकित्सकीय टीम द्वारा खून की जांच भी की गई।
इस अवसर पर अपर जनपद न्यायाधीश पाक्सो प्रथमकांत, विशेष जनपद न्यायाधीश रामकृपाल, विशेष जनपद न्यायाधीश एस. सी./ एस. टी. एक्ट प्रमोद कुमार गंगवार, सिविल जज (जू. डि.) स्निग्धा प्रधान, सुरभि सिंह, विश्वासन, समस्त न्यायिक अधिकारीगण, बलिया इकाई के महामंत्री सावन ठाकुर, अजय तिवारी, पियुष सिंह, उपाध्यक्ष कन्हैया तिवारी, विजय शंकर पाण्डेय, विनोद भारद्वाज, सुशील श्रीवास्तव, डॉ. संतोष तिवारी, श्रीमती पूनम सिंह, अधिवक्ता परिषद की महिला प्रमुख शशि प्रभा पांडेय, श्रीमती रानी सिंह, सुजाता शर्मा किर्ती श्रीवास्तव, शिल्पी, गुड़िया, खुशबू, पिंकी तिवारी,आनंदी, बबिता,संगमलता, आकांक्षा आदि के साथ सैकड़ों अधिवक्ताओं की उपस्थिति रही। उपरोक्त बात की जानकारी अदिवक्ता मारुति नन्दन तिवारी द्वारा दी गयी।
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