Tuesday, February 4, 2025

जनजाति गोंड समुदाय का धरना 9वें दिन भी रहा जारी


शासनादेश का अनुपालन कराने की मांग को लेकर चल रहा अनिश्चितकालीन धरना 
बलिया। विशेष सचिव उ0प्र0 समाज कल्याण अनुभाग-3, शासनादेश 2 दिसम्बर 2024 द्वारा मा.प्रमुख सचिव समाज कल्याण अनुभाग-3, शासनादेश 3 नवम्बर 2021 द्वारा दिये गये दिशा निर्देश का कड़ाई से अनुपालन करने का निर्देश दिया गया है, का अनुपालन कराने की मांग को लेकर आल गोंडवाना स्टूडेन्ट्स एसोसिएशन (आगसा) के नेतृत्व में बलिया सदर माॅडल तहसील पर आदिवासी जनजाति गोंड समुदाय के छात्र नौजवानों का जाति प्रमाण-पत्र निर्गत होने तक अनिश्चितकालीन धरना 4 फरवरी दिन मंगलवार को 9वें दिन भी जारी रहा। 

धरनारत लोगों ने कहा कि उ0प्र0 शासन द्वारा गोंड अनुसूचित जनजाति का प्रमाण-पत्र जारी करने हेतु बार-बार शासनादेश भेजा जाता है जो जिला व तहसील पर आते- आते शून्य हो जाता है। गोंड जाति प्रमाण पत्र के लिये ऑनलाईन आवेदन करने पर हर बार आवेदन अस्वीकृत कर दिया जा रहा है। लेखपाल व तहसीलदार भारत के राजपत्र संविधान शासनादेश का घोर अवमानना कर रहे हैं। अब ऐसी स्थिति में निर्णायक संघर्ष के अलावा दूसरा रास्ता नहीं बचता है। ऑल गोंडवाना स्टूडेन्ट्स एसोसिएशन (आगसा) के अध्यक्ष मनोज शाह ने कहा कि साल के प्रथम सम्पूर्ण समाधान दिवस पर जिलाधिकारी महोदय प्रवीण कुमार लक्षकार जी को शासनादेश के अनुपालन में गोंड जाति प्रमाण-पत्र सुगमतापूर्वक निर्गत करने सम्बन्धित पत्रक सौंपा गया था जिसके परिप्रेक्ष्य में सदर तहसील द्वारा आनलाईन लिखित रूप से अवगत कराया गया है कि पात्र लोगों को गोंड अनुसूचित जनजाति का प्रमाण-पत्र जारी किया जा रहा है जबकि वास्तविकता यह है कि जाति प्रमाण-पत्र हेतु जब गोंड छात्र नौजवान ऑनलाईन आवेदन करते हैं तो बलिया सदर तहसीलदार द्वारा ऑनलाईन आवेदन अस्वीकृत/ निरस्त कर दिया जा रहा है। 

कहा कि शासनादेश की अवमानना करते हुए परेशान व उत्पीड़न किया जा रहा है और जिला प्रशासन इन पर अनुशासनात्मक कार्यवाही करने के बजाय मुकदर्शक की भूमिका में खड़ा नजर आता है। कुंवर सिंह महाविद्यालय छात्रसंघ के पूर्व महामंत्री ने कहा कि हमारे भविष्य से खिलवाड़ करना बंद करे तहसील प्रशासन तत्काल गोंड जाति प्रमाण पत्र जारी करना प्रारम्भ नहीं हुआ तो आंदोलन को और भी तेज किया जाएगा।

 धरना में प्रमुख रूप से मनोज शाह, सुरेश शाह, सुमेर गोंड, सूचित गोंड, बच्चालाल गोंड, विक्रम गोंड, सुदेश कुमार मंडावी, श्रीपति गोंड, धनंजय गोंड, भरत गोंड, सिकन्दर गोंड, अजय कुमार, नवीन कुमार गोंड, प्रदुमन कुमार, रामनारायन गोंड, धर्मदेव गोंड, श्रीभगवान गोंड, रघुनाथ गोंड भी रहे।

Saturday, February 1, 2025

2 फरवरी, आर्द्र भूमि संरक्षण दिवस पर विशेष-

बलिया के लिए वरदान हैं आर्द्र भूमियां

जैव विविधता एवं भू-गर्भ जल के लिए किडनी की तरह काम करती हैं आर्द्र भूमि: डा० गणेश पाठक
 आर्द्र भूमि किसी भी क्षेत्र की जैवविविधता, पारिस्थितिकी एवं भू-गर्भ जल को सुरक्षित एवं सम्वर्द्धित कर दीर्घ काल तक संचित बनाए रखते हुए न केवल मानव के लिए जल उपलब्ध करातीं हैं,  बल्कि आहार को भी उपलब्ध कराती हैं एवं अन्य जीव जंतुओं के लिए भी जीवन का आधार बनती हैं। आर्द्र भूमि वह भूमि होती है, जहां वर्ष में 8 माह जल भरा रहता है। इस तरह जल से संतृप्त भू-भाग को ही आर्द्र -भूमि कहा जाता है। इस प्रकार आर्द्र- भूमि वह भूमि होती है, जहां जल, पर्यावरण एवं इससे जुड़े पौधे तथा वन्य- जीव को नियंत्रित करने के प्राथमिक कारक होते हैं। 

वर्तमान समय में आर्द्र- भूमियों को विशिष्ट पारिस्थितिकीय विशेषताओं, कार्यों एवं मूल्यों के साथ अलग पारिस्थितिकी प्रणालियां माना जाने लगा है। इस प्रकार आर्द्र- भूमियां प्राकृतिक एवं मानव निर्मित मीठे या खारा जल वाली अनेक पारिस्थितिकी सेवाएं प्रदान करती हैं। पक्षियों का घनत्व विशेष रूप से किसी आर्द्र भूमि की पारिस्थितिकी का वास्तविक संकेत होता है।

                       डा० गणेश पाठक
                       ( पर्यावरणविद् )

  बलिया जनपद आर्द्र- भूमि की दृष्टि से अत्यन्त धनी क्षेत्र है। बलिया जनपद की भौगोलिक स्थिति है कि यह जनपद तीन तरफ से गंगा,सरयू एवं तमसा (छोटी सरयू) नदियों से घिरा हुआ है। ये नदियां प्राचीन काल से वर्तमान समय तक अपने प्रवाह मार्ग को परावर्तित करती रही हैं, जिसके चलते इन नदियों द्वारा झाड़न के रूप में छोटे -बड़े  ताल - तलैयों का निर्माण होता रहा है। भौगोलिक भाषा में इन्हें गोखुर झील अर्थात् गाय के खुर के आकार का झील भी कहा जाता है। 'सुरहा ताल' इसका उत्तम उदाहरण है। भारतीय सर्वेक्षण विभाग द्वारा जारी बलिया ज़िला के 'भूपत्रक' के अध्ययन के अनुसार इस जिला में 88 से अधिक आर्द्र- भूमि हैं, जिनमें से लगभग 40 आर्द्र- भूमियों की पहचान कर ली गयी है। इन 40 आर्द्र भूमियों में से भी 28 आर्द- भूमि विशेष रूप से चिन्हित हैं। इन आर्द्र -भूमियों में से सुरहा ताल, दह मुड़ियारी एवं रेवती दह मुख्य हैं। ये सभी आर्द्र - भूमियां बलिया जिला के लिए किडनी एवं धमनियों की तरह काम करती हैं। जिस तरह किडनी शरीर के खून को साफ कर धमनियों के माध्यम से पूरे शरीर में स्वच्छ खून का संचार करती हैं, उसी तरह ये आर्द्र-भूमियां बलिया ज़िला के भू-गर्भ जल को स्वच्छ कर हमें पीने हेतु स्वच्छ जल उपलब्ध करातीं हैं, साथ ही साथ भू-गर्भ जल संभरण कर दीर्घ काल तक सुरक्षित भी रखती हैं। बलिया जिला इस मायने में भाग्यशाली हैं। 

बलिया ज़िला में स्थित आर्द्र-भूमियां बलिया जिले की जैवविविधता को भी समृद्धि प्रदान कर पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी को भी सुरक्षित एवं संरक्षित रखती हैं। ये आर्द्र- भूमियां जलीय उत्पादों खासतौर से मछली, धान, सिंघाड़ा, कमल ककड़ी, कमलगट्टा, बेरा,भसेड़ आदि उत्पादों को प्रदान कर हमें आहार भी प्रदान करती हैं। इनमें उत्पन्न अनेक प्रकार की वनस्पतियों द्वारा जल का शोधन भी होता है एवं जल प्रदूषित होने से भी बचता है। पशुओं के लिए भी इन आर्द्र- भूमियों से आहार प्राप्त होता है।

बलिया ज़िला में चिन्हित आर्द्र- भूमियों में सुरहा ताल, दह मुड़ियारी, रेवती दह, गड़हा, इटौरा, खालिस, गोन्हिया, दुल्लहपुर, पाण्डेयपुर, मोतिरा, नगरा, सवन, सुहेला, पकरी, मदारी, लखुनिया, बरका, बहेरी, टेंगरही, टेंगरहा, कोलनाला, संसार टोला, कोड़हरा, लहसनी, यमुना, चंदवक, बरौली, जमालपुर, खामपुर, चरौंवा, कैथौली, हरवंशपुर, मुस्तफाबाद, नसीरपुर एवं दौलतपुर मुख्य हैं।

इसके अलावा कटहल (कष्टहर ) नाला एवं कोल नाला दो ऐसे प्राकृतिक नाला हैं, जिनमें वर्ष भर जल रहता है और ये नाले बलिया की आर्द्र-भूमियों में महत्वपूर्ण  भूमिका निभाते हैं। साथ ही साथ अन्य भी ऐसे नाले हैं, जिनमें से कुछ ऋत्विक हैं एवं कुछ सतत प्रवाही हैं, जो आर्द्र- भूमि के रूप में काम करते हैं।

  सुरहा ताल न केवल बलिया का, बल्कि उत्तर प्रदेश का एक बड़ा ताल माना जाता हैं। सुरहा ताल गंगा नदी के मार्ग परिवर्तन के कारण निर्मित एक गोखुर झील है, जिसका उद्धार नेपाल नरेश राजा 'सुरथ' द्वारा कराया गया था, जिनके नाम पर इसका नाम ' सुरथ ताल' पड़ा, जो कालान्तर में अपभ्रंश होकर 'सुरथा ताल' हो गया एवं पुनः बाद में अपभ्रंश होकर 'सुरहा ताल' हो गया। सुरहा ताल का औसत क्षेत्रफल 24.6 वर्ग किमी० है, किंतु बरसात के दिनों में इसका विस्तार 34.2 वर्ग किमी०क्षेत्र में हो जाता है। ग्रीष्म काल में जल में कमी हो जाने के कारण इसका क्षेत्रफल घटकर 21 वर्ग किमी० रह जाता है। वर्तमान समय में इस ताल के क्षेत्रफल में निरन्तर कमी होती जा रही है, जिसका मुख्य कारण इस ताल की तलहटी में गाद का जमाव होना एवं अतिक्रमण का होना है। सुरहा ताल अपने - आपमें अनेक विशेषताओं को समेटे हुए है। यह एक ऐसा ताल है, जिसमें वर्ष भर जल रहता है। 

आर्द्र- भूमि पारिस्थितिकी की जितनी भी विशेषताएं होती हैं, वो सभी विशेषताएं सुरहा ताल में पायी जाती हैं। सुरहा ताल में न केवल विविध प्रकार के जलीय जीव, बल्कि विविध प्रकार की जलीय वनस्पतियां एवं  विभिन्न प्रकार की रंग - विरंगी पक्षियां भी पायी जाती हैं। सुरहा ताल जलीय पारिस्थितिकी एवं आर्द्र भूमि पारिस्थितिकी के लिए इतना धनी हैं कि यहां विदेशी पक्षियां अपना डेरा डाले रहती हैं। खासतौर से साइबेरियाई सारस एवं लालसर तथा अन्य रंग- विरंगी पक्षियां हजारों किमी० की यात्रा कर जाड़ा प्रारम्भ होते ही इस ताल में आ जाती हैं एवं गर्मी शुरू होते ही यहां से प्रस्थान कर जाती हैं। किंतु अनियमित एवं अनियंत्रित तरीके से किए जा रहे शिकार के चलते अब ये कम संख्या में आ रही हैं। यद्यपि कि सुरहा ताल पक्षी विहार भी है और भारत के पक्षी विहार मानचित्र पर प्रदर्शित भी है, इसके बावजूद भी इसका विकास नहीं हो पाया है और पक्षी विहार सिर्फ कहने भर को रह गया है। यद्यपि कि वर्तमान  समय में सुरहा ताल एवं उसके चतुर्दिक क्षेत्र को पारिस्थितिकी दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्र घोषित कर दिया गया है, फिर भी इसका कोई प्रभाव दृष्टिगोचर नहीं हो रहा है। पर्यटन की दृष्टि से भी सुरहा ताल का विकास किया जा रहा है, किंतु धरातलीय स्तर पर बहुत सफल नहीं दिखाई दे रहा है।

 इस प्रकार यदि बलिया जनपद को पर्यावरण, पारिस्थितिकी एवं जैवविविधता की दृष्टि से समृद्ध एवं सुरक्षित रखना है तो सुरहा ताल  को संरक्षित एवं सुरक्षित क्षेत्र तथा पर्यटन क्षेत्र घोषित कर इसका विकास करना होगा, तभी सुरहा ताल के अस्तित्व को बचाया जा सकता है। साथ ही साथ बलिया ज़िला के चिन्हित सभी आर्द्र- भूमियों को भी सुरक्षित एवं संरक्षित करना होगा, अन्यथा वनस्पति विहिन इस बलिया ज़िला को पारिस्थितिकी दृष्टि से असंतुलित होने से कोई नहीं बचा पायेगा और हमारा अस्तित्व भी खतरे में पड़ जायेगा।

धरने के छठवें दिन सम्पूर्ण समाधान दिवस पर एसडीएम सदर को सौंपा गया पत्रक

शासनादेश में दिए गए दिशा निर्देशों का कड़ाई से अनुपालन कराने की मांग को लेकर चल रहा धरना
बलिया। मा.विशेष सचिव उ.प्र. शासनादेश दिनांक 2 दिसंबर 2024 द्वारा दिए गए दिशा निर्देशों का कड़ाई से अनुपालन कराने की मांग को लेकर ऑल गोंडवाना स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आगसा) के तत्वावधान में अनिश्चित कालीन धरने के छठवें दिन एक फरवरी दिन शनिवार को गोंड छात्र, नौजवानों ने शासनादेश में दिये गये दिशा निर्देश का कड़ाई से अनुपालन करो, नारे के साथ सम्पूर्ण समाधान दिवस सदर तहसील पर जोरदार धरना प्रदर्शन किया तथा उपजिलाधिकारी मा.आत्रेय मिश्र के हाथो में पत्रक सौंपा।

 इस दौरान ऑल गोंडवाना स्टूडेंट एसोसिएशन (आगसा) के अध्यक्ष मनोज शाह ने कहा कि पिछले छः दिनों से शासनादेश में दिए गए दिशा निर्देशों का अनुपालन कराने की मांग को लेकर लगातार धरना दिया जा रहा है। इसके बावजूद भी बलिया सदर तहसीलदार द्वारा शासनादेश का अनुपालन नहीं किया जा रहा हैं बल्कि घोर आवमाना की जा रही है। ऐसी स्थिति में गोंड छात्र नौजवानों ने एक स्वर में कहा कि भारत के राजपत्र संविधान और शासनादेश का अनुपालन कराने की मांग को लेकर अनिश्चित कालीन धरना चलता रहेगा।

 इस अवसर पर प्रमुख रूप से मनोज शाह, संजय गोंड, सुरेश गोंड सुमेर गोंड, सूचित गोंड, लल्लन गोंड, विक्रम गोंड, अविनाश गोंड, कृष्ण कुमार गोंड, धनंजय गोंड, पंकज गोंड संतोष गोंड जगदीश गोंड, कु० अनामिका गोंड, कु० इंदु गोंड, शिवशंकर गोंड  तथा अरविंद गोंडवाना प्रमुख रूप से रहे।

हर्षोल्लास के साथ मनाया गया बसंत पंचमी का त्यौहार

सेवा सदन स्कूल कथरिया में हुआ सांस्कृतिक कार्यक्रम एवं झांकी की प्रस्तुति
बलिया। सेवा सदन स्कूल कथरिया में शनिवार को बसंत पंचमी का त्यौहार हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस दौरान ज्ञान की देवी मां सरस्वती की पूजा करते हुए सभी बच्चों ने ज्ञान प्राप्त करने का आशीर्वाद लिया। 

विद्यालय के प्रबंधक डॉ. सुधीर कुमार सिंह ने कार्यक्रम का उद्घाटन किया। इस दौरान बच्चों ने मां सरस्वती की आराधना करते हुए सांस्कृतिक कार्यक्रम और झांकी प्रस्तुत किया। स्कूल की प्रिंसिपल सुमन सिंह  ने सभी बच्चों, शिक्षकों एवम अभिभावकों को बसंत पंचमी और सरस्वती पूजा की बधाई दी। 

इस मौके पर अंजली पांडेय, दीप शिखा सिंह, अंशिका सिंह, किरन राज, संध्या गिरि, श्वेता, रिया गुप्ता, सोनम सहित सभी शिक्षक एवं बच्चें उपस्थित रहे।

श्री भृगु बाबा सेवा समिति द्वारा विशाल भंडारे का हुआ आयोजन

चैत्र माह नवरात्रि और रामनवमी के शुभ अवसर पर हुआ अखण्ड हरिकीर्तन एवं विशाल भंडारा बलिया। श्री भृगु बाबा सेवा समिति बलिया द्वारा...